भगवान्के प्रेम-रहस्य को प्रेमी भक्त खोलना नहीं चाहते और न खुलवाना ही चाहते हैं।
भगवान्के प्रेम-रहस्य को प्रेमी भक्त खोलना नहीं चाहते और न खुलवाना ही चाहते हैं। ८६- श्रीयशोदाजीके हृदयमें अपने सुत श्रीकृष्णके सिवा और कुछ रहता ही नहीं। प्रेम भावमय होता है।…







