सन्त को पकड़ लेने के बाद अश्रद्धा रहती ही नहीं।
४२-सन्तको पकड़ लेनेके बाद अश्रद्धा रहती ही नहीं। अतः जबतक अश्रद्धा बनी हुई है, वृत्ति भगवान्की ओरसे हटकर विषयोंकी ओर जाती है, तबतक यह समझना चाहिये कि हम सन्तके आसपास…
४२-सन्तको पकड़ लेनेके बाद अश्रद्धा रहती ही नहीं। अतः जबतक अश्रद्धा बनी हुई है, वृत्ति भगवान्की ओरसे हटकर विषयोंकी ओर जाती है, तबतक यह समझना चाहिये कि हम सन्तके आसपास…
४२-सन्तको पकड़ लेनेके बाद अश्रद्धा रहती ही नहीं। अतः जबतक अश्रद्धा बनी हुई है, वृत्ति भगवान्की ओरसे हटकर विषयोंकी ओर जाती है, तबतक यह समझना चाहिये कि हम सन्तके आसपास…
२४-शरणागतिके दो स्वरूप हैं। (१) शुद्ध होकर भगवान्की शरणमें जाना। इसमें शुद्धिके लिये अपना बल लगाना पड़ता है; अपने बलपर शुद्धि करनी पड़ती है। (२) ‘जैसे हो वैसे ही शरण…
२४-शरणागतिके दो स्वरूप हैं। (१) शुद्ध होकर भगवान्की शरणमें जाना। इसमें शुद्धिके लिये अपना बल लगाना पड़ता है; अपने बलपर शुद्धि करनी पड़ती है। (२) ‘जैसे हो वैसे ही शरण…
१- ऋषि जगत्कें बड़े उपकारक हैं। वे मन्त्रद्रष्टा हैं एवं उनके प्रचारक हैं। वैदिक, तान्त्रिक आदि जितने मन्त्र हैं, उनकी साधना कैसे करनी चाहिये-यह जगत्ने जाना है इन ऋषियोंकी कृपासे…
१- ऋषि जगत्कें बड़े उपकारक हैं। वे मन्त्रद्रष्टा हैं एवं उनके प्रचारक हैं। वैदिक, तान्त्रिक आदि जितने मन्त्र हैं, उनकी साधना कैसे करनी चाहिये-यह जगत्ने जाना है इन ऋषियोंकी कृपासे…
भगवान्के प्रेम-रहस्य को प्रेमी भक्त खोलना नहीं चाहते और न खुलवाना ही चाहते हैं। ८६- श्रीयशोदाजीके हृदयमें अपने सुत श्रीकृष्णके सिवा और कुछ रहता ही नहीं। प्रेम भावमय होता है।…
भगवान्के प्रेम-रहस्य को प्रेमी भक्त खोलना नहीं चाहते और न खुलवाना ही चाहते हैं। ८६- श्रीयशोदाजीके हृदयमें अपने सुत श्रीकृष्णके सिवा और कुछ रहता ही नहीं। प्रेम भावमय होता है।…
६२-बड़भागी वे नहीं, जिनके पास प्रचुर मात्रामें धन है या जिनका विषयोंमें बहुत प्रेम है। बडभागी वे हैं जिनका भगवानमें प्रेम है। बारह गुणोंसे युक्त ब्राह्मणसे, जो भगवानसे प्रेम नहीं…
६२-बड़भागी वे नहीं, जिनके पास प्रचुर मात्रामें धन है या जिनका विषयोंमें बहुत प्रेम है। बडभागी वे हैं जिनका भगवानमें प्रेम है। बारह गुणोंसे युक्त ब्राह्मणसे, जो भगवानसे प्रेम नहीं…
३६-भगवान् प्रकृतिसे अतीत हैं। अतः उनके गुण नाशवान् नहीं- दिव्य हैं, नित्य हैं। भगवान्में प्राकृत गुणोंका संस्पर्श-लेश भी नहीं है, इसीलिये भगवान् निर्गुण हैं। भगवान्के जो गुण हैं, वे गुणीसे…
३६-भगवान् प्रकृतिसे अतीत हैं। अतः उनके गुण नाशवान् नहीं- दिव्य हैं, नित्य हैं। भगवान्में प्राकृत गुणोंका संस्पर्श-लेश भी नहीं है, इसीलिये भगवान् निर्गुण हैं। भगवान्के जो गुण हैं, वे गुणीसे…
१७-जीवकी तुच्छशक्तिके काँटेपर जब हम भगवान्की क्रियाओं तौलने जाते हैं, तब विफल ही होते हैं। पर यदि अपनी शक्तिको भूलकर श्रीकृष्णकी अचिन्त्य शक्तिकी ओर ध्यान दें तो हमें मालूम होगा…
१७-जीवकी तुच्छशक्तिके काँटेपर जब हम भगवान्की क्रियाओं तौलने जाते हैं, तब विफल ही होते हैं। पर यदि अपनी शक्तिको भूलकर श्रीकृष्णकी अचिन्त्य शक्तिकी ओर ध्यान दें तो हमें मालूम होगा…
सप्तम माला १-वेद-शास्त्र इसीलिये जगत्का कल्याण करते हैं कि उनमें भगवान्के गुण, महत्त्व, तत्त्व, रहस्य, स्वरूप, लीला, धाम और नाम आदिका विशद विवेचन है। २-तीर्थ इसीलिये पतितपावन हैं कि उनमें…
सप्तम माला १-वेद-शास्त्र इसीलिये जगत्का कल्याण करते हैं कि उनमें भगवान्के गुण, महत्त्व, तत्त्व, रहस्य, स्वरूप, लीला, धाम और नाम आदिका विशद विवेचन है। २-तीर्थ इसीलिये पतितपावन हैं कि उनमें…
९४-जैसे वृक्षकी जड़में जल सींचनेसे सारे पेड़में रस पहुँच जाता है, इसी प्रकार एक भगवान्की उपासनासे सबकी उपासना सम्पन्न हो जाती है। ९५-जैसे सरकारकी शक्तिसे, सरकारकी यथायोग्य शक्तिको पाये हुए…
९४-जैसे वृक्षकी जड़में जल सींचनेसे सारे पेड़में रस पहुँच जाता है, इसी प्रकार एक भगवान्की उपासनासे सबकी उपासना सम्पन्न हो जाती है। ९५-जैसे सरकारकी शक्तिसे, सरकारकी यथायोग्य शक्तिको पाये हुए…
६२-मनको पवित्र और संयत करनेका एक बड़ा सुन्दर और सफल साधन है-सत्संगमें रहकर निरन्तर भगवान्की अतुलनीय महिमा और पवित्र लीला-कथाओंका सुनना और फिर उनका भलीभाँति मनन करते रहना। ६३-भगवान्की महिमा…
६२-मनको पवित्र और संयत करनेका एक बड़ा सुन्दर और सफल साधन है-सत्संगमें रहकर निरन्तर भगवान्की अतुलनीय महिमा और पवित्र लीला-कथाओंका सुनना और फिर उनका भलीभाँति मनन करते रहना। ६३-भगवान्की महिमा…
३६-किसी पापका सच्चा प्रायश्चित्त तब होता है, जब १. उसके लिये मनमें भयानक पीड़ा – घोर पश्चात्ताप हो, २. भविष्यमें वैसा न करनेका दृढ़ निश्चय हो, ३. अपने पापको प्रकट…
३६-किसी पापका सच्चा प्रायश्चित्त तब होता है, जब १. उसके लिये मनमें भयानक पीड़ा – घोर पश्चात्ताप हो, २. भविष्यमें वैसा न करनेका दृढ़ निश्चय हो, ३. अपने पापको प्रकट…
१-जहाँ प्रेम प्रेमके लिये ही होता है-बिना किये ही होता है, किसी चाहकी जहाँ कल्पना भी नहीं है, वहीं निर्मल अहैतुक प्रेम प्रकट होता है। २-यथार्थ सुन्दर और मधुर वही…
१-जहाँ प्रेम प्रेमके लिये ही होता है-बिना किये ही होता है, किसी चाहकी जहाँ कल्पना भी नहीं है, वहीं निर्मल अहैतुक प्रेम प्रकट होता है। २-यथार्थ सुन्दर और मधुर वही…
६०-अज्ञानी मनुष्य ही अभिमान का गुलाम है; बुद्धिमान् तो विनयी होता है। ६१-अहंकार प्रचण्ड निदाघका मध्याह्न है और विनय वसन्तकी संध्या ! ६२-जो कुछ करना चाहते हो, पहलेसे ही उसका…
६०-अज्ञानी मनुष्य ही अभिमान का गुलाम है; बुद्धिमान् तो विनयी होता है। ६१-अहंकार प्रचण्ड निदाघका मध्याह्न है और विनय वसन्तकी संध्या ! ६२-जो कुछ करना चाहते हो, पहलेसे ही उसका…
२७-जब सुखकी चाह कम होती है, तब उतनी ही चिन्ता भी कम होती है। जहाँ भोग-विलासरूप सुखकी स्पृहा आयी कि चारों ओरसे फंदे पड़ने लगे। २८-मनुष्य स्वयं ही अपनी मूर्खतासे…
२७-जब सुखकी चाह कम होती है, तब उतनी ही चिन्ता भी कम होती है। जहाँ भोग-विलासरूप सुखकी स्पृहा आयी कि चारों ओरसे फंदे पड़ने लगे। २८-मनुष्य स्वयं ही अपनी मूर्खतासे…
पंचम माला तुम पिछले अनन्त जन्मोंमें न मालूम कितने माता-पिताओंकी स्नेहभरी गोदमें खेले हो….. १-तुम पिछले अनन्त जन्मोंमें न मालूम कितने माता-पिताओंकी स्नेहभरी गोदमें खेले हो, कितनी पतिप्राणा प्रेमिकाओंके प्रेमरसमें…
पंचम माला तुम पिछले अनन्त जन्मोंमें न मालूम कितने माता-पिताओंकी स्नेहभरी गोदमें खेले हो….. १-तुम पिछले अनन्त जन्मोंमें न मालूम कितने माता-पिताओंकी स्नेहभरी गोदमें खेले हो, कितनी पतिप्राणा प्रेमिकाओंके प्रेमरसमें…
७७. मनुष्य घर की एक एक चीज पर अपना अधिकार मानता है. पर मरने पर क्या होता है? कफनके लिये कपड़ेके एक टुकड़ेपर भी उसका अधिकार नहीं है! वह भी…
७७. मनुष्य घर की एक एक चीज पर अपना अधिकार मानता है. पर मरने पर क्या होता है? कफनके लिये कपड़ेके एक टुकड़ेपर भी उसका अधिकार नहीं है! वह भी…
School-College में बोलते हैं माँ-बहन की गाली देने से दोस्ती गहरी होगी महाराज जी से एक युवा भक्त ने पूछा कि महाराज जी School-College में बोलते हैं माँ-बहन की गाली…
School-College में बोलते हैं माँ-बहन की गाली देने से दोस्ती गहरी होगी महाराज जी से एक युवा भक्त ने पूछा कि महाराज जी School-College में बोलते हैं माँ-बहन की गाली…
महाराज जी की मोदी जी और योगी जी से मुलाकात है बहुप्रत्याक्षित महाराज जी की बढती लोकप्रियता को देखते हुए संभावना है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी और उत्तर प्रदेश…
महाराज जी की मोदी जी और योगी जी से मुलाकात है बहुप्रत्याक्षित महाराज जी की बढती लोकप्रियता को देखते हुए संभावना है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी और उत्तर प्रदेश…
अब हर 15 मिनट में महाराज जी आपको याद दिलाएंगे नाम जप करना महाराज जी हमेशा अपने भक्तों को कहते है कि सभी समस्याओं का समाधान नाम जप है. आपको…
अब हर 15 मिनट में महाराज जी आपको याद दिलाएंगे नाम जप करना महाराज जी हमेशा अपने भक्तों को कहते है कि सभी समस्याओं का समाधान नाम जप है. आपको…
पहला नम्बर वीर महान का, आगे आगे देखो और कितने सेलेब्रिटी महाराज जी के लिए बनेंगे साधू डब्लूडब्लूई रेसलिंग स्टार वीर महान उर्फ़ रिंकू सिंह राजपूत महाराज Vrindavan Rasik Sant…
पहला नम्बर वीर महान का, आगे आगे देखो और कितने सेलेब्रिटी महाराज जी के लिए बनेंगे साधू डब्लूडब्लूई रेसलिंग स्टार वीर महान उर्फ़ रिंकू सिंह राजपूत महाराज Vrindavan Rasik Sant…
वृन्दावन जाने से पहले यह पढ़ ले परेशान होने से बच सकते हैं इस समय वृन्दावन धार्मिक आस्था का हॉट स्पॉट बना हुआ है. हर रोज लाखों भक्त वृन्दावन में…
वृन्दावन जाने से पहले यह पढ़ ले परेशान होने से बच सकते हैं इस समय वृन्दावन धार्मिक आस्था का हॉट स्पॉट बना हुआ है. हर रोज लाखों भक्त वृन्दावन में…
सारे साधनोंका प्राण है- भगवान्का नाम ४१-सारे साधनोंका प्राण है- भगवान्का नाम । ‘नाम रामको अंक है, सब साधन हैं सून।’ खूब भजन करो और दूसरोंसे करवाओ। ४२-मनुष्य सदा डरता…
सारे साधनोंका प्राण है- भगवान्का नाम ४१-सारे साधनोंका प्राण है- भगवान्का नाम । ‘नाम रामको अंक है, सब साधन हैं सून।’ खूब भजन करो और दूसरोंसे करवाओ। ४२-मनुष्य सदा डरता…
प्रश्न- खुद और अपने बच्चों को भगवान के मार्ग में कैसे चलाएं ? पांच बातें स्वीकार कर लो 1.सुमिरन- किसी भी एक नाम का सुमिरन 2. सेवा- माता-पिता की सेवा,…
प्रश्न- खुद और अपने बच्चों को भगवान के मार्ग में कैसे चलाएं ? पांच बातें स्वीकार कर लो 1.सुमिरन- किसी भी एक नाम का सुमिरन 2. सेवा- माता-पिता की सेवा,…
मनुष्य भूल करता है, सुख एवं सुविधाएँ चाहता है, पर चाहता है भगवान् की ओर पीठ देकर, चतुर्थ माला १-जबतक भगवान्की ओर मुख नहीं हो जाता, तबतक यथार्थ में सुख…
मनुष्य भूल करता है, सुख एवं सुविधाएँ चाहता है, पर चाहता है भगवान् की ओर पीठ देकर, चतुर्थ माला १-जबतक भगवान्की ओर मुख नहीं हो जाता, तबतक यथार्थ में सुख…
भगवान् प्रेमके वश होकर क्या नहीं करते- सब कुछ करते हैं ८८-भगवत्प्रेमके लिये साधना करनी चाहिये, जैसे भी हो इसकी उपलब्धि करनी चाहिये। ८९-जिस दिन मनुष्य सब भूतों में अपने-आपको…
भगवान् प्रेमके वश होकर क्या नहीं करते- सब कुछ करते हैं ८८-भगवत्प्रेमके लिये साधना करनी चाहिये, जैसे भी हो इसकी उपलब्धि करनी चाहिये। ८९-जिस दिन मनुष्य सब भूतों में अपने-आपको…
जब जीवन में बहुत दुखी हों, परेशान हों, विपत्ति मे हों, हार गये हों तो ये सुनो !! देखो सबसे पहली बात की हमारी कमजोरी क्या है. हम परेशान हो…
जब जीवन में बहुत दुखी हों, परेशान हों, विपत्ति मे हों, हार गये हों तो ये सुनो !! देखो सबसे पहली बात की हमारी कमजोरी क्या है. हम परेशान हो…
बुढ़ापे के कष्ट भोग कर बुरी मौत मरने से डर लगता है, महाराज जी क्या बोले ? एक वृद्ध महिला ने महाराज जी से पुछा, महाराज जी बुढापे को भोगने…
बुढ़ापे के कष्ट भोग कर बुरी मौत मरने से डर लगता है, महाराज जी क्या बोले ? एक वृद्ध महिला ने महाराज जी से पुछा, महाराज जी बुढापे को भोगने…
भगवान् प्रेम है और प्रेम ही भगवान् है, , तृतीय माला ४३-जहाँ देखता है, वहीं श्याम – एक तो यह अवस्था होती है। दूसरे प्रकारकी अवस्था यह है कि श्यामके…
भगवान् प्रेम है और प्रेम ही भगवान् है, , तृतीय माला ४३-जहाँ देखता है, वहीं श्याम – एक तो यह अवस्था होती है। दूसरे प्रकारकी अवस्था यह है कि श्यामके…
जो सोचते है पढ़ाई करना कठिन है और बाबा बनना आसान है इसलिए बाबा बन जाए, पढ़ना नहीं पड़ेगा, उन्हें महाराज जी ने क्या बोला जब एक बच्चे ने बोला…
जो सोचते है पढ़ाई करना कठिन है और बाबा बनना आसान है इसलिए बाबा बन जाए, पढ़ना नहीं पड़ेगा, उन्हें महाराज जी ने क्या बोला जब एक बच्चे ने बोला…
शरणागति के लिए जीव को किन बातों की आवश्यकता होती है ? असल बात शरणागति तभी होती है जब हम अपने को किसी योग्य नहीं समझते, जब अर्जुन जी आज्ञा…
शरणागति के लिए जीव को किन बातों की आवश्यकता होती है ? असल बात शरणागति तभी होती है जब हम अपने को किसी योग्य नहीं समझते, जब अर्जुन जी आज्ञा…
प्रेम एकमें ही होता है और वह भगवान्में ही होना सम्भव है, तृतीय माला आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १-यह…
प्रेम एकमें ही होता है और वह भगवान्में ही होना सम्भव है, तृतीय माला आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १-यह…
पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है हम क्यों अनुकूलता पत्नी से मांगे, हम अनुकूलता उसको देंगे. हम पति है. हम अनुकूलता देंगे, अपने आप…
पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है हम क्यों अनुकूलता पत्नी से मांगे, हम अनुकूलता उसको देंगे. हम पति है. हम अनुकूलता देंगे, अपने आप…
इन कारणों से हो रहा है बच्चों का दिमाग खराब शहरों और महानगरों में बच्चों का दिमाग सिर्फ मौज मस्ती में ही लगा रहता है। मां बाप भी अपने बच्चों…
इन कारणों से हो रहा है बच्चों का दिमाग खराब शहरों और महानगरों में बच्चों का दिमाग सिर्फ मौज मस्ती में ही लगा रहता है। मां बाप भी अपने बच्चों…
प्रेम दोमें नहीं होता। वह एक ही में होता है ४३-जहाँ देखता है, वहीं श्याम एक तो यह अवस्था होती है। दूसरे प्रकारकी अवस्था यह है कि श्यामके सिवा और…
प्रेम दोमें नहीं होता। वह एक ही में होता है ४३-जहाँ देखता है, वहीं श्याम एक तो यह अवस्था होती है। दूसरे प्रकारकी अवस्था यह है कि श्यामके सिवा और…
क्यों रे मन तू इतना गन्दा क्यों है…… यह मन दूसरों की कमियां भर भर करके गिनाता है, जबकि अपनी कमी पर सोचता तक नहीं. दूसरों को भाषण तो बहुत…
क्यों रे मन तू इतना गन्दा क्यों है…… यह मन दूसरों की कमियां भर भर करके गिनाता है, जबकि अपनी कमी पर सोचता तक नहीं. दूसरों को भाषण तो बहुत…
क्या धन की चाह, लोभ, और लालच से नाम जप कर सकता हूँ? बहुत बढ़िया है, इसी से मंगल हो जाएगा. हम तुम्हे बताये हमने धन की इच्छा नहीं की…
क्या धन की चाह, लोभ, और लालच से नाम जप कर सकता हूँ? बहुत बढ़िया है, इसी से मंगल हो जाएगा. हम तुम्हे बताये हमने धन की इच्छा नहीं की…
क्या हम में हिम्मत है ऐसा करने की ? सुबह ठीक 4 बजे या 4 बजे से पहले उठना. उठते साथ ही अपने आराध्य का नाम जाप उठते, बैठे, खाते…
क्या हम में हिम्मत है ऐसा करने की ? सुबह ठीक 4 बजे या 4 बजे से पहले उठना. उठते साथ ही अपने आराध्य का नाम जाप उठते, बैठे, खाते…
महाराज जी से दीक्षा कैसे प्राप्त करें महाराज जी से दीक्षा प्राप्त करने हेतु आपको पहले महाराज जी द्वारा प्रदत्त दिनचर्या का नियमित रूप से पालन करना होगा. उसके पश्चात…
महाराज जी से दीक्षा कैसे प्राप्त करें महाराज जी से दीक्षा प्राप्त करने हेतु आपको पहले महाराज जी द्वारा प्रदत्त दिनचर्या का नियमित रूप से पालन करना होगा. उसके पश्चात…
पूज्य महाराज जी के दर्शन कब और कैसे प्राप्त होंगे ? पूज्य महाराज जी के दर्शन आप प्रात: कालीन सत्संग, श्रृंगार कीर्तन / वाणी पाठ या एकान्तिक वार्तालाप के टोकन…
पूज्य महाराज जी के दर्शन कब और कैसे प्राप्त होंगे ? पूज्य महाराज जी के दर्शन आप प्रात: कालीन सत्संग, श्रृंगार कीर्तन / वाणी पाठ या एकान्तिक वार्तालाप के टोकन…
वृन्दावन की इस गली में भीड़ बढती जा रही है और भक्तों का विश्वाश बढ़ता जा रहा है. दरअसल #Param Pujya Vrindavan Rasik Sant Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji…
वृन्दावन की इस गली में भीड़ बढती जा रही है और भक्तों का विश्वाश बढ़ता जा रहा है. दरअसल #Param Pujya Vrindavan Rasik Sant Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji…
तृतीय माला १-यह विचार होना चाहिये कि हमारा असली कर्तव्य क्या है। फिर तो काम हो जायगा। २-कर्मोंका फल भगवान्के हाथोंमें है और भगवान्के विधानसे जो भी फल प्राप्त होता…
तृतीय माला १-यह विचार होना चाहिये कि हमारा असली कर्तव्य क्या है। फिर तो काम हो जायगा। २-कर्मोंका फल भगवान्के हाथोंमें है और भगवान्के विधानसे जो भी फल प्राप्त होता…
घर घर में कीर्तन कीजिये, फिर अमंगल दूर हो जायेगा ९४-अर्जुनने प्रण किया, सूर्यास्त होनेके पहले-पहले जयद्रथको मार दूँगा, नहीं मारूँगा तो आगमें जलकर मर जाऊँगा। लोगोंने देखा-सूर्य अस्त हो…
घर घर में कीर्तन कीजिये, फिर अमंगल दूर हो जायेगा ९४-अर्जुनने प्रण किया, सूर्यास्त होनेके पहले-पहले जयद्रथको मार दूँगा, नहीं मारूँगा तो आगमें जलकर मर जाऊँगा। लोगोंने देखा-सूर्य अस्त हो…
६७-भगवान्के मार्गपर आना ही कठिन है। मार्ग पर आ जानेपर तो सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं। ६८-भगवान्की ओर मुख किया कि सारे पाप कट जायेंगे। ६९-भगवान्की ओर मुँह फेरते…
६७-भगवान्के मार्गपर आना ही कठिन है। मार्ग पर आ जानेपर तो सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं। ६८-भगवान्की ओर मुख किया कि सारे पाप कट जायेंगे। ६९-भगवान्की ओर मुँह फेरते…
जैसे बड़े खेलते हैं ग्रुप में जुआ, वैसे बच्चे दोस्तों के साथ मिलकर खेलते हैं ऑनलाइन गेम हर माँ बाप के लिए मोबाइल फ़ोन की दुनिया में बच्चे पालना बहुत…
जैसे बड़े खेलते हैं ग्रुप में जुआ, वैसे बच्चे दोस्तों के साथ मिलकर खेलते हैं ऑनलाइन गेम हर माँ बाप के लिए मोबाइल फ़ोन की दुनिया में बच्चे पालना बहुत…
३०-सन्तके हृदयमें आकर भगवान् निवास करते हैं, सन्तका हृदय भगवान्का घर है। ३१-भगवान्ने कहा- ‘साधुजन मेरे हृदयस्थानीय हैं और मैं साधुओंका हृदय हूँ।’ ऐसे साधु सन्तोंकी महिमा अकथनीय है। ३२-तनसे,…
३०-सन्तके हृदयमें आकर भगवान् निवास करते हैं, सन्तका हृदय भगवान्का घर है। ३१-भगवान्ने कहा- ‘साधुजन मेरे हृदयस्थानीय हैं और मैं साधुओंका हृदय हूँ।’ ऐसे साधु सन्तोंकी महिमा अकथनीय है। ३२-तनसे,…
आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १५-भगवान्ने कहा- सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ।। ‘जिसने मुझे सुहृद् जान लिया, बस, उसे…
आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १५-भगवान्ने कहा- सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ।। ‘जिसने मुझे सुहृद् जान लिया, बस, उसे…
द्वितीय माला १-सन्त सबकी भलाई करें, केवल इतनी ही बात नहीं है। सन्तों में ऐसी शक्ति होती है कि उस शक्तिके संस्पर्शमें जो भी आ गया, उसका परम कल्याण हो…
द्वितीय माला १-सन्त सबकी भलाई करें, केवल इतनी ही बात नहीं है। सन्तों में ऐसी शक्ति होती है कि उस शक्तिके संस्पर्शमें जो भी आ गया, उसका परम कल्याण हो…
भगवान् ने कहा, ‘अर्जुन ! युद्ध करो, पर विजय के लिए नहीं आशारहित होकर, ममतारहित होकर (निराशीर्निर्ममो भूत्वा ) युद्ध करो, केवल निमित्तमात्र बनो, मैं कराऊँ वैसे करते जाओ।’ ऐसी…
भगवान् ने कहा, ‘अर्जुन ! युद्ध करो, पर विजय के लिए नहीं आशारहित होकर, ममतारहित होकर (निराशीर्निर्ममो भूत्वा ) युद्ध करो, केवल निमित्तमात्र बनो, मैं कराऊँ वैसे करते जाओ।’ ऐसी…
आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ९१-मनुष्य विषयोंको समीप बुलाता है और चाहता है कि अमर रहूँ, यह कैसे सम्भव है?…
आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ९१-मनुष्य विषयोंको समीप बुलाता है और चाहता है कि अमर रहूँ, यह कैसे सम्भव है?…
७९-जब भगवत्प्रेम जाग्रत् होता है, तब मालूम पड़ता है-ओह! मेरी कितनी मूर्खता थी, भ्रमसे मैं वहाँ उन विषयोंमें सुख ढूँढ़ता था जहाँ सुखका लेश भी नहीं है। ८०-प्रेम उत्पन्न होते…
७९-जब भगवत्प्रेम जाग्रत् होता है, तब मालूम पड़ता है-ओह! मेरी कितनी मूर्खता थी, भ्रमसे मैं वहाँ उन विषयोंमें सुख ढूँढ़ता था जहाँ सुखका लेश भी नहीं है। ८०-प्रेम उत्पन्न होते…