जो भुक्ति , मुक्ति तथा सिद्धिके लिये भगवान्के पास आना चाहते हैं, वे निकट होते हुए भी अत्यन्त दूर हैं (EN)
१७-जीवकी तुच्छशक्तिके काँटेपर जब हम भगवान्की क्रियाओं तौलने जाते हैं, तब विफल ही होते हैं। पर यदि अपनी शक्तिको भूलकर श्रीकृष्णकी अचिन्त्य शक्तिकी ओर ध्यान दें तो हमें मालूम होगा…







