इंजीनियरिंग–मेडिकल की JEE–NEET रेस: प्रेशर, महंगी फीस, बेरोजगारी और उम्मीद की सच्ची कहानी


इंजीनियरिंग–मेडिकल की जंग में बच्चे कैसे फँस रहे हैं?

(अंक, कोचिंग, फीस, प्लेसमेंट और उम्मीद की किरण)

स्कूल की पढ़ाई शुरू होते ही बच्चों के दिमाग में दो बड़े नाम ठूंस दिए जाते हैं – इंजीनियरिंग और मेडिकल। 10वीं में अच्छे नंबर आए नहीं कि चारों तरफ से आवाज आने लगती है – “अब तो साइंस ले लो, बेटा IIT/NEET की तैयारी करो, तभी जिंदगी बन पाएगी।” धीरे‑धीरे यह सलाह दबाव में बदल जाती है और फिर एक ऐसी रेस शुरू होती है जिसमें दौड़ सबकोना पड़ता है, पर फिनिश लाइन तक बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं।

इस लेख में हम इसी “इंजीनियरिंग–मेडिकल की जंग” के हर पहलू को समझेंगे – स्कूल के मार्क्स की होड़ से लेकर JEE–NEET की तैयारी, प्राइवेट कॉलेजों की भारी फीस, प्लेसमेंट का कड़वा सच और इन सबके बीच बच्चे के लिए उम्मीद की असली किरण क्या है।


1. शुरुआत कहाँ से होती है – नंबरों की होड़ और गलत स्ट्रीम

अधिकतर बच्चों के लिए यह जंग 9वीं–10वीं से ही शुरू हो जाती है।

  • 10वीं में अच्छे नंबर आए तो automatically माना जाता है कि इस बच्चे को साइंस ही लेना चाहिए, चाहे उसकी रुचि कोई और हो।
  • कई छात्र सिर्फ society pressure, रिश्तेदारों की बातें और “science लेने वाले ही होनहार होते हैं” वाली सोच के कारण stream चुन लेते हैं।

परिणाम क्या होता है?

  • शुरू के महीनों में थोड़ी मेहनत, फिर syllabus बढ़ता जाता है, concepts clear नहीं होते, और पढ़ाई बोझ लगने लगती है।
  • 11वीं–12वीं में Physics–Chemistry–Maths या Bio की गाड़ी लड़खड़ाने लगती है, confidence गिरता है, और बच्चा खुद को दूसरों से पीछे महसूस करने लगता है।

यहीं से मानसिक दबाव शुरू हो जाता है –
“अगर science ले ली है तो अब JEE/NEET देना ही होगा, नहीं तो लोग क्या कहेंगे?”


2. JEE–NEET की रेस – coaching, pressure और selection की हकीकत

कोचिंग का दबाव

आज JEE–NEET की तैयारी लगभग coaching‑driven हो चुकी है।

  • Kota जैसे coaching hubs से हर साल लाखों बच्चे तैयारी करते हैं और IIT–AIIMS जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में जाने वाले हर चौथे बच्चे के पीछे किसी न किसी Kota coaching का हाथ होता है।
  • Metro शहरों में 1–2 साल की coaching की फीस 80,000 से 2–2.5 लाख रुपये सालाना तक होती है, ऊपर से hostel/mess के अलग खर्चे।

इस रेस का pattern कुछ ऐसा होता है:

  1. 10वीं के बाद बच्चा coaching join करता है।
  2. 11वीं–12वीं के साथ JEE–NEET की अलग से तैयारी।
  3. Test series, doubt classes, pressure कि “rank नहीं आई तो जिंदगी खराब।”

Selection ratio – कितने निकल पाते हैं?

JEE Main, JEE Advanced और NEET में competition बहुत भारी है।

  • हर साल JEE Main और NEET में मिलाकर कई लाख विद्यार्थी बैठते हैं, पर टॉप IITs, सरकारी medical colleges या top NITs में seats बहुत सीमित हैं; यानी selection ratio बहुत कम है।motion.ac+1

मतलब यह कि:

  • Class में 50 बच्चों में से शायद 1–2 ही top government college तक पहुंच पाते हैं।
  • बाकी या तो drop year लेते हैं, या कम नामी private college, या फिर किसी और field में shift हो जाते हैं।

Problem यह है कि school–society ने बच्चों को यह सिखाया ही नहीं कि “अगर IIT/AIIMS नहीं हुआ तो भी जिंदगी खत्म नहीं होती।” बच्चा यही मान बैठता है कि “मैं हार गया, मैं फेल हो गया”, जबकि सच यह है कि competition का math ही ऐसा है कि सबका निकलना possible नहीं है।


3. Private colleges की हकीकत – भारी fees, quality की अनिश्चितता

जब JEE–NEET से desired result नहीं आता, तब अगला दबाव आता है – “कोई अच्छा private college ढूँढो, नहीं तो career रुक जाएगा।”

Engineering private colleges – फीस कितनी लगती है?

देश में सैकड़ों private engineering colleges हैं, जहाँ annual fee broadly 1–2 लाख से लेकर 5 लाख रुपये सालाना तक रहती है।

  • एक analysis के अनुसार लगभग 90+ अच्छे private engineering colleges में से:
    • 1–2 लाख सालाना fees वाले लगभग 5 colleges।
    • 2–3 लाख सालाना fees वाले लगभग 20 colleges।
    • 3–5 लाख सालाना fees वाले लगभग 16 colleges।
    • 5 लाख से ज्यादा सालाना fees वाले करीब 50 colleges हैं।

अगर कोई बच्चा 4 साल का B.Tech करता है और average 3–4 लाख सालाना भी मान लें, तो सिर्फ tuition fees में 12–16 लाख रुपये लग जाते हैं; hostel, mess, books, transport मिलाकर यह 18–20 लाख तक पहुंच सकता है।collegedekho

Top private institutes (जैसे BITS, VIT, SRM, LPU आदि) की fees और packages भी high range में हैं, लेकिन वहाँ तक पहुंचने के लिए भी entrance exams और कठोर competition है।lpu+1

Medical private colleges – MBBS की भारी कीमत

Private medical colleges की fee तो इससे कई गुना ज्यादा होती है।
Delhi‑NCR और दूसरे बड़े शहरों के कई private medical colleges में MBBS की total fees 60–80 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, अलग से hostel और other charges।

  • Noida, Delhi, Ghaziabad belt में Sharda, Santosh, HIMSR आदि colleges की MBBS education की cost भी कई परिवारों के lifetime savings के बराबर होती है।

कई middle‑class parents इसके लिए:

  • घर गिरवी रख देते हैं।
  • भारी education loan लेते हैं।
  • पूरी retirement planning हिला देते हैं।

और फिर भी question वही – क्या इतनी fees देने के बाद भी quality education और decent job की guarantee है?


4. Quality और Faculty का सवाल – fees high, पर क्या पढ़ाई भी उतनी ही अच्छी?

बड़ी fees का मतलब हमेशा high quality नहीं होता। ground reality में कई problems हैं:

  • कई private engineering और medical colleges में experienced faculty की कमी रहती है, guest faculty या fresh pass‑outs को कम salary में hire किया जाता है।motion.ac+1
  • Lab, library, research facility, industry exposure, internship – सब brochure में बहुत अच्छा दिखता है, पर reality अक्सर mediocre होती है।lpu+1
  • कई कॉलेजों में class attendance और assignment सिर्फ formalities बनकर रह जाते हैं, real skill‑building पर ज़्यादा जोर नहीं रहता।

Result – student चार साल पढ़ाई कर भी लेता है, लेकिन:

  • Conceptually मजबूत नहीं बन पाता।
  • Practical exposure नहीं मिलता।
  • Soft skills (communication, teamwork, problem solving) develop नहीं हो पातीं।

5. नौकरी का सच – IIT तक में हजारों students बिना placement

अब सबसे बड़ा सवाल – “इतना सब करने के बाद क्या नौकरी मिल रही है?”

IITs में भी placement gap

हाल के वर्षों में IITs जैसी top institutes में भी placement का हाल चिंताजनक है।

  • एक RTI के अनुसार 2023–24 के placement session में IITs के लगभग 38% विद्यार्थियों को campus placement नहीं मिल पाया; 23 IIT campuses को मिलाकर 7000 से ज्यादा students बिना job के रहे।
  • IIT Delhi ने खुद माना कि session के अंत तक करीब 400 students ऐसे हैं जिन्हें job नहीं मिली और institute को अपने alumni network से मदद माँगनी पड़ रही है।

पिछले कुछ सालों के numbers trend भी यही दिखाते हैं कि registered students में से 19–21% तक को placement नहीं मिल रहा था और 2024 में यह आंकड़ा 38% के करीब जा पहुँचा।

जब देश के top engineering colleges की यह हालत है, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि average private colleges में placement scenario कितना कमजोर होगा।

Private colleges में placement – बहुत uneven picture

Private engineering colleges में placement scenario बहुत uneven है:

  • कुछ top private institutes जैसे BITS Pilani, IIIT Hyderabad, VIT, Thapar, SRM, LPU आदि में high packages, international offers और अच्छे placement stats मिल जाते हैं।lpu+1
  • वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों ऐसे private colleges हैं जहाँ:
    • Campus placement बहुत limited होता है।
    • Local कंपनियाँ 2–4 LPA के पैकेज पर hire करती हैं।lpu
    • कई बच्चों को off‑campus खुद ही struggle करके job ढूँढनी पड़ती है।

Private medical colleges में MBBS के बाद भी:

  • पहले internship, फिर PG seat की competition, फिर किसी decent hospital में अच्छी salary वाली job – यह सब अपने आप नहीं मिलता, continuous मेहनत और networking चाहिए।iquanta

इसका मतलब – केवल degree लेना काफी नहीं है, real skills और सही direction के बिना नौकरी की guarantee कहीं भी नहीं है, चाहे IIT हो या ordinary private college।navbharattimes.indiatimesyoutube


6. इस सबके बीच बच्चा क्या महसूस करता है?

अच्छे नंबर लाओ, coaching join करो, JEE–NEET की तैयारी करो, selection नहीं हुआ तो private college की भारी fees, वहाँ से निकलने के बाद भी नौकरी uncertain – इस पूरे process में बच्चा emotionally अंदर से टूटने लगता है।

आम तौर पर student के mind में यह feelings आती हैं:

  • “मैं दूसरों से कम हूँ, मैं failure हूँ।”
  • “मैंने parents का पैसा और उम्मीद दोनों बर्बाद कर दिए।”
  • “अब मेरे पास कोई option नहीं बचा।”

कई बच्चे social media पर दूसरों की success stories देखकर और ज्यादा depressed हो जाते हैं –

  • “उसने IIT crack कर लिया, उसने AIIMS ले लिया, मैं ही क्यों नहीं कर पाया?”

यह सोच dangerous इसलिए है क्योंकि:

  • Student अपने आप को सिर्फ एक exam से define करने लगता है।
  • वो अपनी उन strengths को देख ही नहीं पाता जो शायद किसी दूसरे field में उसे बहुत आगे ले जा सकती हैं।

7. असली सवाल – क्या engineering–medical ही सफलता का एकमात्र रास्ता है?

सिस्टम ने हमें यह believe करा दिया है कि professional success = IIT/AIIMS/MBBS/B.Tech जैसी degrees, जबकि reality इससे कहीं ज्यादा wide है।

आज के समय में high‑growth careers सिर्फ engineering–medical तक सीमित नहीं हैं:

  • Data science, coding, product management, cyber security, digital marketing, UI/UX, content creation, finance, design, animation, entrepreneurship – ऐसे दर्जनों fields हैं जहाँ बिना traditional engineering/medical degree के भी बहुत strong careers बन रहे हैं।motion.ac+1
  • कई tech कंपनियाँ अब skills‑based hiring कर रही हैं, जहाँ degree से ज्यादा portfolio, projects और problem‑solving capability देखी जाती है।lpu

मतलब – अगर बच्चे को engineering–medical genuinely पसंद है, तब तो ठीक है; लेकिन सिर्फ “logo ko dikhाने ke liye” या “society ke pressure se” वहाँ जाना अक्सर frustration पैदा करता है।


8. उम्मीद की असली किरण – बच्चा क्या कर सकता है, parents क्या करें?

अब सबसे जरूरी हिस्सा – solution क्या है? इस पूरी जंग के बीच बच्चे के लिए “आशा की किरण” कहाँ है?

(क) बच्चे के लिए – mindset और strategy

  1. खुद को एक exam से define मत करो
    • JEE/NEET, board exams, college entrance – ये career के रास्ते हैं, आपकी पूरी जिंदगी नहीं। एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा निकाला जा सकता है, बशर्ते आप खुद पर भरोसा न छोड़ें।
  2. अपनी रुचि और strength पहचानो
    • खुद से पूछो – “मुझे क्या करना अच्छा लगता है? किस काम में मैं घंटे भर लगा दूं और time का पता न चले?”
    • अगर आपको coding पसंद है, तो आप CS degree के बिना भी online courses, projects, hackathons से strong profile बना सकते हैं।
    • अगर communication अच्छा है, तो sales, marketing, training, content creation, finance, teaching – इनमे शानदार career बन सकते हैं।
  3. Skills पर फोकस करो, सिर्फ degree पर नहीं
    • चाहे आप किसी भी college में हो – IIT हो या average private – भविष्य तय करेगा आपका skill‑set:
      • Technical skills (coding, analytics, design, medical expertise, etc.)
      • Soft skills (communication, English, presentation, teamwork, leadership)
      • Digital skills (Excel, PowerPoint, basic tools, online platforms)
    • Online बहुत सारे सस्ते/free platforms हैं – Coursera, edX, Udemy, YouTube – जहाँ से आप projects और skills सीख सकते हैं।
  4. Practical exposure लो
    • Internships, part‑time projects, freelancing, volunteering – ये सब आपको market की real demand दिखाते हैं।
    • Example: अगर आप B.Sc., B.Com., या किसी भी general degree में हैं, तो साथ‑साथ digital marketing, stock markets, mutual funds advisory, content writing, editing, etc. सीखकर अच्छी income बना सकते हैं।
  5. Comparison से दूरी, progress पर फोकस
    • दूसरों से comparison छोड़कर अपनी journey पर focus करो।
    • रोज खुद से पूछो – “मैं आज कल से 1% बेहतर कैसे बन सकता हूँ?”
    • Mobile की social media scrolling कम करके सीखने वाले content पर shift करो – यह छोटी सी habit आपके पूरे career को बदल सकती है।

(ख) Parents के लिए – support, not pressure

  1. “बस इंजीनियर/डॉक्टर बनाओ” की जिद छोड़ें
    • बच्चे को observe करें – उसे किस field में genuine interest है, वह naturally किस काम में अच्छा है।
    • Career counsellor से psychometric tests कराए जा सकते हैं जिससे child की aptitude और interest का clear idea मिल जाए।
  2. पैसे से पहले बच्चे का mental health
    • Coaching, college, fees – सब जरूरी हैं, पर उससे ज्यादा जरूरी है कि बच्चा emotionally stable रहे।
    • उससे खुलकर बात करें, सिर्फ marks न पूछें, उसके डर और confusion भी सुनें।
  3. “Fail” शब्द का meaning बदलें
    • अगर बच्चा किसी exam में desired result न ला पाए, तो उसे यह feel न होने दें कि “मैं बर्बाद हो गया।”
    • उसे examples दिखाएँ जहाँ लोगों ने late start या alternate path से बड़ा नाम बनाया।
  4. Financial planning के साथ decision लें
    • अगर private college की fees आपकी entire financial stability हिला रही है, तो सिर्फ “society ke pressure”में जाकर huge loans न लें।
    • कई बार affordable college + strong skill‑building + good networking = expensive college से भी बेहतर career दे सकता है।

9. Practical रास्ते – अगर JEE/NEET नहीं हुआ तो क्या?

मान लें कि किसी बच्चे का JEE/NEET जैसा exam clear नहीं हुआ या top ranks नहीं आईं, तो क्या विकल्प हैं?

  • State level engineering/medical colleges, जहाँ fees relatively कम हो सकती है।
  • B.Sc., BCA, BBA, B.Com. जैसे courses के साथ parallel में skills (coding, finance, digital marketing, designing) सीखकर strong profile बनाना।
  • Allied health fields – physiotherapy, medical lab technology, radiology, nursing, hospital management – जिनमें scope बढ़ रहा है
  • Government competitive exams – SSC, Banking, Railways, State PSC, etc., अगर बच्चे की inclination उस तरफ है।
  • Entrepreneurship और small business – सही guidance और planning के साथ बहुत powerful रास्ता बन सकता है।

आपके जैसे financial content creators और advisors के लिए तो यह भी बड़ा अवसर है कि आप ऐसे students को mutual funds, personal finance, entrepreneurship, side income, freelancing जैसे topics पर जागरूक करें ताकि वे सिर्फ “job” पर depend न रहें।


10. निष्कर्ष नहीं, एक संदेश

इंजीनियरिंग–मेडिकल आज भी सम्मानित और powerful professions हैं, इसमें कोई doubt नहीं। पर समस्या तब पैदा होती है जब इन दो को ही सफलता का एकमात्र रास्ता मान लिया जाता है और बच्चे को उसकी individuality से काटकर एक दौड़ में धकेल दिया जाता है।

सच्चाई यह है कि:

  • हर बच्चा IITian या doctor नहीं बन सकता, और यह बिलकुल normal है।
  • हर बच्चा अगर अपनी strength के हिसाब से सही direction पकड़ ले, तो वह financially और personally दोनों तरह से successful हो सकता है।
  • Parents, teachers और समाज की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों पर label न लगाएँ, बल्कि उन्हें explore करने की आजादी दें, गिरने पर संभालें और साथ चलें।

हर उस बच्चे के लिए जो इस समय JEE–NEET, boards, college, placements से परेशान है –

  • तुम किसी exam के number नहीं हो।
  • तुम्हारी कीमत किसी college की tag से नहीं तय होती।
  • अगर तुम लगातार सीखते रहो, मेहनत करते रहो, और अपने skills को develop करते रहो, तो देर‑सवेर जिंदगी तुम्हें ऐसा मौका जरूर देगी जहाँ तुम खुद को winner महसूस करोगे – चाहे तुम्हारे नाम के आगे IIT लिखा हो या नहीं।

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