भारत में गर्मियों के दस्तक देते ही जिस फल का सबसे बेसब्री से इंतज़ार होता है, वो है ‘आम’। फलों का राजा कहा जाने वाला आम अपनी मिठास और खुशबू के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस आम को आप बड़े चाव से खा रहे हैं, वह पेड़ पर प्राकृतिक रूप से पका है या उसे किसी जहरीले केमिकल से जबरदस्ती पकाया गया है?
हाल ही में आई कुछ खबरों और खुलासों ने आम के शौकीनों के होश उड़ा दिए हैं। हैदराबाद से लेकर दिल्ली तक, बाजारों में बिकने वाले आमों में खतरनाक केमिकल्स की मिलावट पाई जा रही है। आज के इस ब्लॉग में हम इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे और आपको बताएंगे कि आप अपनी सेहत की रक्षा कैसे कर सकते हैं।
हैदराबाद का वो मामला जिसने सबको चौंका दिया
हाल ही में हैदराबाद के बाजारों में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। यहाँ की पुलिस और फूड एडल्ट्रेशन सर्विलांस टीम ने छापेमारी के दौरान पाया कि कुछ बड़े व्यापारी आमों को जल्दी पकाने के लिए प्रतिबंधित केमिकल्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
इस छापेमारी में दो बड़े कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से भारी मात्रा में ‘डायमंड राइप इथाईन’ और कैल्शियम कार्बाइड जैसे तत्व बरामद हुए। ये वो केमिकल्स हैं जिन्हें खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत फल पकाने के लिए बेहद खतरनाक और अवैध माना जाता है। इस घटना के बाद से ही FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) अलर्ट पर है और सभी राज्यों को सख्त जांच के निर्देश दिए गए हैं।
व्यापारी ऐसा क्यों करते हैं? मुनाफे का काला खेल
सवाल उठता है कि आखिर फल बेचने वाले लोगों की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों करते हैं? इसके पीछे कई कारण हैं:
- भारी मांग (High Demand): गर्मी शुरू होते ही आम की मांग अचानक बढ़ जाती है। प्राकृतिक रूप से आम को पकने में समय लगता है, लेकिन व्यापारी मांग को पूरा करने के लिए ‘शॉर्टकट’ अपनाते हैं।
- जल्दी मुनाफा: कच्चे आम को तोड़कर उसे केमिकल्स के जरिए 24 से 48 घंटों के भीतर पीला और आकर्षक बना दिया जाता है, जिससे वे बाजार में ऊंचे दामों पर बिक सकें।
- लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट: पके हुए आम जल्दी खराब हो जाते हैं। इसलिए व्यापारी कच्चे आम मंगवाते हैं और उन्हें स्थानीय स्तर पर केमिकल्स के जरिए पकाकर ताज़ा दिखाने की कोशिश करते हैं।
- खेती की अनिश्चितता: भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक है (सालाना करीब 23 मिलियन टन)। लेकिन मौसम के बदलते मिजाज के कारण कभी फसल कम होती है तो कभी समय पर नहीं पकती, जिससे बचने के लिए व्यापारी इन कृत्रिम तरीकों का सहारा लेते हैं।
कैल्शियम कार्बाइड: सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन
आम पकाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला खतरनाक केमिकल कैल्शियम कार्बाइड है, जिसे आम बोलचाल में ‘मसाला’ भी कहा जाता है।
- कैसे काम करता है? जब यह केमिकल नमी या पानी के संपर्क में आता है, तो यह एसिटिलीन गैस पैदा करता है। यह गैस आम को बहुत जल्दी पीला कर देती है।
- खतरा क्या है? इस केमिकल में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे जहरीले तत्व होते हैं। FSSAI ने इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है क्योंकि यह फल की ऊपरी सतह पर जहरीले अवशेष छोड़ देता है, जो धोने के बाद भी पूरी तरह नहीं हटते।
FSSAI के नियम और सुरक्षित तरीके
क्या फलों को कृत्रिम रूप से पकाना हमेशा गलत है? नहीं। FSSAI ने इसके लिए कुछ मानक तय किए हैं:
- इथाइलीन गैस (Ethylene Gas): यह एक प्राकृतिक हार्मोन है जो फलों को पकने में मदद करता है। FSSAI ने एक निश्चित सीमा (100 PPM) के भीतर इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है, बशर्ते यह फल के सीधे संपर्क में न आए।
- अवैध तरीका: जब व्यापारी फलों को सीधे केमिकल के घोल में डुबो देते हैं या कैल्शियम कार्बाइड के पाउच सीधे आम की पेटियों में रख देते हैं, तो वह पूरी तरह से गैर-कानूनी और जानलेवा हो जाता है।
सेहत पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव
केमिकल से पके हुए आम खाने के परिणाम तुरंत और लंबे समय तक चलने वाले, दोनों हो सकते हैं:
- तत्काल प्रभाव: गला जलना, उल्टी, पेट में तेज दर्द, दस्त, सिर चकराना और घबराहट होना।
- त्वचा की समस्याएं: खुजली, दाने और एलर्जी।
- गंभीर बीमारियाँ: लंबे समय तक ऐसे फल खाने से नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) प्रभावित हो सकता है। यह याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। कुछ शोधों के अनुसार, इन केमिकल्स से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
कैसे पहचानें: असली बनाम केमिकल वाला आम?
बाजार जाते समय आप इन आसान तरीकों से पहचान सकते हैं कि आम असली है या केमिकल से पका हुआ:
- रंग और चमक: प्राकृतिक रूप से पका आम कहीं से पीला तो कहीं से हल्का हरा होगा। जबकि केमिकल वाला आम एक समान रूप से (Uniformly) चमकदार और पीला दिखेगा।
- अंदर का हिस्सा: केमिकल से पका आम बाहर से पीला दिखेगा, लेकिन काटने पर अंदर से सफेद या हल्का कच्चा निकल सकता है।
- स्वाद और गंध: प्राकृतिक आम में एक मीठी और सौंधी खुशबू होती है। केमिकल वाले आम में या तो कोई खुशबू नहीं होती या फिर उसमें से अजीब सी तीखी केमिकल जैसी गंध आती है।
- पानी का टेस्ट: एक बर्तन में पानी लें और आम को उसमें डालें। जो आम पानी में डूब जाते हैं, वे प्राकृतिक रूप से पके होते हैं। जो ऊपर तैरते रहते हैं, वे अक्सर केमिकल से पकाए गए होते हैं।
- काले धब्बे: केमिकल से पके आमों पर अक्सर अजीब से काले धब्बे या छिलके पर झुर्रियां दिखाई देती हैं।
निष्कर्ष और सावधानी
आम भले ही ‘फलों का राजा’ हो, लेकिन आपकी सेहत से बढ़कर कुछ नहीं है। सरकार और प्रशासन अपनी ओर से जांच अभियान चला रहे हैं, लेकिन एक उपभोक्ता के रूप में हमारी सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
सावधानी की सलाह:
- हमेशा विश्वसनीय विक्रेताओं से ही फल खरीदें।
- आम को खाने से पहले कम से कम 1-2 घंटे के लिए ठंडे पानी में डुबोकर रखें।
- बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसे दिखने वाले पीले आमों के झांसे में न आएं।
याद रखिए, आपकी एक छोटी सी सावधानी आपके और आपके परिवार को बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और सुरक्षित रहें।
स्रोत: न्यूज़ पिंच (News Pinch) के विशेष खुलासे पर आधारित।






