हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌ की कृपा, भगवान्‌ का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता- प्रथम माला

हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌की कृपा, भगवान्‌ का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता

आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘

५०-हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌की कृपा, भगवान्‌का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता। वह सबको अपनाता है- यह अनिवार्य है।

५१-बिलकुल यही बात है। कठिन-से-कठिन परिस्थितिमें भी यही मानना चाहिये कि भगवान्‌की कृपा हमपर है और हमारे ही ऊपर है तथा वह अनन्त है।

५२-नित्य परिवर्तनशीलता संसारका स्वरूप है। यह प्रतिक्षण बदलता ही रहता है। सारे जगत्में, व्यक्तिमें, समाजमें दिन-रात बनना- बिगड़ना चल रहा है। इसीका असर हमारे मनपर होता है। एक-सी स्थिति कभी रहती नहीं और मन अनुकूल-प्रतिकूल संकल्पोंको लेकर दुःखी-सुखी होता रहता है। जगत्के इसी स्वरूपमें पड़े पड़े हम मर जाते हैं, जीवन व्यर्थ हो जाता है।

५३-मनमानी चीज सदा मिलती नहीं। कभी मिल जाती है, कभी नहीं मिलती। मिलनेपर सदा टिकती नहीं।

५४-पुत्र-धनकी प्राप्ति हुई, मनमें मान लेते हैं कि हमारे मनकी हुई। थोड़ी-सी सफलता हुई, थोड़ा-सा आनन्द आया, फिर वही प्रतिकूलता और वही दुःख। साथ-साथ विषयासक्तिके कारण पाप भी होते रहेंगे। इस प्रकार जीवनभर विषाद, शोक, पापकी कमाई ही साथ लगती रहेगी।

५५-मनुष्य आया था उन्नति करनेके लिये, मनुष्य-जीवन प्राप्त हुआ था भगवत्प्राप्तिके लिये; पर वह अपने इस वास्तविक लक्ष्यको भूल गया, विषयोंमें पड़कर कमाने लग गया पाप। गम्भीरतासे विचारो तो पता लगेगा कि जीवनका उद्देश्य यह कदापि नहीं है।

५६-महात्माओंने यह बात सबके लिये तै कर रखी है कि जीवनका लक्ष्य भगवत्प्राप्ति है, पर मनुष्य इसको भूल गया। उसी भूलका परिणाम है-वर्तमानका महान् संहार।

५७-विषयासक्ति जब अत्यन्त बढ़ जाती है, तब दूसरेके भले-

बुरेकी परवा नहीं रहती। दूसरेकी दशा कैसे भी क्यों न हो, पर हमें

अपनी इच्छित वस्तु प्राप्त होनी ही चाहिये। ५८-‘विषयान् विषवत् त्यज’ विषयको विष मानकर सर्वथा छोड़ दो।

५९-जिस प्रकार सोनेके घड़ेमें जहर भरा हो- ‘बिषरस भरा कनक घट जैसे।’ वैसे ही विषय ऊपरसे रमणीय प्रतीत होते हैं, भीतर इनमें दुःख-ही-दुःख है।

  • Related Posts

    ₹5,000 की SIP से अमीर बनने का सच—डायरेक्ट फंड का जोख़िम और रजिस्टर्ड एडवाइजर की अहमियत

    ₹5,000 की मंथली SIP वाकई में आपको अमीर बना सकती है, लेकिन इसमें आपकी फंड चॉइस, समय पर बने रहने की आदत, और प्रोफेशनल गाइडेंस का रोल बेहद अहम है।…

    Continue reading
    किशोरों के घर से भागने की समस्या: कारण, रोकथाम और माता-पिता की भूमिका

    कई किशोर अपने घर से भाग जाते हैं और कभी-कभी घर का पैसा भी लेकर दोस्तों के साथ भागते हैं, जिससे परिवार को गहरा आघात पहुंचता है। इस तरह की…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    ड्यूटी पर मोबाइल का धमाल: एम्प्लोई की आदत, मालिक की परेशानी और समाधान का रास्ता

    ड्यूटी पर मोबाइल का धमाल: एम्प्लोई की आदत, मालिक की परेशानी और समाधान का रास्ता

    विदेशों में गीता प्रेस की किताबें इतनी महंगी क्यों?

    विदेशों में गीता प्रेस की किताबें इतनी महंगी क्यों?

    Mobile में सामने गलत दृश्य आता है तो ना चाहते हुए भी देख लेती हूँ !

    Mobile में सामने गलत दृश्य आता है तो ना चाहते हुए भी देख लेती हूँ !

    मकर संक्रांति 2026 पर ज़्यादा कन्फ्यूज़न, 14 जनवरी को मनाया जाए या 15 जनवरी को।

    मकर संक्रांति 2026 पर ज़्यादा कन्फ्यूज़न, 14 जनवरी को मनाया जाए या 15 जनवरी को।

    लोहड़ी में कब करे पूजा? दूल्हा भट्टी वाला कौन है ?

    दिल्ली के आली गाँव में चले बुलडोजर से सीखने और म्यूच्यूअल फंड को समझने की जरुरत

    दिल्ली के आली गाँव में चले बुलडोजर से सीखने और  म्यूच्यूअल फंड को समझने की जरुरत