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प्रेम एकमें ही होता है और वह भगवान्में ही होना सम्भव है, तृतीय माला (EN)

प्रेम एकमें ही होता है और वह भगवान्में ही होना सम्भव है, तृतीय माला आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १-यह…

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पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है

पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है हम क्यों अनुकूलता पत्नी से मांगे, हम अनुकूलता उसको देंगे. हम पति है. हम अनुकूलता देंगे, अपने आप…

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पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है (EN)

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इन कारणों से हो रहा है बच्चों का दिमाग खराब (EN)

इन कारणों से हो रहा है बच्चों का दिमाग खराब शहरों और महानगरों में बच्चों का दिमाग सिर्फ मौज मस्ती में ही लगा रहता है। मां बाप भी अपने बच्चों…

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तृतीय माला -प्रेम दोमें नहीं होता। वह एक ही में होता है

प्रेम दोमें नहीं होता। वह एक ही में होता है ४३-जहाँ देखता है, वहीं श्याम एक तो यह अवस्था होती है। दूसरे प्रकारकी अवस्था यह है कि श्यामके सिवा और…

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तृतीय माला -प्रेम दोमें नहीं होता। वह एक ही में होता है (EN)

प्रेम दोमें नहीं होता। वह एक ही में होता है ४३-जहाँ देखता है, वहीं श्याम एक तो यह अवस्था होती है। दूसरे प्रकारकी अवस्था यह है कि श्यामके सिवा और…

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महाराज जी से दीक्षा कैसे प्राप्त करें ?

महाराज जी से दीक्षा कैसे प्राप्त करें महाराज जी से दीक्षा प्राप्त करने हेतु आपको पहले महाराज जी द्वारा प्रदत्त दिनचर्या का नियमित रूप से पालन करना होगा. उसके पश्चात…

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महाराज जी से दीक्षा कैसे प्राप्त करें ? (EN)

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पूज्य महाराज जी के दर्शन कब और कैसे प्राप्त होंगे ?

पूज्य महाराज जी के दर्शन कब और कैसे प्राप्त होंगे ? पूज्य महाराज जी के दर्शन आप प्रात: कालीन सत्संग, श्रृंगार कीर्तन / वाणी पाठ या एकान्तिक वार्तालाप के टोकन…

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पूज्य महाराज जी के दर्शन कब और कैसे प्राप्त होंगे ? (EN)

पूज्य महाराज जी के दर्शन कब और कैसे प्राप्त होंगे ? पूज्य महाराज जी के दर्शन आप प्रात: कालीन सत्संग, श्रृंगार कीर्तन / वाणी पाठ या एकान्तिक वार्तालाप के टोकन…

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वृन्दावन की इस गली में भीड़ बढती जा रही है और भक्तों का विश्वाश बढ़ता जा रहा है.

वृन्दावन की इस गली में भीड़ बढती जा रही है और भक्तों का विश्वाश बढ़ता जा रहा है. दरअसल #Param Pujya Vrindavan Rasik Sant Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji…

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वृन्दावन की इस गली में भीड़ बढती जा रही है और भक्तों का विश्वाश बढ़ता जा रहा है. (EN)

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तृतीय माला -यह विचार होना चाहिये कि हमारा असली कर्तव्य क्या है। फिर तो काम हो जायगा।

तृतीय माला १-यह विचार होना चाहिये कि हमारा असली कर्तव्य क्या है। फिर तो काम हो जायगा। २-कर्मोंका फल भगवान्‌के हाथोंमें है और भगवान्‌के विधानसे जो भी फल प्राप्त होता…

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तृतीय माला -यह विचार होना चाहिये कि हमारा असली कर्तव्य क्या है। फिर तो काम हो जायगा। (EN)

तृतीय माला १-यह विचार होना चाहिये कि हमारा असली कर्तव्य क्या है। फिर तो काम हो जायगा। २-कर्मोंका फल भगवान्‌के हाथोंमें है और भगवान्‌के विधानसे जो भी फल प्राप्त होता…

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घर घर में कीर्तन कीजिये, फिर अमंगल दूर हो जायेगा-द्वितीय माला

घर घर में कीर्तन कीजिये, फिर अमंगल दूर हो जायेगा ९४-अर्जुनने प्रण किया, सूर्यास्त होनेके पहले-पहले जयद्रथको मार दूँगा, नहीं मारूँगा तो आगमें जलकर मर जाऊँगा। लोगोंने देखा-सूर्य अस्त हो…

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घर घर में कीर्तन कीजिये, फिर अमंगल दूर हो जायेगा-द्वितीय माला (EN)

घर घर में कीर्तन कीजिये, फिर अमंगल दूर हो जायेगा ९४-अर्जुनने प्रण किया, सूर्यास्त होनेके पहले-पहले जयद्रथको मार दूँगा, नहीं मारूँगा तो आगमें जलकर मर जाऊँगा। लोगोंने देखा-सूर्य अस्त हो…

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भगवान्‌ के मार्ग पर आना ही कठिन है, मार्ग पर आ जाने पर तो सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं -द्वितीय माला

६७-भगवान्‌के मार्गपर आना ही कठिन है। मार्ग पर आ जानेपर तो सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं। ६८-भगवान्‌की ओर मुख किया कि सारे पाप कट जायेंगे। ६९-भगवान्‌की ओर मुँह फेरते…

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भगवान्‌ के मार्ग पर आना ही कठिन है, मार्ग पर आ जाने पर तो सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं -द्वितीय माला (EN)

६७-भगवान्‌के मार्गपर आना ही कठिन है। मार्ग पर आ जानेपर तो सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं। ६८-भगवान्‌की ओर मुख किया कि सारे पाप कट जायेंगे। ६९-भगवान्‌की ओर मुँह फेरते…

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बच्चे पेरेंट्स से कर रहे हैं डिजिटल फ्रॉड,कहीं आपके बच्चे तो यह नहीं कर रहे, आर्टिकल को पढ़ के चेक करे

जैसे बड़े खेलते हैं ग्रुप में जुआ, वैसे बच्चे दोस्तों के साथ मिलकर खेलते हैं ऑनलाइन गेम  हर माँ बाप के लिए मोबाइल फ़ोन की दुनिया में बच्चे पालना बहुत…

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बच्चे पेरेंट्स से कर रहे हैं डिजिटल फ्रॉड,कहीं आपके बच्चे तो यह नहीं कर रहे, आर्टिकल को पढ़ के चेक करे (EN)

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यदि मनमें डर न हो तो डरका हेतु होनेपर भी डर नहीं लगता -द्वितीय माला

३०-सन्तके हृदयमें आकर भगवान् निवास करते हैं, सन्तका हृदय भगवान्‌का घर है। ३१-भगवान्ने कहा- ‘साधुजन मेरे हृदयस्थानीय हैं और मैं साधुओंका हृदय हूँ।’ ऐसे साधु सन्तोंकी महिमा अकथनीय है। ३२-तनसे,…

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यदि मनमें डर न हो तो डरका हेतु होनेपर भी डर नहीं लगता -द्वितीय माला (EN)

३०-सन्तके हृदयमें आकर भगवान् निवास करते हैं, सन्तका हृदय भगवान्‌का घर है। ३१-भगवान्ने कहा- ‘साधुजन मेरे हृदयस्थानीय हैं और मैं साधुओंका हृदय हूँ।’ ऐसे साधु सन्तोंकी महिमा अकथनीय है। ३२-तनसे,…

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कृपा और प्रेम में क्या अन्तर है ? -द्वितीय माला

आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १५-भगवान्ने कहा- सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ।। ‘जिसने मुझे सुहृद् जान लिया, बस, उसे…

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कृपा और प्रेम में क्या अन्तर है ? -द्वितीय माला (EN)

आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ १५-भगवान्ने कहा- सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ।। ‘जिसने मुझे सुहृद् जान लिया, बस, उसे…

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सन्तका मिलना ही बड़ा दुर्लभ है, पर वे यदि मिल गये तो काम बन गया-द्वितीय माला

द्वितीय माला १-सन्त सबकी भलाई करें, केवल इतनी ही बात नहीं है। सन्तों में ऐसी शक्ति होती है कि उस शक्तिके संस्पर्शमें जो भी आ गया, उसका परम कल्याण हो…

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सन्तका मिलना ही बड़ा दुर्लभ है, पर वे यदि मिल गये तो काम बन गया-द्वितीय माला (EN)

द्वितीय माला १-सन्त सबकी भलाई करें, केवल इतनी ही बात नहीं है। सन्तों में ऐसी शक्ति होती है कि उस शक्तिके संस्पर्शमें जो भी आ गया, उसका परम कल्याण हो…

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जिसके मन, बुद्धि, शरीर एवं इन्द्रियों पर भगवान्‌ का पूर्ण अधिकार हो गया, वही मुक्त है-प्रथम माला

भगवान् ने कहा, ‘अर्जुन ! युद्ध करो, पर विजय के लिए नहीं आशारहित होकर, ममतारहित होकर (निराशीर्निर्ममो भूत्वा ) युद्ध करो, केवल निमित्तमात्र बनो, मैं कराऊँ वैसे करते जाओ।’ ऐसी…

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जिसके मन, बुद्धि, शरीर एवं इन्द्रियों पर भगवान्‌ का पूर्ण अधिकार हो गया, वही मुक्त है-प्रथम माला (EN)

भगवान् ने कहा, ‘अर्जुन ! युद्ध करो, पर विजय के लिए नहीं आशारहित होकर, ममतारहित होकर (निराशीर्निर्ममो भूत्वा ) युद्ध करो, केवल निमित्तमात्र बनो, मैं कराऊँ वैसे करते जाओ।’ ऐसी…

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मनुष्य विषयोंको समीप बुलाता है और चाहता है कि अमर रहूँ, यह कैसे सम्भव है?-प्रथम माला

आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ९१-मनुष्य विषयोंको समीप बुलाता है और चाहता है कि अमर रहूँ, यह कैसे सम्भव है?…

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मनुष्य विषयोंको समीप बुलाता है और चाहता है कि अमर रहूँ, यह कैसे सम्भव है?-प्रथम माला (EN)

आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ९१-मनुष्य विषयोंको समीप बुलाता है और चाहता है कि अमर रहूँ, यह कैसे सम्भव है?…

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जब भगवत्प्रेम जाग्रत् होता है, तब मालूम पड़ता है-ओह! मेरी कितनी मूर्खता थी, भ्रमसे मैं वहाँ उन विषयोंमें सुख ढूँढ़ता था जहाँ सुखका लेश भी नहीं-प्रथम माला

७९-जब भगवत्प्रेम जाग्रत् होता है, तब मालूम पड़ता है-ओह! मेरी कितनी मूर्खता थी, भ्रमसे मैं वहाँ उन विषयोंमें सुख ढूँढ़ता था जहाँ सुखका लेश भी नहीं है। ८०-प्रेम उत्पन्न होते…

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जब भगवत्प्रेम जाग्रत् होता है, तब मालूम पड़ता है-ओह! मेरी कितनी मूर्खता थी, भ्रमसे मैं वहाँ उन विषयोंमें सुख ढूँढ़ता था जहाँ सुखका लेश भी नहीं-प्रथम माला (EN)

७९-जब भगवत्प्रेम जाग्रत् होता है, तब मालूम पड़ता है-ओह! मेरी कितनी मूर्खता थी, भ्रमसे मैं वहाँ उन विषयोंमें सुख ढूँढ़ता था जहाँ सुखका लेश भी नहीं है। ८०-प्रेम उत्पन्न होते…

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सबसे बड़ी मूर्खता, सबसे बड़ा मोह यह है कि हम विषयोंसे सुखकी आशा करते हैं-प्रथम माला

सबसे बड़ी मूर्खता, सबसे बड़ा मोह यह है कि हम विषयोंसे सुखकी आशा करते हैं ६९ सबसे बड़ी मूर्खता, सबसे बड़ा मोह यह है कि हम विषयोंसे सुखकी आशा करते…

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सबसे बड़ी मूर्खता, सबसे बड़ा मोह यह है कि हम विषयोंसे सुखकी आशा करते हैं-प्रथम माला (EN)

सबसे बड़ी मूर्खता, सबसे बड़ा मोह यह है कि हम विषयोंसे सुखकी आशा करते हैं ६९ सबसे बड़ी मूर्खता, सबसे बड़ा मोह यह है कि हम विषयोंसे सुखकी आशा करते…

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यदि सभी मनुष्य अपने- आपको अलग-अलग सुधार लें तो सभी सुधर जायँ -प्रथम माला

यदि सभी मनुष्य अपने- आपको अलग-अलग सुधार लें तो सभी सुधर जायँ आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ६०-व्यष्टिके समूहका नाम…

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यदि सभी मनुष्य अपने- आपको अलग-अलग सुधार लें तो सभी सुधर जायँ -प्रथम माला (EN)

यदि सभी मनुष्य अपने- आपको अलग-अलग सुधार लें तो सभी सुधर जायँ आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ६०-व्यष्टिके समूहका नाम…

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हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌ की कृपा, भगवान्‌ का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता- प्रथम माला

हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌की कृपा, भगवान्‌ का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे…

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हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌ की कृपा, भगवान्‌ का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता- प्रथम माला (EN)

हम चाहे कैसे भी क्यों न हों; भगवान्‌की कृपा, भगवान्‌ का सौहार्द हमें छोड़ ही नहीं सकता आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे…

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भगवान् पापी, नीच के भी उद्धारक हैं- प्रथम माला

भगवान् पापी, नीच के भी उद्धारक हैं आदरणीय परम पूज्य श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार जी की लाभदायक पुस्तक ‘सत्संग के बिखरे मोती ‘ ४१-भगवान् पापी, नीचके भी उद्धारक हैं, यह विश्वास…

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भगवान् पापी, नीच के भी उद्धारक हैं- प्रथम माला (EN)

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भगवत्प्राप्ति का बड़ा सीधा रास्ता है- प्रथम माला

भगवत्प्राप्ति का बड़ा सीधा रास्ता है हमने संत श्रीभाई जी (हनुमान प्रसादजी पोद्दार) की पुस्तक सत्संग के बिखरे मोती पुस्तक से बेहद कीमती अंश को यहाँ लिखने का सिलसिला शुरू…

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भगवत्प्राप्ति का बड़ा सीधा रास्ता है- प्रथम माला (EN)

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अध्यात्म को अपनाकर हो जाते है खर्चे कम, कमाई हो जाती है ज्यादा

अध्यात्म को अपनाकर हो जाते है खर्चे कम, कमाई हो जाती है ज्यादा जीवन में अध्यात्म भगवान् का नाम जप, सत्संग, भजन कीर्तन और भक्तों के चरित्र को सुनने और…

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अध्यात्म को अपनाकर हो जाते है खर्चे कम, कमाई हो जाती है ज्यादा (EN)

अध्यात्म को अपनाकर हो जाते है खर्चे कम, कमाई हो जाती है ज्यादा जीवन में अध्यात्म भगवान् का नाम जप, सत्संग, भजन कीर्तन और भक्तों के चरित्र को सुनने और…

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प्रश्न- परिवार में प्रेम और सुख-शान्ति कैसे रहे?

प्रश्न- परिवार में प्रेम और सुख-शान्ति कैसे रहे? उत्तर- मनुष्य अपने उद्देश्य को जाग्रत रखे जब मनुष्य अपने उद्देश्यको भूल जाता है, तभी सब बाधाएँ, आफतें आती हैं। अगर वह…

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प्रश्न- परिवार में प्रेम और सुख-शान्ति कैसे रहे? (EN)

प्रश्न- परिवार में प्रेम और सुख-शान्ति कैसे रहे? उत्तर- मनुष्य अपने उद्देश्य को जाग्रत रखे जब मनुष्य अपने उद्देश्यको भूल जाता है, तभी सब बाधाएँ, आफतें आती हैं। अगर वह…

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भगवान् भाव के भूखे हैं

भगवान् भाव के भूखे हैं (ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज) गीताप्रेस गोरखपुर की प्रसिद्ध मासिक पत्रिका कल्याण के फरवरी अंक से गृहस्थमें रहनेवाले एक बड़े अच्छे त्यागी पण्डित थे। त्याग…

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भगवान् भाव के भूखे हैं (EN)

भगवान् भाव के भूखे हैं (ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज) गीताप्रेस गोरखपुर की प्रसिद्ध मासिक पत्रिका कल्याण के फरवरी अंक से गृहस्थमें रहनेवाले एक बड़े अच्छे त्यागी पण्डित थे। त्याग…

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पिता और माता आपस में लड़ें तो पुत्र का क्या कर्तव्य है?

प्रश्न-पिता और माता आपसमें लड़ें तो पुत्रका क्या कर्तव्य है? उत्तर- पुत्र का कर्तव्य जहाँतक बने, पुत्र को माँ क पक्ष लेना चाहिये; परन्तु पिताको इस बातका पता नहीं लगना…

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पिता और माता आपस में लड़ें तो पुत्र का क्या कर्तव्य है? (EN)

प्रश्न-पिता और माता आपसमें लड़ें तो पुत्रका क्या कर्तव्य है? उत्तर- पुत्र का कर्तव्य जहाँतक बने, पुत्र को माँ क पक्ष लेना चाहिये; परन्तु पिताको इस बातका पता नहीं लगना…

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पत्नी और पुत्रवधू आपस में झगड़े तो पति (ससुर) को क्या करना चाहिए ?

पत्नी और पुत्रवधू आपस में झगड़े तो पति (ससुर) को क्या करना चाहिए ? उत्तर– ससुर का बहु के प्रति कर्तव्य पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को धमकाये…

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पत्नी और पुत्रवधू आपस में झगड़े तो पति (ससुर) को क्या करना चाहिए ? (EN)

पत्नी और पुत्रवधू आपस में झगड़े तो पति (ससुर) को क्या करना चाहिए ? उत्तर– ससुर का बहु के प्रति कर्तव्य पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को धमकाये…

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प्रश्न- माँ और पत्नी (सास और बहू) आपसमें लड़ें तो पुत्रका क्या कर्तव्य होता है?

प्रश्न- माँ और पत्नी (सास और बहू) आपसमें लड़ें तो पुत्रका क्या कर्तव्य होता है? उत्तर-ऐसी स्थितिमें पुत्रके लिये बड़ी आफत होती है! वह अगर माँका पक्ष ले तो स्त्री…

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प्रश्न- माँ और पत्नी (सास और बहू) आपसमें लड़ें तो पुत्रका क्या कर्तव्य होता है? (EN)

प्रश्न- माँ और पत्नी (सास और बहू) आपसमें लड़ें तो पुत्रका क्या कर्तव्य होता है? उत्तर-ऐसी स्थितिमें पुत्रके लिये बड़ी आफत होती है! वह अगर माँका पक्ष ले तो स्त्री…

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प्रश्न – पुत्र आपस में लड़ें तो भाइयोंको क्या करना चाहिये ?

प्रश्न – पुत्र आपसमें लड़ें तो भाइयोंको क्या करना चाहिये ? उत्तर- जहाँ तक बने, अपने पुत्रका पक्ष न लें, भाई के पुत्रका पक्ष लें। यदि भाईके पुत्रका अन्याय हो…

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प्रश्न – पुत्र आपस में लड़ें तो भाइयोंको क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न – पुत्र आपसमें लड़ें तो भाइयोंको क्या करना चाहिये ? उत्तर- जहाँ तक बने, अपने पुत्रका पक्ष न लें, भाई के पुत्रका पक्ष लें। यदि भाईके पुत्रका अन्याय हो…

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प्रश्न- जेठानी और देवरानी आपसमें लड़ें तो भाइयों को क्या करना चाहिये ?

प्रश्न- जेठानी और देवरानी आपसमें लड़ें तो भाइयों को क्या करना चाहिये ? उत्तर- वे अपनी-अपनी स्त्री को समझायें। छोटा भाई अपनी स्त्री को समझाये कि ‘देखो! तुम्हें मेरे बड़े…

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प्रश्न- जेठानी और देवरानी आपसमें लड़ें तो भाइयों को क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न- जेठानी और देवरानी आपसमें लड़ें तो भाइयों को क्या करना चाहिये ? उत्तर- वे अपनी-अपनी स्त्री को समझायें। छोटा भाई अपनी स्त्री को समझाये कि ‘देखो! तुम्हें मेरे बड़े…

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प्रश्न – छोटा भाई भाभी से लड़े तो बड़े भाई का क्या कर्तव्य है?

प्रश्न – छोटा भाई भौजाईसे लड़े तो बड़े भाईका क्या कर्तव्य है? उत्तर-बड़ा भाई छोटे भाईको धमकाये कि ‘तुम क्या कर रहे हो ? शास्त्रकी दृष्टिसे बड़े भाईकी स्त्री माँके…

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प्रश्न – छोटा भाई भाभी से लड़े तो बड़े भाई का क्या कर्तव्य है? (EN)

प्रश्न – छोटा भाई भौजाईसे लड़े तो बड़े भाईका क्या कर्तव्य है? उत्तर-बड़ा भाई छोटे भाईको धमकाये कि ‘तुम क्या कर रहे हो ? शास्त्रकी दृष्टिसे बड़े भाईकी स्त्री माँके…

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प्रश्न- बहन माता-पितासे लड़े तो भाईका क्या कर्तव्य है ?

प्रश्न- बहन माता-पितासे लड़े तो भाईका क्या कर्तव्य है ? उत्तर – भाई न्याय देखे और न्यायमें भी वह बहनका पक्ष ले और माता-पितासे कहे कि यह तो अतिथिकी तरह…

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प्रश्न- बहन माता-पितासे लड़े तो भाईका क्या कर्तव्य है ? (EN)

प्रश्न- बहन माता-पितासे लड़े तो भाईका क्या कर्तव्य है ? उत्तर – भाई न्याय देखे और न्यायमें भी वह बहनका पक्ष ले और माता-पितासे कहे कि यह तो अतिथिकी तरह…

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प्रश्न- छोटे भाई माता-पितासे लड़ें तो बड़े भाईका क्या कर्तव्य है?

प्रश्न- छोटे भाई माता-पितासे लड़ें तो बड़े भाईका क्या कर्तव्य है? उत्तर-बड़ा भाई छोटे भाइयोंको समझाये कि ‘देखो भाई ! मैं और आप सब बालक हैं। माता-पिता हमारे लिये सर्वथा…

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प्रश्न- छोटे भाई माता-पितासे लड़ें तो बड़े भाईका क्या कर्तव्य है? (EN)

प्रश्न- छोटे भाई माता-पितासे लड़ें तो बड़े भाईका क्या कर्तव्य है? उत्तर-बड़ा भाई छोटे भाइयोंको समझाये कि ‘देखो भाई ! मैं और आप सब बालक हैं। माता-पिता हमारे लिये सर्वथा…

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प्रश्न-बड़ा भाई माता-पितासे लड़े तो छोटे भाइयोंका क्या कर्तव्य है ?

प्रश्न-बड़ा भाई माता-पितासे लड़े तो छोटे भाइयोंका क्या कर्तव्य है ? उत्तर-छोटे भाई बड़े भाईके चरणोंमें प्रणाम करके प्रार्थना करें कि ‘भाई साहब! आप ऐसा बर्ताव करोगे तो हमलोग किसको…

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प्रश्न-बड़ा भाई माता-पितासे लड़े तो छोटे भाइयोंका क्या कर्तव्य है ? (EN)

प्रश्न-बड़ा भाई माता-पितासे लड़े तो छोटे भाइयोंका क्या कर्तव्य है ? उत्तर-छोटे भाई बड़े भाईके चरणोंमें प्रणाम करके प्रार्थना करें कि ‘भाई साहब! आप ऐसा बर्ताव करोगे तो हमलोग किसको…

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प्रश्न – ननद (लड़की) और भौजाई (बहू) आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ?

प्रश्न – ननद (लड़की) और भौजाई (बहू) आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? उत्तर-माँ लड़कीको समझाये कि ‘देखो बेटी! यह (भौजाई) तो आजकलकी छोरी है। यह कुछ भी…

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प्रश्न – ननद (लड़की) और भौजाई (बहू) आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न – ननद (लड़की) और भौजाई (बहू) आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? उत्तर-माँ लड़कीको समझाये कि ‘देखो बेटी! यह (भौजाई) तो आजकलकी छोरी है। यह कुछ भी…

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प्रश्न- बेटा और बहू आपसमें लड़ें तो माता-पिता का क्या कर्तव्य होता है?

प्रश्न- बेटा और बहू आपसमें लड़ें तो माता-पिताका क्या कर्तव्य होता है? उत्तर-माता-पिता उन दोनोंको समझायें कि हम कबतक बैठे रहेंगे? इस घरके मालिक तो आप ही हो। यदि आप…

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प्रश्न- बेटा और बहू आपसमें लड़ें तो माता-पिता का क्या कर्तव्य होता है? (EN)

प्रश्न- बेटा और बहू आपसमें लड़ें तो माता-पिताका क्या कर्तव्य होता है? उत्तर-माता-पिता उन दोनोंको समझायें कि हम कबतक बैठे रहेंगे? इस घरके मालिक तो आप ही हो। यदि आप…

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प्रश्न- बहन-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ?

प्रश्न- बहन-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? उत्तर- माता-पिताको लड़कीका पक्ष लेना चाहिये; क्योंकि वह सुवासिनी है, दानकी पात्र है, थोड़े दिन रहनेवाली है; अतः वह आदरणीय…

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प्रश्न- बहन-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न- बहन-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? उत्तर- माता-पिताको लड़कीका पक्ष लेना चाहिये; क्योंकि वह सुवासिनी है, दानकी पात्र है, थोड़े दिन रहनेवाली है; अतः वह आदरणीय…

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प्रश्न – भाई-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ?

प्रश्न – भाई-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? उत्तर- माता-पित्ताको न्यायकी बात कहनी चाहिये। वे छोटे पुत्रसे कहें कि तुम भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्नको देखो कि वे…

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प्रश्न – भाई-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न – भाई-भाई आपसमें लड़ें तो माता-पिताको क्या करना चाहिये ? उत्तर- माता-पित्ताको न्यायकी बात कहनी चाहिये। वे छोटे पुत्रसे कहें कि तुम भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्नको देखो कि वे…

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परिवारमें झगड़ा, कलह, अशान्ति आदि होनेका क्या कारण है?

लड़ाई-झगड़ेका समाधान प्रश्न- परिवारमें झगड़ा, कलह, अशान्ति आदि होनेका क्या कारण है? उत्तर- हरेक प्राणी अपने मनकी कराना चाहता है, अपनी अनुकूलता चाहता है, अपना सुख-आराम चाहता है, अपनी महिमा…

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परिवारमें झगड़ा, कलह, अशान्ति आदि होनेका क्या कारण है? (EN)

लड़ाई-झगड़ेका समाधान प्रश्न- परिवारमें झगड़ा, कलह, अशान्ति आदि होनेका क्या कारण है? उत्तर- हरेक प्राणी अपने मनकी कराना चाहता है, अपनी अनुकूलता चाहता है, अपना सुख-आराम चाहता है, अपनी महिमा…

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प्रश्न- पुरुष तो संयम रखे, पर स्त्री संयम न रखे तो क्या करना चाहिये ?

प्रश्न- पुरुष तो संयम रखे, पर स्त्री संयम न रखे तो क्या करना चाहिये ? उत्तर- यह बात नहीं है कि स्त्री संयम न रखे। वास्तवमें पुरुष ही स्त्रीको बिगाड़ता…

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प्रश्न- पुरुष तो संयम रखे, पर स्त्री संयम न रखे तो क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न- पुरुष तो संयम रखे, पर स्त्री संयम न रखे तो क्या करना चाहिये ? उत्तर- यह बात नहीं है कि स्त्री संयम न रखे। वास्तवमें पुरुष ही स्त्रीको बिगाड़ता…

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प्रश्न- अधिक सन्तान चाहते नहीं और संयम हो पाता नहीं, ऐसी अवस्थामें क्या करें ?

प्रश्न- अधिक सन्तान चाहते नहीं और संयम हो पाता नहीं, ऐसी अवस्थामें क्या करें ? उत्तर-ऐसी बात नहीं है। अगर आप संयम करना चाहते हैं तो संयम अवश्य हो सकता…

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प्रश्न- अधिक सन्तान चाहते नहीं और संयम हो पाता नहीं, ऐसी अवस्थामें क्या करें ? (EN)

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प्रश्न – सन्तान अधिक पैदा करेंगे तो उसके पालन-पोषणमें ही सारा समय चला जायगा, फिर भगवान्‌का भजन कैसे करेंगे ?

प्रश्न – सन्तान अधिक पैदा करेंगे तो उसके पालन-पोषणमें ही सारा समय चला जायगा, फिर भगवान्‌का भजन कैसे करेंगे ? उत्तर- हमारा आशय यह नहीं है कि आप सन्तान अधिक…

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प्रश्न – सन्तान अधिक पैदा करेंगे तो उसके पालन-पोषणमें ही सारा समय चला जायगा, फिर भगवान्‌का भजन कैसे करेंगे ? (EN)

प्रश्न – सन्तान अधिक पैदा करेंगे तो उसके पालन-पोषणमें ही सारा समय चला जायगा, फिर भगवान्‌का भजन कैसे करेंगे ? उत्तर- हमारा आशय यह नहीं है कि आप सन्तान अधिक…

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प्रश्न- भगवान् राम और भरत आदिने भी परिवार- नियोजन किया था- ‘दुइ सुत सुंदर सीताँ जाए’ और ‘दुइ दुइ सुत सब भ्रातन्ह केरे’ (मानस, उत्तर० २५।३-४)। अतः अब भी दो ही संतान रखें तो क्या हानि है?

प्रश्न- भगवान् राम और भरत आदिने भी परिवार- नियोजन किया था- ‘दुइ सुत सुंदर सीताँ जाए’ और ‘दुइ दुइ सुत सब भ्रातन्ह केरे’ (मानस, उत्तर० २५।३-४)। अतः अब भी दो…

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प्रश्न- भगवान् राम और भरत आदिने भी परिवार- नियोजन किया था- ‘दुइ सुत सुंदर सीताँ जाए’ और ‘दुइ दुइ सुत सब भ्रातन्ह केरे’ (मानस, उत्तर० २५।३-४)। अतः अब भी दो ही संतान रखें तो क्या हानि है? (EN)

प्रश्न- भगवान् राम और भरत आदिने भी परिवार- नियोजन किया था- ‘दुइ सुत सुंदर सीताँ जाए’ और ‘दुइ दुइ सुत सब भ्रातन्ह केरे’ (मानस, उत्तर० २५।३-४)। अतः अब भी दो…

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प्रश्न- सन्तान कम होगी तो उनका पालन-पोषण भी अच्छा होगा और परिवार भी सुखी रहेगा; अतः परिवार नियोजन करनेमें हानि क्या है?

प्रश्न- सन्तान कम होगी तो उनका पालन-पोषण भी अच्छा होगा और परिवार भी सुखी रहेगा; अतः परिवार नियोजन करनेमें हानि क्या है? उत्तर-कम सन्तानसे परिवार सुखी रहेगा यह बात नहीं…

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प्रश्न- सन्तान कम होगी तो उनका पालन-पोषण भी अच्छा होगा और परिवार भी सुखी रहेगा; अतः परिवार नियोजन करनेमें हानि क्या है? (EN)

प्रश्न- सन्तान कम होगी तो उनका पालन-पोषण भी अच्छा होगा और परिवार भी सुखी रहेगा; अतः परिवार नियोजन करनेमें हानि क्या है? उत्तर-कम सन्तानसे परिवार सुखी रहेगा यह बात नहीं…

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प्रश्न- आज महँगाई के जमाने में अधिक सन्तान होगी तो उनका पालन-पोषण आदि कैसे करेंगे ?

प्रश्न- आज महँगाई के जमाने में अधिक सन्तान होगी तो उनका पालन-पोषण आदि कैसे करेंगे ? उत्तर- आप विचार करें कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है; अतः जनसंख्या बढ़ेगी,…

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प्रश्न- आज महँगाई के जमाने में अधिक सन्तान होगी तो उनका पालन-पोषण आदि कैसे करेंगे ? (EN)

प्रश्न- आज महँगाई के जमाने में अधिक सन्तान होगी तो उनका पालन-पोषण आदि कैसे करेंगे ? उत्तर- आप विचार करें कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है; अतः जनसंख्या बढ़ेगी,…

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प्रश्न- हमें काम-धंधा नहीं मिलता तो हम क्या करें?

प्रश्न- हमें काम-धंधा नहीं मिलता तो हम क्या करें? उत्तर-काम-धंधा न मिलनेमें कारण है कि मनुष्य जिस क्षेत्र एवं समुदायमें जाता है, वहाँ वह अपने कर्तव्यका ठीक-ठीक पालन नहीं करता,…

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प्रश्न- हमें काम-धंधा नहीं मिलता तो हम क्या करें? (EN)

प्रश्न- हमें काम-धंधा नहीं मिलता तो हम क्या करें? उत्तर-काम-धंधा न मिलनेमें कारण है कि मनुष्य जिस क्षेत्र एवं समुदायमें जाता है, वहाँ वह अपने कर्तव्यका ठीक-ठीक पालन नहीं करता,…

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प्रश्न- आज अन्न इतना महँगा क्यों हो गया है?

प्रश्न- आज अन्न इतना महँगा क्यों हो गया है? उत्तर-विचारपूर्वक देखें कि जबसे परिवार नियोजन होता गया, तबसे अन्न भी महँगा होता गया, कम पैदा होता गया। जब मनुष्योंकी संख्या…

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