सारी बुरी आदतें तो छूट गई पर कामवासना खत्म नहीं हो रही ! Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj

कामवासना साधक के लिए सबसे बड़ा शत्रु है, परन्तु श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज बताते हैं कि यह अजेय नहीं है; सही समझ, साधना, नामजाप, सत्संग और वैराग्य…

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