दस महाव्रत [२]- सत्य – सत्य में दृढ़ स्थिति हो जाने पर (योगीकी) क्रिया फल का आश्रय बनती है अर्थात् उसकी वाणी अमोघ हो जाती है (EN)
दस महाव्रत [२]- सत्य (१) ‘सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ।’* * सत्यमें दृढ़ स्थिति हो जानेपर (योगीकी) क्रिया फलका आश्रय बनती है अर्थात् उसकी वाणी अमोघ हो जाती है। (योगदर्शन २। ३६)…






