प्रेमी, प्रेमिका और मंगेतर का मर्डर: क्या अध्यात्म से दूर होता इंसान सच में राक्षस बनता जा रहा है?
आज जब हम सुबह अख़बार खोलते हैं या टीवी पर न्यूज़ चैनल देखते हैं, तो मन में एक अजीब सा डर और बेचैनी पैदा हो जाती है। हर तरफ हत्या,…
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प्रस्तावना – ज़िंदगी का असली स्कूल किताबें हमें डिग्री देती हैं, लेकिन असल ज़िंदगी हमें वो सबक सिखाती है जो कोई स्कूल, कॉलेज, या MBA नहीं सिखा पाता। राजेश देम्बला…
प्रस्तावना: डर और अव्यवस्था का बढ़ता हुआ दौर आधुनिक भारत का समाज एक अजीब दुविधा में जी रहा है। तकनीकी प्रगति, आधुनिक शिक्षा, ग्लोबल लाइफस्टाइल और आर्थिक वृद्धि के बावजूद…