चित्त में उठने वाली इच्छा ही बंधन है: श्रीहित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज

भूमिका मनुष्य का जीवन इच्छाओं का ताना-बाना है। हर क्षण कोई न कोई चाह, आकांक्षा, या आकर्षण भीतर से उठता है, और वही व्यक्ति को किसी कर्म, परिणाम या स्थिति…

Continue reading

You Missed

डिग्री अब आपको नहीं बचाएगी: बदलते जॉब मार्केट की कड़वी सच्चाई
2026 की चार धाम यात्रा में 55 मौतें: आस्था, अव्यवस्था और पहाड़ की सच्चाई
CBSE की तीन भाषा नीति: विदेशी भाषाएँ, संस्कृत, राजनीति और छात्रों का भविष्य
किन्नर कौन होते हैं? जन्म, शरीर, स्वास्थ्य, परंपरा और कानून की पूरी जानकारी
क्या पीएम मोदी की सलाह पर अमल करेंगे लोग? बिना आध्यात्मिक संयम के कैसे संभव है यह बदलाव
11 करोड़ क्रिप्टो में, सिर्फ 5 करोड़ म्यूच्यूअल फण्ड में, क्या  भारत जुआ खेल रहा है?