आत्मज्ञान का दिव्य रहस्य: “मैं कौन हूँ?” — श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के अमृत वचन
श्री महाराज जी की वाणी में आत्मा का स्वरूप “भगवान का स्वरूप अंश का तात्पर्य होता है — पूर्ण का अंश भी पूर्ण ही होता है।”“पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।”“वह परमात्मा…







