चित्त में उठने वाली इच्छा ही बंधन है: श्रीहित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज

भूमिका मनुष्य का जीवन इच्छाओं का ताना-बाना है। हर क्षण कोई न कोई चाह, आकांक्षा, या आकर्षण भीतर से उठता है, और वही व्यक्ति को किसी कर्म, परिणाम या स्थिति…

Continue reading
देवी चित्रलेखा जी ने महाराज जी से क्या प्रश्न किया ? Bhajan Marg

इस वीडियो में परम पूज्य वृंदावन रसिक संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के विचार और प्रवचनों का अत्यंत विस्तार से वर्णन किया गया है। नीचे उन्हीं विचारों…

Continue reading