इस भक्त ने भोजन क्यों त्याग दिया? गौमाता के लिए अद्भुत त्याग की भावनात्मक कथा
इस भक्त ने भोजन त्यागा, क्योंकि उसके अंतर्मन में गौमाता की पीड़ा और उत्तर प्रदेश व देश में हो रही गौहत्या के विरुद्ध गहरा आक्रोश और विरक्ति जन्म ले चुकी…
इस भक्त ने भोजन त्यागा, क्योंकि उसके अंतर्मन में गौमाता की पीड़ा और उत्तर प्रदेश व देश में हो रही गौहत्या के विरुद्ध गहरा आक्रोश और विरक्ति जन्म ले चुकी…
श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज की इस वाणी में मुख्य रूप से संस्कार, मर्यादा और संयमित जीवन का संदेश है। नीचे उनकी बातों को पॉइंट-वाइज आर्टिकल की तरह रखा गया…