भारत में chit fund, कमेटी, ponzi schemes जैसे धोखाधड़ी वाले निवेश के कारण लाखों लोग अपनी मेहनत की कमाई खो चुके हैं। अगर यही पैसा लोग नियमित SIP या lumpsum के ज़रिए रेगुलेटेड mutual funds में लगाते, तो लंबे समय में अच्छी wealth बनाई जा सकती थी।
नीचे पूरा लेख आसान हिंदी में है, ताकि सामान्य निवेशक इन जालों को समझकर बचाव कर सके।
Chit fund, कमेटी और Ponzi kya hote hain?
- Chit fund (चिट फंड): इसमें कुछ लोग या एजेंट मिलकर एक कमेटी बनाते हैं, हर महीने सब एक तय रकम जमा करते हैं, फिर नीलामी या लॉटरी से किसी एक को पूरी राशि दी जाती है। कई अवैध chit funds बिना रजिस्ट्रेशन के चलते हैं, जहाँ आयोजक पूरा पैसा लेकर भाग जाते हैं।
- कमेटी / समिति: यह लोकल लेवल पर चलने वाली अनौपचारिक chit होती है, जो अक्सर पड़ोस, ऑफिस या रिश्तेदारों में चलती है। इसमें कोई कानूनी एग्रीमेंट या सरकारी निगरानी नहीं होती, सबकुछ भरोसे और लिखित–बिना के आधार पर चलता है।
- Ponzi scheme (पोंजी स्कीम): यह एक नकली निवेश योजना होती है जिसमें नए लोगों का पैसा पुराने निवेशकों को “मुनाफा” बनाकर दिया जाता है। असली बिज़नेस या प्रॉडक्ट नहीं होता, सिर्फ पैसों का गोल–चक्कर होता है, और एक समय के बाद सिस्टम ढह जाता है।
भारत के kuch बड़े chit fund / Ponzi scams
Saradha chit fund scam
- सरधा ग्रुप ने 2006 से लेकर 2013 तक तरह–तरह की निवेश स्कीमों के नाम पर करीब 17 लाख निवेशकों से लगभग 3,500 करोड़ रुपये जमा कर लिए।
- गांव–कस्बों के एजेंटों को 25–40% तक कमीशन, गिफ्ट और टूर देकर मोटिवेट किया गया, ताकि वे गरीब व मिडिल क्लास लोगों से पैसा जुटाएँ।
- जब स्कीम ध्वस्त हुई तो लाखों लोगों की जीवन भर की बचत डूब गई, और बहुत से लोगों ने कर्ज़ लेकर भी निवेश किया था।
Rose Valley chit fund scam
- Rose Valley ग्रुप ने chit fund और दूसरी collective investment schemes के नाम पर अनुमानित 15,000–17,500 करोड़ रुपये तक जुटाए।
- कंपनी ने रिज़ॉर्ट, होटल, ज़मीन आदि दिखाकर ऊँचे रिटर्न का लालच दिया, परन्तु असल में यह अवैध Ponzi और अनरजिस्टर्ड स्कीमें थीं।
- बाद में ED और CBI ने ग्रुप की लगभग 2,300 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की, लेकिन छोटे निवेशकों को पूरा पैसा वापस नहीं मिल पाया।
Speak Asia online scam
- Speak Asia ने “ऑनलाइन सर्वे” और “रोज़गार” के नाम पर करीब 24 लाख लोगों से लगभग 2,200 करोड़ रुपये ठग लिए।
- लोगों से कहा गया कि कुछ हज़ार रुपये की “सब्सक्रिप्शन” दे दो, हर हफ्ते सर्वे भरो, बदले में मोटा पैसा मिलेगा, और दूसरों को जोड़ने पर और कमाई होगी।
- कंपनी के मुख्य लोग पैसों को विदेशों (सिंगापुर, ब्राज़ील, मलेशिया आदि) में ट्रांसफर करके छिपाते रहे और बाद में फरार हो गए या गिरफ्तार हुए।
Emu farming Ponzi schemes
- तमिलनाडु में Susi Emu Farms, Abi Emu Farms, Queen Emu Farms जैसी कंपनियों ने “emu farming” के नाम पर भारी मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा किए।
- स्कीम का मॉडल यह था कि कम्पनी आपके नाम पर कुछ emu पक्षी रखेगी, हर महीने निश्चित पैसिव इनकम देगी, और कुछ साल बाद बड़ा रिटर्न देगी – पर असल में यह क्लासिक Ponzi था।
- बाद में TNPID कोर्ट ने कई आरोपियों को 10 साल तक की सज़ा और जुर्माना देकर दोषी ठहराया, लेकिन तब तक हज़ारों लोगों की बचत नष्ट हो चुकी थी।
Aise scams logon ko kaise lubhाते hain?
1. ज़रूरत और लालच दोनों पर खेल
- ज़्यादातर पीड़ित lower middle class, छोटे दुकानदार, किसान, रिटायर लोग, गृहणियाँ आदि होते हैं जिन्हें जल्दी पैसा और नियमित आय की ज़रूरत होती है।
- स्कीम बताती है: “बैंक से ज्यादा ब्याज”, “हर महीने तय इनकम”, “गारंटीड रिटर्न”, जिससे लोग यह मान बैठते हैं कि यह आम बैंक / FD से बेहतर और सुरक्षित है।
2. भरोसे का जाल
- एजेंट अक्सर वही होते हैं जिन्हें लोग पहले से जानते हैं – पड़ोसी, रिश्तेदार, लोकल लीडर, शिक्षक, पोस्टमैन, या गाँव के प्रतिष्ठित लोग।
- जब कोई जान–पहचान वाला कहता है “मैंने भी लगाया है, तू भी लगा”, तो लोग बिना पूछताछ किए पैसे दे देते हैं, कागज पढ़े बिना साइन कर देते हैं।
3. झूठी वैधता और ग्लैमर
- बड़ी स्कीमें TV ऐड, अखबार, होर्डिंग, फिल्म सितारों की एंडोर्समेंट, मेगा इवेंट्स आदि से खुद को “बड़ी कंपनी” साबित करती हैं।
- कुछ स्कीमें रिज़ॉर्ट, होटल, गोल्ड, रियल एस्टेट, एग्रीकल्चर, माइक्रोफाइनेंस, “सोशल सर्विस” जैसे शब्द जोड़कर यह दिखाती हैं कि उनका बिजनेस बहुत मजबूत और देश–हित में है।l
4. “जल्दी फैसले” का प्रेशर
- ऑफर इस तरह बनाए जाते हैं कि लगे “आज नहीं तो कभी नहीं” – जैसे “पहले 1000 निवेशकों को extra bonus”, “आज join करो तो registration free”, “तीन दिन बाद scheme बंद”।
- डर और लालच का मिश्रण इंसान को सोचने का समय नहीं देता, वह बिना सलाह के फॉर्म भर देता है.
Yeh schemes अंदर से kaise चलती हैं?
1. न नया प्रॉडक्ट, न असली बिज़नेस
- Ponzi scheme की जड़ यह है कि उसमें असली प्रॉफिट पैदा करने वाला बिज़नेस मॉडल ही नहीं होता; असली “मुनाफा” नए लोगों का पैसा होता है।
- शुरुआती निवेशकों को वादा किया गया रिटर्न सिर्फ इसलिए मिलता है क्योंकि लगातार नए लोग जुड़ रहे होते हैं और नया पैसा आ रहा होता है।
2. Pyramid और agent network
- कंपनियाँ गाँव–गाँव, मोहल्ले–मोहल्ले तक agent network फैलाती हैं, जिन्हें बहुत ऊँचा कमीशन दिया जाता है – कभी–कभी 25–40% तक।
- एजेंट का लक्ष्य होता है ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को जोड़ना, क्योंकि उसका खुद का “मुनाफा” दूसरों का पैसा लाने पर निर्भर होता है, प्रोडक्ट बिक्री पर नहीं।
3. Paper पर भारी returns, हकीकत में नकली
- कंपनियाँ attractive brochures और bond / receipt देती हैं जिन पर 18%, 24%, 30% तक सालाना रिटर्न या “हर महीने fix income” लिखा होता है।
- शुरुआत में कुछ महीनों तक समय पर भुगतान भी करती हैं, ताकि भरोसा मजबूत हो जाए और लोग और पैसा लगा दें या दोस्तों को भी बुला लाएँ।
4. Collapse ka mechanism
- जैसे ही नए निवेशक आना धीमे हो जाते हैं, कंपनी के पास पुराने निवेशकों को “घोषित” रिटर्न देने के लिए पर्याप्त नया पैसा नहीं बचता।
- कंपनी पेमेंट रोक देती है, ऑफिस बंद होने लगते हैं, कॉल नहीं उठते, वेबसाइट डाउन हो जाती है, और अंत में promoter या तो गायब हो जाते हैं या गिरफ़्तार होते हैं।
Paise lekar kaise bhaगते hain aur “inko kuch hota kyon nahi”?
1. कंपनियों का जाल और पैसे की layering
- कई बड़े scamsters दर्जनों फर्जी कंपनियाँ बनाते हैं; एक कंपनी से दूसरी में, फिर तीसरी में पैसा ट्रांसफर करके असली source और end user को छिपा देते हैं.
- पैसों का कुछ हिस्सा cash में निकाल लिया जाता है, कुछ प्रॉपर्टी, सोना, विदेशों के bank accounts या shell companies के ज़रिए बाहर भेज दिया जाता है।
2. कानून और jurisdiction की जटिलता
- बहुत सी स्कीमें एक से ज़्यादा राज्यों में चलती हैं, जबकि उन पर लागू कानून अलग–अलग होते हैं – जैसे Chit Funds Act (राज्य), TNPID Act, Companies Act, SEBI Act आदि।
- जांच में देर, राजनीतिक दबाव, और अपर्याप्त दस्तावेज़ी सबूत के कारण केस सालों चल जाते हैं, तब तक पैसे की वसूली लगभग नामुमकिन हो जाती है।
3. सज़ा और राहत – मगर देर से
- कुछ केसों में कोर्ट ने promoters और directors को सज़ा, जुर्माना और victim compensation का आदेश भी दिया है, जैसे emu scams में 10–10 साल की सज़ा हुई।
- फिर भी वसूली की गई संपत्ति, घोटाले की कुल राशि के मुकाबले अक्सर बहुत कम होती है, इसलिए आम निवेशक को अपना पूरा पैसा वापस नहीं मिल पाता।
Mutual funds se log wealth kaise create kar सकते थे?
Mutual funds kya hote hain?
- Mutual fund वह व्यवस्था है जहाँ बहुत से निवेशकों का पैसा मिलाकर एक प्रोफेशनल fund manager अलग–अलग शेयर, बॉन्ड आदि में निवेश करता है।
- भारत में mutual funds को SEBI रेगुलेट करता है, जो पारदर्शिता, डिस्क्लोजर, custodian व्यवस्था और निवेशक सुरक्षा के सख्त नियम तय करता है।
Chit fund / Ponzi vs Mutual fund
| पहलू | Chit fund / Ponzi | Mutual fund |
|---|---|---|
| रेगुलेशन | बहुत से chit/कमेटी अनरजिस्टर्ड, Ponzi पूरी तरह अवैध। | कड़ाई से SEBI द्वारा रेगुलेटेड। |
| पैसा किसके पास | आयोजक / कंपनी के पास सीधा पैसा, अक्सर अलग custodian नहीं। | निवेशकों का पैसा अलग custodian के पास सुरक्षित, AMC सिर्फ मैनेज करती है। |
| रिटर्न | “फिक्स्ड high return” का दावा, पर वास्तविक बिज़नेस नहीं। | मार्केट–लिंक्ड रिटर्न, कोई गारंटी नहीं पर long term में 10–15% तक संभव |
| रिस्क | default / fraud / भाग जाने का बड़ा रिस्क। | मार्केट volatility का रिस्क, पर fraud का रिस्क काफ़ी कम और रेगुलेटेड। |
| उद्देश्य | अक्सर शॉर्ट–टर्म लालच और नकली योजना। | long term wealth creation और diversification। |
SIP aur lumpsum se kya फ़ायदा होता?
- SIP (Systematic Investment Plan) में हर महीने थोड़ा–थोड़ा पैसा mutual fund में लगाने से rupee–cost averaging होती है और long term compounding से corpus बनता है।
- अगर कोई व्यक्ति chit / Ponzi में 5,000–10,000 रुपये महीने डालने के बजाय किसी अच्छे diversified equity mutual fund में SIP करता रहता, तो 10–15 साल में वह अच्छी–खासी राशि बना सकता था।
- Lumpsum investment भी long term goal (जैसे retirement, बच्चों की पढ़ाई) के लिए equity / hybrid mutual funds में, risk profile के हिसाब से, distributor या SEBI–registered advisor की मदद से किया जा सकता है।
Aise scams se bachने ke आसान नियम
1. “बहुत ज्यादा” पक्का रिटर्न = लाल झंडा
- कोई भी स्कीम अगर बैंक FD से बहुत ज्यादा और “गारंटीड” रिटर्न दे रही है (जैसे 24–36% सालाना या हर महीने 3–4% fix), तो उसे तुरंत संदेह की नज़र से देखना चाहिए।
- शेयर / mutual fund तक भी long term में आमतौर पर 10–15% के आसपास ही रहते हैं, तो इससे कई गुना “पक्का मुनाफा” लगभग हमेशा छल होता है।
2. Regulator aur registration check करें
- देखिए क्या स्कीम SEBI, RBI, IRDAI, PFRDA जैसे किसी मान्य रेगुलेटर के अंतर्गत आती है या नहीं।
- अगर कोई कहे “हमें सरकार ने मंजूरी दी है” तो उसका असली registration number और regulator की साइट पर details ज़रूर verify करें।
3. Business model samjhe बिना कभी invest न करें
- अगर आपको साफ–साफ नहीं समझ आ रहा कि कंपनी पैसा कैसे कमा रही है, और profit कहाँ से आ रहा है, तो उसमे एक रुपया भी नहीं लगाना चाहिए।
- केवल “नए लोग जोड़ो और commission कमाओ” वाला model लगभग हमेशा Ponzi या pyramid होता है, न कि genuine बिज़नेस।
4. Written documents और bank trail रखें
- निवेश के नाम पर अगर cash लेने की ज़िद हो, proper receipt, agreement, KYC, PAN आदि न माँगे जा रहे हों, तो दूर रहना बेहतर है।
- सही निवेश में हमेशा bank के through payment, account statement और tax document (capital gain stmt, CAS आदि) मिलते हैं।
5. Mutual fund/bank advisor से राय लें
- कोई भी स्कीम समझ में न आए तो पहले अपने बैंक मैनेजर, mutual fund distributor या SEBI registered investment advisor से राय लेना समझदारी है।
- family या पड़ोसी पर भावनात्मक भरोसा अलग बात है, लेकिन वित्तीय फैसलों के लिए प्रशिक्षित और रेगुलेटेड सलाहकार बेहतर होते हैं।
Ant mein ek सादा सीख
भारत में chit funds, कमेटी और Ponzi schemes ने अरबों–खरबों रुपये डुबो दिए हैं और करोड़ों सपनों को तोड़ा है। मेहनत की कमाई को बचाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि “जल्दी और पक्का” मुनाफे के लालच से दूर रहें और रेगुलेटेड साधनों जैसे mutual funds, bank deposits, insurance आदि के ज़रिए, धीरे–धीरे और समझदारी से wealth बनाएं।







