गुरुदेव की इच्छा को अपनी इच्छा बना लेना ही दीक्षा है

गुरुदेव की इच्छा को अपनी इच्छा बना लेना ही दीक्षा है – यह वाक्य श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज की सम्पूर्ण गुरु‑तत्त्व दृष्टि का सार है। दीक्षा का…

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