क्षमा करना कमजोरी का नहीं, बल्कि बहुत बड़े बल का प्रतीक है

क्षमा करना वास्तव में कमजोरी नहीं, बल्कि भीतर के दैवी बल का प्रकट रूप है; जो क्षमा कर पाता है, वही सच में जीतता है। प्रस्तावना : क्षमा का असली…

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हम जिनको गुरु मानते हों, अगर उनके इष्ट अलग हों तो ऐसे में हम क्या करें? Bhajan Marg

हम जिनको गुरु मानते हों और जिनसे हमारी गहरी श्रद्धा हो, अगर उनके इष्ट अलग हों और हमारी आसक्ति किसी दूसरे इष्ट में हो, तो भी भक्ति में कोई टकराव…

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चिंताओं से मुक्त कैसे हों?

चिंताओं से मुक्त होने पर इस प्रवचन में महाराज जी की मुख्य बात सिर्फ एक है – नाम जप और भगवान पर भरोसा जीवन की सारी चिंताओं को जला देते…

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कुछ लोग पूजा पाठ नहीं करते फिर भी सफल क्यों हैं – प्रेमानंद जी महाराज का भजन मार्ग उपदेश

कुछ लोग पूजा‑पाठ नहीं करते हुए भी सफल दिखते हैं – इस पूरे प्रवचन में महाराज जी इसका उत्तर कर्म, प्रारब्ध, पुरुषार्थ और नाम‑श्रद्धा के सिद्धांत से देते हैं। नीचे…

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क्या नौकरी करना ज़रूरी है या इसका कोई आध्यात्मिक महत्व भी है?

नौकरी करना सिर्फ़ “रोटी कमाने” की मजबूरी नहीं, बल्कि सही भाव से की जाए तो बहुत गहरा आध्यात्मिक साधन और भगवान की सेवा बन सकती है।​ प्रश्न की भूमिका: नौकरी…

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