गुरुदेव की इच्छा को अपनी इच्छा बना लेना ही दीक्षा है

गुरुदेव की इच्छा को अपनी इच्छा बना लेना ही दीक्षा है – यह वाक्य श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज की सम्पूर्ण गुरु‑तत्त्व दृष्टि का सार है। दीक्षा का…

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“वर्तमान में नाम जप करो; भूत और भविष्य की चिंता मत करो”

वर्तमान में नाम-जप करो; भूत और भविष्य की चिंता मत करो – पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज का यह वचन केवल एक सुंदर वाक्य नहीं, बल्कि सम्पूर्ण…

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भगवान के भजन को कल के लिए टालना, प्रमाद की स्थिति है

मनुष्य जीवन अनमोल है, लेकिन हममें से अधिकांश इसे यूँ ही रोज़मर्रा की भागदौड़, चिंताओं और व्यर्थ के मनोरंजनों में गँवा देते हैं। जब बात भगवान के भजन, नाम-स्मरण और…

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