हे प्रभु इस दीवाली पर यह हो जाए……….
दीपावली के मौके पर घर परिवार में समृद्धि के लिए हम भगवान से प्रार्थना करते है। कल एक बड़े निवेषक विजय केडिया से न्यूज एंकर ने पूछा-इस दीवाली आप क्या चाहेंगे, सुकून या धन। तो उनका जवाब था कि धन आ जाएगा तो सुकून खुद आ जाएगा। केडिया जी, षेयर मार्किट के मंजे हुए निवेषक हैं और उन्होंने बहुत ज्यादा पैसा कमाया है। उनकी राय काफी सुलझी होती है, क्योंकि वह नीचे से ऊपर काफी संघर्ष करके आए है।
लेकिन जैसा कि हमारे महाराज जी का कहना है कि हम सब षांति चाहते हैं, क्योंकि हम सब भगवान के अंष है और भगवान से ही प्यार सुख और षांति है। महाराज जी कहते है कि उनके पास बहुत धनी मानी लोग आते है लेकिन वो कहते है कि हमारे पास पैसा है लेकिन तब भी बेचैनी और डर सा लगा रहता है। धन जीवन के लिए जरूरी है। लेकिन जीवन के लिए सिर्फ धन ही जरूरी है, यह बात मानने वाले षायद चूक रहे हैं। किसी गृहस्थ के जीवन में परम सुख बिना भगवान की भक्ति के बिना नहीं आ सकता। जीवन चलाने के लिए धन की जरूरत है, लेकिन अगर ज्यादा धन आ जाए और भगवान की भक्ति नहीं है तो जीवन के रास्ते में भटकाव आ सकता है। ज्यादा धन है और भगवान की भक्ति पहले से ही साथ है तो रास्ते में भटकाव नहीं बल्कि आसान हो जाता है।
अब मैं यह लेख सिर्फ केडिया साहब की बात का खंडन करने के लिए नहीं लिख रहा हूं। दरअसल, आधे घंटे के इंटरव्यू में पूरी बात नहीं आती। अगर विस्तार से बातचीत आती तो केडिया साहब भी भगवान की सत्ता को मानने की बात जरूर आती।
हमारे जीवन में काम, क्रोध, मोह, लोभ, मद और मयस्स्र (ईष्र्या) की बड़ी रूकावटें है। सारी परेषानी इन्हीं विकारों से षुरू होती हैं। महाराज जी इन पर लगाम कसने के लिए पूरी रणनीति बताते है। भजन मार्ग यूट्यूब चैनल पर उनके वीडियो देख। आपको इन विकारों से लड़ने के लिए जरूर मदद मिलेगी।
तो हमें दिवाली के त्योहार में इन गंदी बातों से लड़ने के लिए हर समय कोषिष करनी चाहिए। इन विकारों को लड़ना इतना आसान नहीं है। लेकिन भगवान का साथ मिलने से सब ठीक हो जाता है।






