डिजिटल भुगतान और एटीएम के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर ठगों द्वारा कम पढ़े-लिखे और तकनीकी जानकारी सीमित रखने वाले लोगों को निशाना बनाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक कामवाली के पति के एटीएम से कथित रूप से डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए हजारों रुपये निकाल लिए गए। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और बैंकिंग जागरूकता के महत्व को उजागर किया है। जिन लोगों को एटीएम, यूपीआई, ओटीपी और ऑनलाइन लेन-देन की पूरी समझ नहीं है, उनके लिए बैंक शाखा से निकासी-पर्ची के जरिए पैसा निकालने और छोटे लेन-देन में नकद का उपयोग करना अधिक सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
निकासी-पर्ची से पैसा निकालना सुरक्षित विकल्प
बैंक शाखा में निकासी-पर्ची भरकर पैसा निकालने की पुरानी विधि आज भी उपलब्ध है। इस प्रक्रिया में खाताधारक बैंक जाता है, निकासी-पर्ची में खाता संख्या, राशि और हस्ताक्षर दर्ज करता है। बैंक कर्मचारी हस्ताक्षर और खाते की जानकारी की जांच करने के बाद नकद देता है। इस तरीके में यूपीआई पिन, ओटीपी, कार्ड की जानकारी या किसी ऑनलाइन लिंक की आवश्यकता नहीं होती।
बुजुर्ग, सीमित शिक्षा वाले लोग, ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी और जो लोग स्मार्टफोन या डिजिटल भुगतान का उपयोग कम करते हैं, उनके लिए यह तरीका विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है। बैंक में कर्मचारी की उपस्थिति में लेन-देन होने से गलती या धोखाधड़ी की आशंका कम होती है। इसलिए जब तक कोई व्यक्ति एटीएम और यूपीआई की सुरक्षा समझ नहीं लेता, तब तक बैंक शाखा से निकासी-पर्ची का उपयोग बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
नकद लेन-देन को मिल सकती प्राथमिकता
डिजिटल भुगतान ने लेन-देन को तेज और आसान बनाया है, लेकिन छोटे लेन-देन के लिए नकद का उपयोग अभी भी व्यावहारिक विकल्प है। सब्जी, राशन, दवा, स्थानीय दुकान या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नकद देने से लोग तुरंत राशि देख पाते हैं। इसमें ओटीपी, पिन, क्यूआर कोड या स्क्रीन पर आने वाले संदेश की जटिलता नहीं होती।
हालांकि, नकद रखने में भी सावधानी जरूरी है। बड़ी राशि घर में या जेब में रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी जरूरत के अनुसार सीमित नकद रखें और बड़ी राशि के लिए बैंक शाखा या सुरक्षित बैंकिंग माध्यम का उपयोग करें।
डिजिटल ठगी के आम तरीके
साइबर ठग अक्सर फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश, नकली लिंक और नकली कस्टमर केयर नंबर के जरिए लोगों को फंसाते हैं। वे खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, टेलीकॉम कर्मचारी या सरकारी प्रतिनिधि बताते हैं। फिर खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट, लॉटरी या रिफंड जैसे बहानों से लोगों से ओटीपी, पिन, कार्ड नंबर या यूपीआई पिन मांगते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंक या आरबीआई कभी भी फोन, एसएमएस या ईमेल के जरिए खाता विवरण, कार्ड नंबर, सीवीवी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन या ओटीपी नहीं मांगते। इसके बावजूद कई लोग डर या भ्रम में आकर अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं, जिसके बाद उनके खाते से पैसा निकाल लिया जाता है।
यूपीआई में ठगी का एक आम तरीका यह है कि ठग पैसा भेजने के बजाय पैसा लेने का अनुरोध भेजता है। वह पीड़ित को कहता है कि पैसा प्राप्त करने के लिए पिन डालना होगा। लेकिन यूपीआई पिन डालने का अर्थ पैसा भेजना होता है, पैसा प्राप्त करना नहीं। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी यूपीआई के ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ के दुरुपयोग और नकली पेमेंट रिक्वेस्ट को ठगी का सामान्य तरीका बताया है।
एटीएम ठगी में सावधानी जरूरी
एटीएम से जुड़ी ठगी में ठग कार्ड की जानकारी, पिन या ओटीपी हासिल करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में एटीएम मशीन पर अतिरिक्त उपकरण लगाकर कार्ड की जानकारी चुराई जाती है। कभी-कभी ठग फोन पर खुद को बैंक कर्मचारी बताकर कार्ड ब्लॉक होने या खाते में समस्या का बहाना बनाते हैं।
एटीएम का उपयोग करते समय पिन डालते हुए कीपैड को हाथ से ढकना चाहिए। किसी अजनबी को पिन नहीं बताना चाहिए और कार्ड की जानकारी किसी भी फोन कॉल, एसएमएस या वेबसाइट पर दर्ज नहीं करनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि एटीएम कार्ड का नंबर, समाप्ति तिथि, सीवीवी और पिन किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
कम पढ़े-लिखे लोग ज्यादा खतरे में
डिजिटल ठगी का खतरा केवल उन लोगों के लिए नहीं है जो स्मार्टफोन या इंटरनेट का अधिक उपयोग करते हैं। बल्कि जिन लोगों ने औपचारिक शिक्षा कम पाई है या जिन्हें डिजिटल तकनीक की जानकारी कम है, उन्हें ठग आसानी से भ्रमित कर पाते हैं। ऐसे लोग अक्सर यह नहीं समझ पाते कि कौन-सी जानकारी गोपनीय है और किसे देना खतरनाक है।
यह उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता की कमी की समस्या है। इसलिए परिवार, स्कूल, पंचायत, महिला समूह, स्वयंसेवी संस्थाएं और बैंकों को मिलकर सरल भाषा में डिजिटल सुरक्षा की जानकारी देनी चाहिए। बैंकों को ग्राहकों को यह समझाना चाहिए कि पिन, ओटीपी और कार्ड की जानकारी किसी को नहीं देनी है, चाहे सामने वाला खुद को बैंक कर्मचारी ही क्यों न बताए। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, बैंक अधिकारी भी ऐसी जानकारी नहीं मांगते।
ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये कदम
यदि किसी के खाते से अनधिकृत रूप से पैसा निकला है, तो सबसे पहले बैंक को सूचित करना चाहिए। डेबिट कार्ड, यूपीआई और अन्य भुगतान माध्यमों को तुरंत ब्लॉक करवाना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, बिना लेन-देन के डेबिट का संदेश मिलने पर तुरंत बैंक या सेवा प्रदाता को सूचित करना चाहिए, ताकि कार्ड, खाता या वॉलेट ब्लॉक किया जा सके।
इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। यह हेल्पलाइन 24 घंटे उपलब्ध है और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित शिकायत के साथ-साथ जहां संभव हो, धोखाधड़ी वाले लेन-देन को रोकने में मदद करती है। पीड़ित को लेन-देन की स्क्रीनशॉट, एसएमएस, कॉल नंबर, समय और राशि जैसे प्रमाण भी संभालकर रखने चाहिए।
बैंक और सरकार की जिम्मेदारी
डिजिटल ठगी से बचाव के लिए केवल लोगों की सावधानी पर्याप्त नहीं है। बैंकों को ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे ग्राहकों के लिए सरल हिंदी तथा स्थानीय भाषा में जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। बैंक शाखाओं में पोस्टर, घोषणा और कर्मचारियों के माध्यम से लोगों को बताया जाना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति उनसे ओटीपी या पिन नहीं मांग सकता।
सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी डिजिटल ठगी के नए तरीकों पर नियमित जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से नागरिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। साथ ही, संदिग्ध वेबसाइट, फोन नंबर, व्हाट्सएप नंबर, ईमेल आईडी और एसएमएस हेडर की शिकायत भी की जा सकती है।
डिजिटल सुरक्षा के लिए याद रखें
- किसी को ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, पासवर्ड या सीवीवी न बताएं।
- अनजान लिंक, एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश पर क्लिक न करें।
- बैंक अधिकारी बनने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को गोपनीय जानकारी न दें।
- यूपीआई में पैसा लेने के लिए पिन डालने की जरूरत नहीं होती।
- एटीएम पर पिन डालते समय कीपैड को हाथ से ढकें।
- जिन्हें डिजिटल लेन-देन की समझ कम है, वे बैंक शाखा से निकासी-पर्ची का उपयोग करें।
- छोटे लेन-देन में नकद का उपयोग करें, लेकिन बड़ी राशि नकद न रखें।
- धोखाधड़ी होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और 1930 पर शिकायत करें।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
डिजिटल भारत की ओर बढ़ते समाज में तकनीक का उपयोग रोकना संभव नहीं है, लेकिन उसका सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। जब तक हर व्यक्ति को एटीएम, यूपीआई, ओटीपी और ऑनलाइन लेन-देन की बुनियादी समझ नहीं होगी, तब तक साइबर ठग उन्हें निशाना बनाते रहेंगे।
इसलिए जिन लोगों की डिजिटल जानकारी सीमित है, उन्हें जल्दबाजी में डिजिटल भुगतान अपनाने के बजाय बैंक शाखा से निकासी-पर्ची के जरिए पैसा निकालना और छोटे लेन-देन में नकद का उपयोग करना चाहिए। साथ ही, परिवार के युवा सदस्यों को अपने बड़ों और घरेलू कामगारों को डिजिटल सुरक्षा के नियम समझाने चाहिए। डिजिटल भारत तभी सुरक्षित भारत बनेगा, जब हर नागरिक तकनीक का उपयोग समझदारी और सावधानी से करेगा।








