शरीर में जमी गन्दगी कैसे निकाले

यहाँ उपलब्ध वीडियो “https://youtu.be/bu1AOCnfto4?si=VSwEqYlRdVPjC-LO” का हिंदी लेख प्रस्तुत है, जिसमें शरीर की भीतरी सफाई यानी डिटॉक्स को लेकर साप्त्विक (Satvic Movement) विधियों को विस्तार से समझाया गया है। मूल वीडियो के संदेश, सुझाव और विधियों को हिंदी में लेखबद्ध किया गया है, जिससे हर पाठक इसे पढ़कर आसानी से अपनाने के लिए प्रेरित हो सके।youtube


शरीर की भीतरी सफाई: 3 शक्तिशाली उपाय 

मानव शरीर को भीतर से साफ़ करने के लिये आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा में कई पुरानी विधियाँ मौजूद हैं। आजकल उल्टा-सीधा खाना, भागदौड़ भरी दिनचर्या और तनाव के कारण शरीर में विषाक्त पदार्थ (toxins) जमा होते जाते हैं। इन्हीं विषाक्त पदार्थों की वजह से अनेक बीमारियाँ जन्म लेती हैं — मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थाइरॉयड, कोलेस्ट्रॉल, अस्थमा, पीसीओडी, पथरी, त्वचा रोग आदि। साप्त्विक मूवमेंट के अनुसार, यदि शरीर अंदर से पूरी तरह साफ हो जाए, तो बीमारियाँ स्वतः चली जाती हैं और व्यक्ति स्वस्थ, ऊर्जावान और हल्का महसूस करता है।

विषय सूची:

  • भोजन की पाचन-प्रक्रिया और उसके दुष्प्रभाव
  • शरीर में कचरा जमा होने के खतरे
  • डिटॉक्स के 3 उपाय: उपवास, एनिमा और वेट पैक
  • उपवास (इंटरमिटेंट फास्टिंग)
  • एनिमा (आँतों की सफाई)
  • वेट पैक (ठंडी पट्टी)
  • साप्त्विक डाइट प्लान (संक्षिप्त परिचय)
  • निष्कर्ष और सावधानियाँ

भोजन की पाचन-प्रक्रिया और उसके दुष्प्रभाव

हम भोजन करते हैं, वह पेट में जाता है, फिर आंतों में और अंत में शरीर से बाहर निकलता है। लेकिन हर भोजन को पचने और बाहर निकलने में एक-सा समय नहीं लगता।

  • फल: लगभग 3 घंटे में पच और बाहर हो जाते हैं।
  • सब्जियाँ: 6 घंटे तक लगती हैं।
  • अनाज (जैसे गेहूं, चावल, दालें): लगभग 18 घंटे लगते हैं।

ये आँकड़े अनुमानित हैं लेकिन जरूरी हैं यह समझना कि जितना भोजन में पानी कम होता है, उसे पचाना उतना कठिन होता है। कई बार हमारा पिछला भोजन भी हजम नहीं हुआ रहता और हम अगला खा लेते हैं, जिससे वह सड़ने, गलने और सड़ने लगता है। यही सड़न, फफूंद और विषाक्त कणों का कारण बनता है, जो आंत और शरीर के अन्य हिस्सों में जमा होने लगता है।youtube


शरीर में कचरा जमा होने के खतरे

यदि आंतों की दीवारों पर यह कचरा इकट्ठा हो जाये, तो वही दूषित तत्व ब्लड के ज़रिए शरीर के हर हिस्से तक पहुँच जाता है।

  • त्वचा पर जमा हो तो मुंहासे/छाले बनते हैं।
  • किडनी/गॉल ब्लैडर में पत्थर।
  • इंटेस्टाइन में तो कब्ज।
  • खून में तो हाई ब्लड प्रेशर।
  • अंडाशय में पीसीओडी, प्रदर आदि।

यह कचरा यदि समय से न निकाला गया तो शरीर में सुस्ती, मोटापा, बीमारियाँ और लंबी अवधि में कैंसर/ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती हैं। दूसरे शब्दों मे यदि “कचरा निकलेगा तो कमर भी कम होगी!”


डिटॉक्स के 3 उपाय: उपवास, एनिमा और वेट पैक

वक्ता के अनुसार, शरीर को साफ करने के तीन सबसे प्रभावशाली तरीके निम्न है:

1. इंटरमिटेंट फास्टिंग (16 घंटे उपवास)

  • 16 घंटे का उपवास स्वस्थ शरीर के लिए सबसे सरल, प्राकृतिक और शक्तिशाली उपायों में से एक है। मान लीजिए रात 8 बजे खाना खाया, तो अगला ठोस भोजन दोपहर 12 बजे होना चाहिए।
  • इस दौरान नारियल पानी, सब्जी जूस (फ्रूट जूस, चाय, कॉफी, दूध नहीं) लिया जा सकता है।
  • शरीर को पचाने के बजाय मरम्मत (healing hours) के लिए समय मिलता है, जिससे पुराना जाम waste, toxins, extra fat, damaged cells, पथरी, कोशिकाएँ आदि बाहर निकलती हैं।
  • उपवास ना केवल वजन घटाता है, बल्कि पुरानी बीमारियों को जड़ से ठीक करने में भी मददगार है।

2. एनिमा (Enema): आँतों की सफाई

  • केवल मल निष्कासन से यह मान लेना कि आंतें साफ़ हो गई, सही नहीं है; वर्षों का जमा waste आँतों की दीवारों पर जमी परत बना लेता है।
  • एनिमा एक आसान प्रक्रिया है: 200-300 मिली पानी एनिमा पॉट से बड़ी आंत में डाला जाता है, 10 मिनट रोका जाता है, फिर टॉयलेट कर waste बाहर निकाल दिया जाता है।
  • रोज़ाना 3 सप्ताह लगातार, फिर सप्ताह में एक बार अथवा आवश्यकता अनुसार। शरीर बीमार, सर्दी-खांसी, बुखार या पेट दर्द हो तो 2-3 बार भी लिया जा सकता है।
  • इससे परतदार कचरा, विषाक्तता, कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना, सिरदर्द, त्वचा समस्याएँ, सब में राहत मिलती है।

3. वेट पैक (ठंडी पट्टी)

  • कच्चे सफेद कपड़े की पट्टी को ठंडे पानी में भिगोकर पेट के चारो ओर 30-40 मिनट लपेटना होता है, साथ ही गर्दन व माथे पर भी।
  • इससे पेट के अंदरूनी तापमान में भिन्नता आती है, जिससे रक्त प्रवाह बढ़ता है और जमा waste स्थान छोड़ने लगता है।
  • पाचन शक्ति तेज, चर्बी में कमी, गैस-एसिडिटी, सिरदर्द, सर्दी, उल्टी, सिर का भारीपन, माइग्रेन — सभी में लाभकारी।
  • गर्मियों में दिन में दो बार, अन्यथा कम से कम एक बार अवश्य करें। कपड़े के पट्टे के बदले साप्त्विक detox kit भी खरीद सकते हैं।

साप्त्विक डाइट प्लान (संक्षिप्त परिचय)

  • सुबह नारियल पानी या ऐश गार्ड जूस (या कोई मौसमी सब्जी का जूस), फिर ताजे फलों का बड़ा प्लेट, दोपहर में सब्ज़ी के साथ सीमित अनाज (ब्राउन राइस, क्विनोआ, चपाती), रात को सलाद या सूप।
  • अनाज न्यूनतम, सब्जियां व फल अधिकतम।
  • भोजन थोड़ा छोड़े, भूख से थोड़ा कम खाएं।
  • अधिक हेल्दी रेसिपीज के लिये “Satvic Food Book” या संबंधित चैनल देखें।

निष्कर्ष और सावधानियाँ 

  • बीमारियों की जड़ कारण शरीर में जमा waste है – इसे निकालिए तो शरीर स्वयं स्वस्थ्य हो जाएगा।
  • उपरोक्त विधियाँ (फास्टिंग, एनिमा, वेट पैक) नियमित अपनाएँ, लेकिन चिकित्सक की सलाह अवश्य लें, विशेषकर यदि कोई पुरानी स्वास्थ्य समस्या हो या दवाएँ चल रही हों।
  • प्रकृति द्वारा दिए गए शरीर को साफ, ऊर्जावान और स्वस्थ रखना हर किसी का कर्तव्य है।
  • अधिक जानकारी हेतु वीडियो, वेबसाइट या साप्त्विक समुदाय से जुड़ें।

इस प्रकार, तीन चरणों में शरीर के डिटॉक्स के यह उपाय हमारे प्राचीन विज्ञान, माँ प्रकृति व आधुनिक शोधों पर आधारित हैं। सही दिनचर्या, सादा भोजन और नियमित सफाई से हर कोई अपने शरीर को रोगमुक्त और स्वस्थ्य बना सकता है।


यह हिंदी लेख ‘साप्त्विक मूवमेंट’ के बताए अनुसार है और इसमें स्वास्थ्य संबंधी सुझाव सामान्य ज्ञान के लिए हैं। किसी भी नई विधि के आरंभ से पहले चिकित्सकीय सलाह ज़रूर लें।

  1. https://www.youtube.com/watch?v=bu1AOCnfto4

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