माता-पिता अनुचित, निषिद्ध कर्म करनेकी आज्ञा दें तो पुत्रको क्या करना चाहिये ? (EN)

प्रश्न- माता-पिता अनुचित, निषिद्ध कर्म करनेकी आज्ञा दें तो पुत्रको क्या करना चाहिये ?

उत्तर – अनुचित आज्ञा दो तरह की होती है- (१) ‘अमुक को मार दो’ आदि दूसरोंका अनिष्ट करनेकी आज्ञा देना और (२) ‘तुम घर छोड़कर वनमें जाओ’ आदि आज्ञा देना। इनमेंसे दूसरी आज्ञाका तो पालन करना चाहिये, पर पहली आज्ञाका पालन नहीं करना चाहिये। उसमें पिताकी सामर्थ्य देखनी चाहिये। अगर पिता समर्थ हो तो उस आज्ञाका पालन करनेमें कोई हर्ज नहीं है। जैसे, जमदग्निने अपने पुत्र परशुरामजीसे कहा कि तुम्हारी माँ व्यभिचारिणी है और तुम्हारे भाई मेरी आज्ञाका पालन नहीं करते; अतः इनको मार डालो, तो परशुरामजीने उनका गला काट डाला। जमदग्निने प्रसन्न होकर कहा कि तुम वरदान माँगो। परशुरामजीने कहा कि माँ और भाइयोंको जीवित कर दो और उनको मेरे द्वारा मारे जानेकी बात याद न रहे। जमदग्निने ‘तथास्तु’ कहा और सब जीवित हो गये। अगर पिता समर्थ नहीं है और वह अनुचित आज्ञा देता है तो पुत्रको उस आज्ञाका पालन नहीं करना चाहिये। कारण कि अगर पुत्र उस अनुचित आज्ञाका पालन करेगा तो पिताको नरक होगा। जिस आज्ञाके पालनसे पिताको नरक हो, दुःख पाना पड़े, ऐसी आज्ञाका पालन नहीं करना चाहिये। मैं भले ही नरकमें चला जाऊँ, पर पिता नरकमें न जाय – ऐसा भाव होनेसे न पुत्रको नरक होगा और न पिताको। तात्पर्य है कि पिताको नरकसे बचानेके लिये उनकी आज्ञा भंग कर दे, पर अनुचित काम कभी न करे।

अगर पिता समर्थ नहीं है और वह अनुचित आज्ञा देता है, पर पुत्रने उम्रभर माता-पिताकी किसी भी आज्ञाका उल्लंघन नहीं किया है तो पुत्र उस अनुचित आज्ञाके पालनमें जल्दबाजी न करे, उसपर विचार करे और भगवान्को याद करे। जैसे, गौतमने अपने पुत्र चिरकारीसे कहा कि तुम्हारी माँ व्यभिचारिणी है, इसको मार डालो; और ऐसा कहकर वे वनमें चले गये। चिरकारीने तलवार निक और पिताकी आज्ञापर विचार करने लगा। वहाँ गौतमके पिताकी अ विचार आया कि उसको क्यों मारें, उसका त्याग भी तो कर नहीं किय हैं। ऐसा विचार करके वे लौटकर आये तो उन्होंने देखा। चिरकारी हाथमें तलवार लिये खड़ा है; अतः उन्होंने चिरकार जाओ तो मना कर दिया कि माँको मत मारो।

यह लेख गीता प्रेस की मशहूर पुस्तक “गृहस्थ कैसे रहे ?” से लिया गया है. पुस्तक में विचार स्वामी रामसुख जी के है. एक गृहस्थ के लिए यह पुस्तक बहुत मददगार है, गीता प्रेस की वेबसाइट से यह पुस्तक ली जा सकती है. अमेजन और फ्लिप्कार्ट ऑनलाइन साईट पर भी चेक कर सकते है.

  • Related Posts

    न सोना, न क्रिप्टो न सोना, न क्रिप्टो – फाइनेंशियल प्लानर के साथ जीतिए इस असली बाजीगर सेक्टर में

    भारत का healthcare सेक्टर अगले कई दशकों तक तेज़ और स्थिर ग्रोथ दे सकता है, लेकिन सीधे शेयर खरीदकर नहीं, बल्कि अच्छे healthcare म्यूचुअल फंड्स के ज़रिये, किसी सेबी-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल…

    Continue reading
    ₹5,000 की SIP से अमीर बनने का सच—डायरेक्ट फंड का जोख़िम और रजिस्टर्ड एडवाइजर की अहमियत

    ₹5,000 की मंथली SIP वाकई में आपको अमीर बना सकती है, लेकिन इसमें आपकी फंड चॉइस, समय पर बने रहने की आदत, और प्रोफेशनल गाइडेंस का रोल बेहद अहम है।…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    भगवान कहते हैं कर्तव्य करते हुए नाम जप करो पर नाम जप करेंगे तो कर्तव्य कैसे होगा? Bhajan Marg

    भगवान कहते हैं कर्तव्य करते हुए नाम जप करो पर नाम जप करेंगे तो कर्तव्य कैसे होगा? Bhajan Marg

    ऐसी कौन-सी तपस्या करूँ कि जब चाहूँ सूरज उगे और जब चाहूँ सूरज डले

    ऐसी कौन-सी तपस्या करूँ कि जब चाहूँ सूरज उगे और जब चाहूँ सूरज डले

    प्रॉपर्टी में तेजी का फायदा REITs के जरिये रेगुलर इनकम का मौका

    प्रॉपर्टी में तेजी का फायदा REITs के जरिये रेगुलर इनकम  का मौका

    क्या भगवान को भजन समर्पित करने से उसका ब्याज भी मिलेगा? Bhajan Marg

    क्या भगवान को भजन समर्पित करने से उसका ब्याज भी मिलेगा? Bhajan Marg

    2026 में लाखों कमाने वाली स्किल्स : Ankur Warikoo

    2026 में लाखों कमाने वाली स्किल्स : Ankur Warikoo

    इस भक्त ने भोजन क्यों त्याग दिया? गौमाता के लिए अद्भुत त्याग की भावनात्मक कथा

    इस भक्त ने भोजन क्यों त्याग दिया? गौमाता के लिए अद्भुत त्याग की भावनात्मक कथा