संजीव भासिन फ्रंट रनिंग स्कैम: SEBI की बड़ी कार्रवाई और रिटेल निवेशकों के लिए सबक (EN)

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संजीव भासिन: एक भरोसेमंद नाम से घोटालेबाज तक

भारतीय शेयर बाजार में संजीव भासिन का नाम लंबे समय तक एक भरोसेमंद टीवी एक्सपर्ट और निवेश सलाहकार के तौर पर लिया जाता था। Zee Business, ET Now, CNBC Awaaz जैसे बड़े चैनलों पर उनके स्टॉक टिप्स लाखों निवेशकों के लिए मार्गदर्शक माने जाते थे। लेकिन जून 2025 में SEBI ने 149 पेज की अंतरिम ऑर्डर जारी कर भासिन को शेयर बाजार से बैन कर दिया और ₹11.37 करोड़ के फ्रंट रनिंग स्कैम का मास्टरमाइंड घोषित किया।

फ्रंट रनिंग स्कैम क्या है और कैसे हुआ?

फ्रंट रनिंग एक ऐसी धोखाधड़ी है जिसमें कोई इनसाइडर (जैसे रिसर्च एनालिस्ट या ब्रोकिंग फर्म का अधिकारी) पहले खुद शेयर खरीदता है, फिर अपनी साख का इस्तेमाल कर पब्लिक को वही शेयर खरीदने की सलाह देता है। जब आम निवेशक उस शेयर को खरीदते हैं, तो शेयर का दाम बढ़ जाता है। इसके बाद स्कैमर अपने पहले से खरीदे शेयर ऊँचे दाम पर बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं, जबकि आम निवेशक फंस जाते हैं।

संजीव भासिन ने कैसे किया फ्रंट रनिंग?

  • भासिन और उनके नेटवर्क (परिवार के सदस्य, ब्रोकर्स, डीलर्स) ने Gemini Portfolios, Venus Portfolios, HB Stockholdings, Leo Portfolios जैसी शेल कंपनियों के जरिए शेयर खरीदे।

  • टीवी या टेलीग्राम पर उन्हीं शेयरों की सिफारिश की, जिससे रिटेल निवेशकों की भारी खरीदारी शुरू हुई।

  • शेयर के दाम बढ़ते ही उसी नेटवर्क ने अपने शेयर बेच दिए।

  • चार साल (2020-2024) में इस तरीके से ₹11.37 करोड़ का अवैध मुनाफा कमाया गया।

कौन-कौन था इस घोटाले में शामिल?

  • परिवार के सदस्य: लालित भासिन, आशीष कपूर

  • डीलर्स: राजीव कपूर, जगत सिंह, प्रवीण और बबीता गुप्ता

  • शेल कंपनियां: Gemini Portfolios, Venus Portfolios, HB Stockholdings, Leo Portfolios

    इन सभी ने मिलकर अलग-अलग डीमैट अकाउंट्स और ब्रोकिंग फर्म्स के जरिए ट्रेडिंग की, जिससे SEBI को पकड़ना मुश्किल हो जाए। लेकिन 2024 में दिल्ली-NCR में छापेमारी और डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच से पूरा नेटवर्क उजागर हो गया।

    SEBI की कार्रवाई और कानूनी पहलू

    SEBI ने जून 2025 में अंतरिम ऑर्डर जारी कर भासिन को शेयर बाजार से बैन किया, ₹11.37 करोड़ की अवैध कमाई जब्त की और बैंक अकाउंट्स फ्रीज किए। साथ ही, उनके सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनल्स पर भी निगरानी रखी जा रही है। SEBI के मुताबिक, यह केस Securities and Exchange Board of India Act, 1992 और Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices (PFUTP) के कई सेक्शनों का उल्लंघन है।

    रिटेल निवेशकों के लिए सबक

    • ब्लाइंड फॉलोइंग से बचें: सिर्फ टीवी, यूट्यूब या टेलीग्राम पर फेमस किसी भी एक्सपर्ट की सलाह पर बिना जांचे-परखे निवेश न करें।

    • SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर देखें: सलाहकार का SEBI रजिस्ट्रेशन नंबर और ट्रैक रिकॉर्ड जरूर चेक करें।

    • कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट: सलाह देने वाले के पास खुद उस शेयर में पोजीशन है या नहीं, यह जानना जरूरी है।

    • फ्री टिप्स का लालच: फ्री टिप्स के पीछे अक्सर कोई छुपा एजेंडा हो सकता है। खुद सीखें, रिसर्च करें और समझदारी से निवेश करें।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसी होती है कार्रवाई?

    अमेरिका, कनाडा और यूके जैसे देशों में फ्रंट रनिंग के मामलों में सिर्फ आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि जेल तक की सजा होती है। भारत में भी इस केस के बाद उम्मीद की जा रही है कि सख्त कार्रवाई होगी, जिससे ऐसे स्कैम दोबारा न हों।

    निष्कर्ष

    संजीव भासिन का फ्रंट रनिंग स्कैम भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा सबक है। यह केस दिखाता है कि कैसे मीडिया और सोशल मीडिया की ताकत का गलत इस्तेमाल कर रिटेल निवेशकों को फंसाया जा सकता है। SEBI की कार्रवाई से उम्मीद है कि आगे ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी। निवेशकों को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी सलाह को आंख मूंदकर फॉलो करने से बचना चाहिए।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    Q1: क्या संजीव भासिन पर हमेशा के लिए बैन लगा है?A1: अभी SEBI का अंतरिम ऑर्डर है। आगे फाइनल ऑर्डर में और सख्त कार्रवाई हो सकती है1।Q2: फ्रंट रनिंग स्कैम में आम निवेशक कैसे फंसते हैं?A2: जब कोई एक्सपर्ट पहले खुद शेयर खरीदकर बाद में पब्लिक को खरीदने की सलाह देता है, तो आम निवेशक ऊँचे दाम पर फंस जाते हैं।Q3: रिटेल निवेशक क्या करें?A3: खुद रिसर्च करें, SEBI रजिस्टर्ड सलाहकार की सलाह लें, और फ्री टिप्स के चक्कर में न पड़ें।

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