RBI का बड़ा राहत प्रस्ताव: निष्क्रिय बैंक खाते या अनक्लेम्ड डिपॉजिट को सक्रिय/दावा करना अब होगा आसान

RBI ने निष्क्रिय बैंक खातों और अनक्लेम्ड डिपॉजिट को सक्रिय/दावा करने के लिए बड़ा राहत प्रस्ताव रखा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़ा राहत प्रस्ताव रखा है, जिससे निष्क्रिय बैंक खाता (Inoperative Account) या अनक्लेम्ड डिपॉजिट (Unclaimed Deposit) को फिर से सक्रिय करना या उस पर दावा करना अब और आसान हो जाएगा। RBI ने 23 मई 2025 को जारी नोटिफिकेशन में कहा कि अब सभी बैंक शाखाओं (होम और नॉन-होम ब्रांच) में KYC अपडेटेशन की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, ग्राहक की मांग पर वीडियो KYC (V-CIP) की सुविधा भी दी जाएगी, बशर्ते बैंक यह सुविधा देता हो।

प्रमुख बिंदु:

  • KYC अपडेटेशन हर शाखा में: अब निष्क्रिय खाते या अनक्लेम्ड डिपॉजिट को सक्रिय करने के लिए किसी भी शाखा में जाकर KYC अपडेट कराया जा सकता है।

  • वीडियो KYC की सुविधा: ग्राहक चाहें तो वीडियो KYC के जरिए भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, जिससे घर बैठे ही खाता सक्रिय किया जा सकता है।

  • बिजनेस करेस्पॉन्डेंट की मदद: बैंक के अधिकृत बिजनेस करेस्पॉन्डेंट भी खाते को सक्रिय कराने में मदद कर सकते हैं।

  • 10 साल बाद पैसा DEA फंड में: अगर 10 साल या उससे ज्यादा समय तक खाता निष्क्रिय रहता है या डिपॉजिट अनक्लेम्ड रहता है, तो वह पैसा RBI के Depositor Education and Awareness (DEA) फंड में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

अगर खाता निष्क्रिय या डिपॉजिट अनक्लेम्ड रहे तो क्या होगा?

अगर कोई खाता या डिपॉजिट 10 साल या उससे ज्यादा समय तक निष्क्रिय/अनक्लेम्ड रहता है, तो बैंक को वह राशि RBI के DEA फंड में ट्रांसफर करनी होती है। यह प्रक्रिया शेयरों के Investor Education and Protection Fund (IEPF) जैसी है, जहां लंबे समय तक दावा न किए गए शेयर ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

जनता कैसे दे सकती है सुझाव?

RBI ने इस ड्राफ्ट सर्कुलर पर 6 जून 2025 तक जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं। सुझाव RBI की वेबसाइट के ‘Connect 2 Regulate’ सेक्शन में या डाक के जरिए भेजे जा सकते हैं।

निष्कर्ष

RBI का यह प्रस्ताव बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब निष्क्रिय खाते या अनक्लेम्ड डिपॉजिट को सक्रिय करने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी, जिससे लाखों खाताधारकों को अपने पैसों तक आसान पहुंच मिलेगी।

Sources:Economic Times Wealth, 23 May 2025

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