मेरी अयोध्या की यात्रा का अनुभव आपके काम आ सकता है

बीते 12 दिसंबर से 14 दिसंबर के बीच हम अयोध्या धाम में थे और वहां बनारस से पहुंचे थे। हमने बनारस से सुबह वंदे भारत ट्रेन 9:00 बजे पकड़ी और उसने दोपहर 11:30 तक धाम पहुंचा दिया। बनारस स्टेशन पर सुबह 7:30 बजे ही पहुंच गए थे इसलिए वहां आईआरसीटीसी के लॉज में बैठे 1 घंटे का एक आदमी का 95 रुपए चार्ज किया जिसमें एक चाय, कॉपलोकया पानी की बोतल की जा सकती थी। लॉज साफ सुथरा था और टॉयलेट भी ठीक-ठाक था जेंट्स टॉयलेट तो मुझे ठीक लगा लेकिन लेडिस टॉयलेट ज्यादा साफ सुथरा नहीं था। यह मेरी धर्मपत्नी ने बताया। दरअसल इन टॉयलेट बाथरूम में नहाने की व्यवस्था होने की वजह से भी शायद गंदगी होने का एक कारण माना जा सकता है। लोन की फोटो डाल दूंगा आप अंदाजा लगा लेना कि क्या व्यवस्था थी।

हम 11:30 बजे अयोध्या धाम पहुंचे तो वहां होटल वाले ने ई रिक्शा भेज दिया था। हमारे होटल का नाम था होटल राजेंद्र इन। होटल भगवान श्री राम मंदिर के बिल्कुल पीछे एक कॉलोनी में था। होटल की छत से राम मंदिर के पीछे की साइड साफ दिखाई देती थी। हालांकि राम मंदिर के एंट्रेंस तक पहुंचने में लगभग आधा किलोमीटर चलना पड़ता है साथ ही हनुमापनगढ़ कनक भवन और दशरथ महल के लिए भी चलना पड़ेगा। स्टेशन से लेकर होटल तक ई रिक्शा ने ₹100 चार्ज लिया हम तीन सवारी थे। यह होटल का किराया₹1500 था जो की काफी कम था लेकिन होटल पीछे की साइड होने की वजह से और मेन रोड से दूरी होने की वजह से भी यहां ई रिक्शा आदि ट्रांसपोर्ट मिलन मुश्किल था। यहां से आपको अयोध्या के प्रमुख पर्यटन स्थलों में घूमने के लिए पहले से ही ई-रिक्शा बुक करना होगा। जबकि अगर आप थोड़ा पैदल चलकर राम मंदिर के दर्शन करके दूसरे पर्यटन स्थलों पर जाते हैं तो वहां से वापस आने के लिए भी ई रिक्शा मुश्किल से मिलता है। थोड़ा ज्यादा पैसे का ऑफर देने पर ही मानता है।

भगवान राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन की सुविधा बहुत अच्छी बनाई गई है बहुत ज्यादा भीड़ होने के बावजूद दर्शन ठीक-ठाक हो जाते हैं ज्यादा धक्का मुक्की भी नहीं होती सती भगवान राम लाल की मूर्ति विशाल होने की वजह से भी दर्शन आसानी से हो जाते हैं। अगर आप अपने राइट हैंड साइड की लाइनों में लगेंगे तो आपको भगवान के काफी पास से दर्शन होंगे। मंदिर में सिक्योरिटी बहुत टाइट है और होनी भी चाहिए आपको अपने जूते स्मार्ट वॉच रिमोट वाली कर की गाड़ी मोबाइल फोन थैली में जमा करके लॉकर में देने पड़ेंगे लॉकर की चाबी आपको दे दी जाएगी और सामान जमा करने के लिए थैला भी दिया जाएगा सामान जमा करने में 10 से 20 मिनट तो लग जाते हैं शनिवार इतवार ज्यादा भीड़ होती है। हमने दूसरी बार भगवान जी के दर्शन किया तो हम होटल से पैदल ही और नंगे पैर ही दर्शन के लिए गए थे इसलिए लॉकर में सामान जमा करने का समय बच गया। राम मंदिर हनुमानगढ़ दशरथ महल और कनक भवन पास पास में है। सरयू नदी के तट पर जाने के लिए राम मंदिर के में गेट से सरकार की ओर से चलाई गई ₹20 सवारी की दर से फेरी सेवा ली जा सकती है क्योंकि उस रोड पर प्राइवेट ई-रिक्शा नहीं चलता।


सरयू नदी के तट पर बोटिंग और फोटोग्राफी की जा सकती है। सरयू नदी तट से पहले लता मंगेशकर चौक और राम पैड़ी भी आता है। दरअसल अयोध्या धाम अभी विकसित हो रहा है बनारस जैसी बड़े-बड़े बाजार और घूमने के स्थान अभी पूरी तरह से डेवलप नहीं हो पाए हैं लेकिन सरकार ने बहुत कम समय में बहुत ज्यादा विकास करने की कोशिश की है। मल्टीलेवल पार्किंग बड़ी संख्या में बन रही है और कुछ तैयार हो चुकी है। सड़के काफी सपाट और चौड़ी है. रोड चौड़ा करने के लिए कॉलोनी को भी तोड़ने की बात सुनी गई। किसी पुलिसकर्मी से सुना की उस दिन केंद्रीय चुनाव आयुक्त भी अयोध्या में आए थे इसलिए दुकानदारों को अपना सामान दुकान के अंदर ही रखने के लिए कहा गया साथ ही फेरी पटरी वालों को भी हटाने के लिए कहा गया था. सुरक्षा की व्यवस्था कड़ी की गई थी। ज्यादातर वीआइपी मूवमेंट की वजह से राम मंदिर के आसपास की आबादी, दूकानदार, इ रिक्शा पुलिस वालो की रोक टोक से नाखुश दिखे.

हनुमानगढ़ में काफी भीड़ होती है इसलिए कोशिश करें कि सुबह 8:30 से पहले दर्शन कर ले। हम अयोध्या मंदिर से काफी दूर सूर्यकुंड भी देखने गए थे जहां लेजर शो शाम 6:30 और 7:30 पर होता है, बच्चे ज्यादा पसंद करते हैं। हमें अयोध्या में दो राधे रुकना था लेकिन डेढ़ दिन में ही ज्यादातर पर्यटक स्थल ऑन में जाने की वजह से हम वहां से बस करके आ गए। अयोध्या होटल के बिल्कुल अपोजिट प्राइवेट रोडवेज बसें मिलती हैं रेड बस से बस बुक की थी साडे 18 सो रुपए की एक टिकट स्लीपर मिली थी। बस में व्यवस्था तो अच्छी थी लेकिन बस को ऐसे ढाबे पर रोका गया जहां बहुत गंदे टॉयलेट थे और खाना भी खूब खुले में रखा था।

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