बनारस में मेरी यात्रा का अनुभव आपकी यात्रा आसान कर सकता है

मित्रों पिछले 10 दिसंबर से लेकर 12 दिसंबर तक हम बनारस में थे। 10 तारीख को सुबह 6:00 बजे की नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से वंदे भारत एक्सप्रेस पकड़ी थी। यह रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 16 पर आई थी। प्लेटफार्म नंबर 16 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट साइड से पास पड़ता है. पहाड़गंज गेट से बहुत दूर पड़ता है और सीढ़ियां भी पार करनी पड़ती हैं।

वंदे भारत एक्सप्रेस बेस्ट है क्या ?

वंदे भारत एक्सप्रेस नई और मॉडर्नाइज ट्रेन है, लेकिन कार चेयर यानी सीट होने की वजह से 8 घंटे का लंबा रास्ता कमर दर्द और बोझिल कर देता है। इसलिए मुझे लगता है कि रात की स्लीपर ट्रेन की बेहतर रहेगी लेकिन उसके लिए आप कम से कम 3 महीने पहले तो ट्रेन की टिकट बुक करवानी पड़ेगी क्योंकि 15 दिन और 1 महीने पहले टिकट बुक करवाने पर रिज़र्व सीट नहीं मिलती, वेटिंग ही मिलती है। वंदे भारत एक्सप्रेस में सीटों की संख्या ज्यादा होने की वजह से 15-20 दिन पहले भी आसानी से रिजर्वेशन मिल जाता है। हालांकि ट्रेन में यात्रियों का उत्साह देखने लायक था और हर उम्र के यात्री ट्रेन में थे।

कौन सा होटल बेस्ट रहेगा?

मैंने बनारस में बाबा विश्वनाथ जी मंदिर के बिल्कुल पास होटल बुक किया था, होटल का नाम था आदर्श पैलेस। होटल मंदिर के बिल्कुल पास होने का यह फायदा तो है पैदल जाकर आप मंदिर दर्शन कर सकते हैं लेकिन एक घाटा यह भी है कि होटल के आसपास आपको पैदल ही इधर-उधर जाना पड़ेगा क्योंकि वहां रात 10:00 बजे से लेकर सुबह 9:00 बजे तक ही ऑटो या ई रिक्शा चलने की इजाजत दी जाती है बाकी समय बैरिकेडिंग कर दी जाती है और सिर्फ पैदल यात्री ही आ जा सकते हैं इसलिए अगर आपकी ट्रेन दोपहर में आ रही है तो आपको मंदिर के बिल्कुल पास के होटल में जाने के लिए थोड़ा पैदल चलना पड़ेगा क्योंकि ऑटो वाला गोदौलिया चौराहा के पास छोड़ देगा। हमारी ट्रेन बंदे भारत दोपहर 12:00 बजे वाराणसी कैंट जिसे BSB भी कहते हैं, पहुंची थी। होटल वाले ने अपने स्टाफ के दो कर्मचारी भेज दिए थे जहां ऑटो वाला ने हमें ड्रॉप कर दिया था। दोनों कर्मचारियों ने हमारा सामान उठाया और हम उनके साथ होटल की ओर बढ़े, करीब आधा किलोमीटर तो चलना पड़ा।

आदर्श पैलेस होटल एक अच्छा होटल है। कमरे साफ सुथरे थे और टॉयलेट भी साफ था। हमें सबसे पहले रिसेप्शन के पास का कमरा दे दिया। मैंने उन्हें कहा भी रिसेप्शन के पास आमतौर पर शोर सराभा रहता है इसलिए मुझे यहां कमरा मत दो लेकिन उन्होंने कहा सर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी लेकिन वही हुआ जो सोचा था, बहुत शोर सराभा रहा, तो मेरा अगले दिन का भी जो स्टे था, उसके लिए दूसरा कमरा मांगा, उन्होंने बहुत विनम्रता से दूसरा कमरा दे दिया। वह भी डबल बेड के रेट पर ट्रिपल बेड दे दिया, डबल बेड मुझे 2700 रुपए में मिला, ₹2800 उन्होंने मांगे थे, मेरे बारगेन करने पर ₹100 कम कर दिए।

शुरुआत यही से हो

काशी महादेव जी की नगरी है इसलिए शुरुआत भी बाबा विश्वनाथ जी मंदिर से होनी चाहिए। मंदिर परिसर के गेट के साथ ही अधिकृत रैक पर जूते उतारे, गेट नंबर 1 पर मोबाइल फ़ोन जमा करने का काउंटर भी देखा, कोई प्रसाद के दूकान में जूता या सामान जमा कराने की जरुरत नहीं समझीं. वैसे दुकानदार लाकर और जूते रखने की जगह देते है, लेकिन उनसे 100-200 रूपये का प्रसाद लेना पड़ता है. इसके बाद आप वहां बाजारों से घूमते हुए नंदी चौराहे से होते हुए दशाश्वमेध घाट पर शाम की आरती के वक्त जा सकते हैं। भीड़ भाड़ होती है अगर बुजुर्ग नहीं है छोटे बच्चे नहीं है तो जा सकते हैं अगर बुजुर्ग हैं और छोटे बच्चे हैं तो थोड़ा दूर से ही आरती ले लीजिए और खत्म होने से पहले ही वहां से दूर हो जाए क्योंकि आरती खत्म होने के बाद भीड़ का रेला लौटता है।

अगले दिन क्या किया

अगले दिन भैरवनाथ मंदिर से शुरुआत करी, 9:00 बजे से पहले होटल से निकल लिए थे तो साइकिल रिक्शा वहां तक जाने के लिए मिल गया, 200 रूपये लिए। मंदिर में सुबह के समय थोड़ी भीड़ जरूरी थी लेकिन दर्शन जल्दी-जल्दी हो गए। जिस गेट से गए थे वहां चप्पल का मंदिर की ओर से कोई काउंटर नहीं देखा मिला तो प्रसाद की दुकान पर ही चप्पल उतार कर कुछ प्रसाद लेकर दर्शन करने चले गए। रास्ते में पंडित और मांगने वाले आदि कई लोग मिलेंगे, आपको गुस्सा नहीं होना है, चुपचाप अपने दर्शन करने हैं। उसके बाद वहां से संकट मोचन मंदिर चले गए ज्यादातर मंदिर 12:00 बजे तक बंद हो जाते हैं इसलिए 12:00 से पहले मंदिर के दर्शन किए। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन स्मार्ट वॉच आदि ले जाना माना है इसलिए बाहर लाकर की सुविधा है वहां ₹20 देकर लाकर में जमा कर दिया और चाबी ले ली।

फिर वहां से बनारस के मशहूर अस्सी घाट चले गए संकट मोचन मंदिर से अस्सी घाट तक ई रिक्शा वाले ने₹100 लिए, रिक्शा वाले से पूछा गया कि हम नाव के द्वारा अस्सी घाट से दसअश्वमेध घाट जाना चाहते हैं, नाव वाला कितने पैसे लेगा तो उसने बताया 300 से ₹400 सवारी लगा, हमने कहा इससे अच्छा तो हम ई रिक्शा से ही चले जाएंगे वह ₹150 लेगा। ई रिक्शा वाले ने बोला सर बोटिंग का अलग मजा है, हमने कहा पैसा खर्चना भी अलग सजा है। हालांकि घाट पर जाने पर पता चला कि एक बोटिंग वाला ₹100 प्रति सवारी की दर से यात्रियों को कई सारे घाट ले जा रहा है। एक सवा घंटे में सारे घाट घूम लिए और दसअश्वमेध घाट के पास वाले वीर घाट पर उतर गए और वहां से कुछ दूर चल कर वहां की मार्केट पहुंच गए और वहां की मार्केट में खाना खाया। एक रेस्टोरेंट बिना प्याज और लहसुन के खाना देने का दावा कर रहा था, वही खाना खाया।

फिर शाम को वहां से लक्ष्मी साड़ी घर नाम की एक बड़ी दुकान से बनारसी साड़ी खरीदी उसे दुकान दार का दावा था कि उसकी और साथ वाली साड़ी की दुकान जिसका नाम था संतुष्टि देश की जानी-मानी बनारसी साड़ी की दुकान है जहां बेस्ट साड़ी मिलती है। अब साड़ी बेस्ट है या नहीं, कुछ समय उसे करने के बाद ही पता चलेगा।

काशी चाट

शाम को ही नंदी चौक के पास ही बेहद मशहूर काशी चार्ट भंडार पर चाट खाई। चाट खाने वालों की भीड़ बहुत ज्यादा थी, कुछ लोग कह रहे थे कि वीडियो और रील बनाने वालों ने इस चार्ट वाले को बहुत पॉपुलर कर दिया है, हमने भी वहां टमाटर चाट पलक चाट और मिक्स चाट खाई, चाट ओके थी।

विश्वनाथ जी के फिर से दर्शन

होटल के पास विश्वनाथ जी मंदिर होने की वजह से एक बार और दर्शन कर लिए। मंदिर में शाम को 4:00 से 5:00 आम जनता के लिए स्पर्श दर्शन करवाए जाते हैं लेकिन उसमें बहुत भीड़ होती है जिसका नंबर आ गया तो बढ़िया, नहीं तो एक से डेढ़ घंटे में नंबर आता है। ₹250 के VIP दर्शन भी लोग करते हैं लेकिन फ्री और VIP दर्शन में थोड़ी बहुत भीड़ का अंतर हो सकता है लेकिन मुझे दोनों एक जैसे ही लगे क्योंकि VIP दर्शन में भी स्पर्श दर्शन नहीं होते हैं। सुबह में फिर से दर्शन किए। मंदिर परिसर में लगे बड़े-बड़े टीवी स्क्रीन पर कुछ लोग स्पर्श दर्शन करते हुए दिखे। हमने कर्मचारी से पूछा तो उसने बताया कि यह प्रोटोकॉल दर्शन है यानी मंत्री संत्री आदि के द्वारा सिफारिश या जान पहचान वालों को ऐसे दर्शन करा दिए जाते हैं। अब बस इतना ही और कुछ याद आएगी तो आर्टिकल को अपडेट कर दूंगा। राधे-राधे

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