तनिष्क से लेकर रिलायंस तक, क्यों बढ़ रही है पुराने सोने से नए गहने बनाने की दौड़?

भारत में इस बार के त्योहारी मौसम में सोने के पुराने गहनों के बदले नए गहनों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस प्रवृत्ति ने देश के बड़े ज्वैलर्स के लिए सोने के एक्सचेंज (पुराने गहनों के बदले नए गहने लेना) को बिक्री का एक बड़ा हिस्सा बना दिया है।

सोने की कीमतों में भारी वृद्धि

इस साल धनतेरस (18 अक्टूबर) को सोने की कीमतें 10 ग्राम पर 1.34 लाख रुपये (3% जीएसटी सहित) पर पहुंच गईं — पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 69% अधिक। इतनी तेज़ वृद्धि ने उपभोक्ताओं को नया सोना ख़रीदने की बजाय अपने पुराने गहने बदलने के लिए प्रेरित किया।

प्रमुख ज्वैलर्स की रणनीतियाँ

  • टाटा समूह की टाइटन कंपनी (Tanishq) के लिए इस धनतेरस पर लगभग 50% बिक्री पुराने सोने के एक्सचेंज से हुई, जबकि पिछले साल यह 35% थी। कंपनी ने उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए जीरो प्राइस डिडक्शन स्कीम लागू की थी।
  • रिलायंस रिटेल में पिछले वर्ष 22% से बढ़कर अब लगभग एक-तिहाई बिक्री सोना एक्सचेंज से हो रही है।
  • सेंको गोल्ड के अनुसार, उनके एक्सचेंज की हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 45% तक पहुंच गई।

रिलायंस रिटेल के मुख्य वित्त अधिकारी दिनेश तलूजा के अनुसार, “कीमतों में भारी उछाल के कारण बिल की औसत राशि बढ़ी है, लेकिन मात्रा में गिरावट आई है क्योंकि उपभोक्ताओं की ख़रीद क्षमता प्रभावित हुई है।” उनका अनुमान है कि जैसे ही सोने की कीमतें स्थिर होंगी, बिक्री की मात्रा फिर से बढ़ेगी।

क्षेत्रीय प्रभाव और उपभोक्ता प्रवृत्तियाँ

यह प्रवृत्ति मुख्य रूप से पश्चिम, उत्तर और पूर्व भारत में देखने को मिली, जबकि दक्षिण भारत में लोग अभी भी नया सोना खरीदना पसंद कर रहे हैं। देश में प्रतिवर्ष लगभग 800-850 टन सोने की खपत होती है, और उसमें 40% हिस्सा दक्षिण भारत का है।

कल्याण ज्वैलर्स के कार्यकारी निदेशक रमेश कल्याणरमन ने बताया कि इस वर्ष का उत्सवी ख़रीद और पुराने गहनों का एक्सचेंज दक्षिण के बाहर के बाज़ारों से सबसे ज़्यादा रहा।
कोलकाता की सेंको गोल्ड ने बताया कि उपभोक्ताओं ने दुल्हन के आभूषणों के साथ-साथ व्यक्तिगत उपयोग के लिए सोना एक्सचेंज ऑफ़र का लाभ उठाया।

शेयर बाज़ार और उद्योग प्रभाव

टाइटन कंपनी के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में देश का ज्वेलरी कारोबार पिछले वर्ष की तुलना में 19% बढ़ा। यह वृद्धि उच्च कीमतों, प्रमोशनल ऑफर्स और एक्सचेंज स्कीम के कारण हुई। हालांकि खरीदारों की संख्या में मामूली गिरावट आई, लेकिन निवेश और एक्सचेंज ऑफ़र से मांग बढ़ी।

भविष्य का रुझान

त्योहारी सीज़न के बाद सोने की कीमतों में लगभग ₹7,900 प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है, जिससे ज्वेलर्स को उम्मीद है कि शादी के सीज़न में मांग तेज़ी से बढ़ेगी।
ग्लोबल फ़ाइनेंशियल एडवाइज़री कंपनी DeVere Group के सीईओ नाइजल ग्रीन ने कहा, “सोने के बाज़ार में जो तेज़ी देखी गई थी, अब वह एक रुकावट के बाद स्थिर हो रही है — यह बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत है।”

निष्कर्ष

भारत में कुल लगभग 22,000 टन सोना घरेलू उपभोक्ताओं के पास निष्क्रिय पड़ा है। इस साल की आसमान छूती कीमतों ने लोगों को उसी सोने को पुनः उपयोग में लाने के लिए प्रेरित किया है।
त्योहारी दिनों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि भारतीय उपभोक्ता भावनात्मक और निवेश दोनों दृष्टि से सोने के प्रति समान रूप से जुड़े हुए हैं।

इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि भारत में ज्वेलरी उद्योग मूल्य-संवेदनशील होने के बावजूद अत्यंत लचीला और नवाचार-उन्मुख है, जहां एक्सचेंज ऑफ़र और प्रचार योजनाएँ कंपनियों को उपभोक्ताओं से मजबूत संबंध बनाए रखने में सहायक बन रही हैं।

  1. https://economictimes.indiatimes.com/industry/cons-products/fashion-/-cosmetics-/-jewellery/old-ornaments-shine-anew-as-festive-gold-swaps-surge/articleshow/124793694.cms

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