परिवार में लगातार कलह-क्लेश से परेशान हूं। क्या करूं ? (EN)

परिवार में लगातार कलह-क्लेश से परेशान हूं। क्या करूं ?

परिवार में नकारात्मकता और घर में कलह जैसी चीजें हर घर में होती हैं। यह केवल आपके साथ ही नहीं हो रहा है। यह एक सामान्य समस्या है। जब तक शास्त्रों का स्वाध्याय (खुद से पढ़ना), अच्छे आचरण, भगवान के नाम का जप और दूसरों के प्रति सम्मान नहीं होगा तब तक हर घर में कलह बनी रहेगी। माता पिता का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन उनका अनादर किया जा रहा है। कुछ माता पिता भी बच्चों की भावनाओं का आदर नहीं करते।

परिवार में कलह आखिर क्यों होता है ?

जहां हमारे सुख में बाधा आती है, वहीं कलह होती है। हमें स्वयं को शांत करना सीखना चाहिए। हमें स्वयं को शांत करना सीखना चाहिए। यदि हम दूसरों को शांत करने का प्रयास करेंगे तो इससे क्रोध बढ़ेगा और कलह और भी बढ़ेगी। यदि हम स्वयं को शांत करना सीख लें तो कलह से बच सकते हैं। हम कलह को दूर नहीं कर पाते क्योंकि हमारी बुद्धि अशुद्ध होती जा रही है। हमारे युवा जिन गलत आचरणों में उलझ रहे हैं उनके कारण वे आदर्श गृहस्थ नहीं बन पाएंगे। हमारी वृत्ति हमें अनजाने में गलत आचरणों की आदत डाल रही है। आज एक प्रेमी बनाया फिर कुछ दिन बाद ब्रेकअप किया और फिर किसी और के साथ चल दिए। जब हम इन प्रबल प्रवृत्तियों के साथ गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते है तो यह हमें शांति से नहीं रहने देतीं। क्या ऐसा घर कलह से भरा होगा या शांतिपूर्ण होगा ? वह घर केवल अंसतोष से भरा होगा।

मन में कलह

हमारी मांगें और इच्छाएं बढ़ गई हैं और हमारा प्रेम एक जगह केंद्रित नहीं है इसलिए अशांत होना निश्चित है। इन सब से केवल वहीं लोग बच पाते हैं जो धर्म का पालन करते हैं। ऐसे लोग रोज नाम जपते हैं, संतों का सत्संग सुनते हैं और शास्त्रों का स्वाध्याय करते हैं। हमारे बाहर ही नहीं बल्कि हमारे मन में भी कलह मची हुई है। हमारा मन हमें सुखों की ओर खींच रहा है। आप स्वयं जांच करें कि क्या आपका मन अशांत है ?

कलह से मुक्त होने का अर्थ है कि विचारों में टकराव ना होना, कोई इच्छा ना होना। संतुष्ट और आनंदित महसूस करना। लेकिन यह न तो हमारे शरीर के भीतर है और न ही बाहर। यह तभी हो सकता है जब हम धर्म का पालन करें। भगवान की शरण लें, नाम जप करें और सही आचारणों से चलें। यदि हमारा शरीर अशुद्ध रहेगा तो हमारी इंद्रियां और मन अशुद्ध रहेंगे। यदि हमारी इन्द्रियां और मन अशुद्ध रहेंगे तो हमारे विचार अपवित्र रहेंगे। अब जब विचार गंदे होंगे, मन गंदा होगा, इंद्रियां गंदी होंगी और शरीर अशुद्ध होगा, तो हमें शांति और सुख कैसे मिलेगा? तब हमारा स्वभाव चिड़चिड़ा और कटु हो जाएगा।

बच्चों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करें

हमारे हृदय जल रहे हैं। राधा राध जपें और अपने बच्चों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें अच्छे आचरण करने की शिक्षा दें। इससे वे भविष्य में अच्छे गृहस्थ बनेंगे। अन्यथा, सही शिक्षा से वंचित बच्चें अहंकार में फंस जाते हैं। जब माता पिता अपने बच्चों को भजन करना नहीं सिखाते, तो वे शास्त्रों के नियमों का पालन नहीं करते, जिसमें उनमें ईर्ष्या और बेचैनी जैसे अवगुण आ जाते हैं। उनके जीवन में अव्यवस्था पैदा हो जाती है। जीवन को व्यवस्थित रूप से जीने के लिए नाम, जप, शास्त्रों का स्वाध्याय और सत्संग जरूरी है। सभी के हृदय में प्रभु विराजमान है। उनकी पुजा करना भी उतना आवश्यक है। सब में अपने प्रभु को देखते हुए सबकी सेवा करें।

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