अगर हम निरन्तर भगवान् का नाम लेंगे और उन्का चरणामृत लेंगे तो भगवान् आपका अहित होने से बचांगे. हमें यह विश्वाश रखना चाहिए, अगर आपके साथ कोई घटना होती है, तो भी इसमें भगवान् के विधान को स्वीकार करना चाहिए. उनको दोष देना नहीं चाहिए.
सड़क पर घूमने वाले कुत्तों से डरना स्वाभाविक है, लेकिन घबराकर भागना या उन्हें छेड़ना स्थिति को और खतरनाक बना सकता है। सही व्यवहार, बच्चों और बुजुर्गों की ट्रेनिंग, आसपास की सफाई और स्थानीय प्रशासन को शिकायत—इन सभी उपायों से कुत्ते के काटने का जोखिम कम किया जा सकता है।
बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए उन्हें यह सिखाना जरूरी है कि कुत्ता सामने आने पर क्या करना है, किस व्यवहार से बचना है और काटने की स्थिति में तुरंत कौन-से कदम उठाने हैं।
सड़क के कुत्ते कब आक्रामक हो सकते हैं?
हर सड़क का कुत्ता आक्रामक नहीं होता। कुत्ता अक्सर डर, दर्द, भूख, अपने इलाके की रक्षा, अचानक चौंकने या पिल्लों की सुरक्षा के कारण काट सकता है।
निम्न परिस्थितियों में कुत्ते के आक्रामक होने की संभावना बढ़ सकती है:
- कुत्ता खाना खा रहा हो।
- उसके आसपास छोटे पिल्ले हों।
- कुत्ता सो रहा हो या घायल हो।
- कोई व्यक्ति उसे छेड़ रहा हो या पत्थर मार रहा हो।
- बच्चा उसकी पूंछ, कान या मुंह पकड़ने की कोशिश करे।
- कुत्ते के मुंह से खाना या खिलौना छीना जाए।
- कोई व्यक्ति तेज दौड़ता हुआ या बाइक पर तेजी से उसके पास से निकले।
- कुत्तों का झुंड किसी संकरी गली, खाली प्लॉट या कूड़ेदान के पास जमा हो।
कुत्ते का लगातार गुर्राना, दांत दिखाना, शरीर को कड़ा करना, बाल खड़े करना, पूंछ को तनाकर रखना या तेजी से आपकी ओर बढ़ना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।
सामने कुत्ता आ जाए तो क्या करें?
सबसे जरूरी बात है—कुत्ते को देखकर दौड़कर न भागें। भागने पर कुत्ते की पीछा करने की प्रवृत्ति सक्रिय हो सकती है।
कुत्ता सामने आने पर इन बातों का ध्यान रखें:
- वहीं रुक जाएं या अपनी चाल बहुत धीमी कर दें।
- कुत्ते की आंखों में लगातार न घूरें।
- शरीर को थोड़ा बगल की ओर रखें और सीधे उसकी ओर न झुकें।
- हाथों को शरीर के पास रखें।
- चिल्लाएं नहीं और हाथ-पैर तेजी से न चलाएं।
- धीमी और दृढ़ आवाज में “हट”, “नहीं” या “जाओ” कह सकते हैं।
- धीरे-धीरे पीछे हटें, लेकिन पीठ पूरी तरह कुत्ते की ओर न करें।
- किसी गेट, दुकान, कार, दीवार या पेड़ जैसी बाधा के पीछे चले जाएं।
- हाथ में बैग हो तो उसे अपने और कुत्ते के बीच ढाल की तरह रखें।
कुत्ते को पत्थर मारना, लाठी घुमाकर उकसाना या अचानक हाथ उठाना स्थिति को और खराब कर सकता है।
हाथ में डंडा रखना क्यों जरूरी है?
सुबह-शाम टहलने वाले लोगों, बुजुर्गों और सुनसान रास्तों से गुजरने वालों के लिए हाथ में हल्का और मजबूत डंडा रखना एक जरूरी सुरक्षा सावधानी हो सकती है। डंडे का उद्देश्य कुत्ते को मारना नहीं, बल्कि अपने और कुत्ते के बीच दूरी बनाए रखना है।
डंडे का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- डंडे को नीचे की ओर रखें और बिना वजह न घुमाएं।
- कुत्ते को देखते ही उसे मारने के लिए आगे न बढ़ें।
- कुत्ता पास आए तो डंडे को अपने और उसके बीच रखें।
- जरूरत पड़ने पर डंडे से जमीन पर हल्की आवाज करके दूरी बनाने की कोशिश करें।
- डंडे को कुत्ते की आंख, सिर या शरीर पर मारने का प्रयास न करें, जब तक तत्काल आत्मरक्षा की मजबूरी न हो।
- डंडा लेकर कुत्तों के झुंड को घेरने या भगाने की कोशिश न करें।
- छोटे बच्चों को डंडा देकर कुत्तों के पास अकेले न भेजें।
डंडा सुरक्षा का साधन है, कुत्ते को छेड़ने या मारने का लाइसेंस नहीं। किसी जानवर को जानबूझकर उकसाना आपके लिए भी खतरनाक हो सकता है।
अगर कुत्ता दौड़कर आपकी ओर आए
यदि कुत्ता आपकी ओर दौड़ता हुआ आए, तो तुरंत दौड़ना बंद कर दें। अपनी जगह स्थिर खड़े रहें और हाथों को शरीर से सटाकर रखें।
इसके बाद:
- धीरे-धीरे पीछे हटें।
- कुत्ते की आंखों में लगातार न देखें।
- बाइक, स्कूटर, बैग, हेलमेट या छाते को अपने और कुत्ते के बीच रखें।
- किसी दुकान, मकान, सुरक्षा-गार्ड पोस्ट या भीड़ वाली जगह में चले जाएं।
- कुत्ते पर पत्थर फेंकने या पैर मारने की कोशिश न करें।
- कुत्ता सूंघकर चला जाए तो उसके पीछे न जाएं और उसे छूने की कोशिश न करें।
यदि कुत्ता लगातार पीछा कर रहा हो, तो आसपास के लोगों से सहायता मांगें। बच्चों को अपनी ओर बुलाने के बजाय पहले स्वयं सुरक्षित स्थान पर जाएं।
बच्चों को कुत्तों से बचने की ट्रेनिंग कैसे दें?
बच्चों को केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि “कुत्ते से दूर रहो।” उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में सही व्यवहार का अभ्यास कराना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बच्चों को कुत्ते के आसपास शांत रहने, उसे डराने या छेड़ने से बचने और गिर जाने पर अपने शरीर को सुरक्षित रखने की जानकारी दी जानी चाहिए।
बच्चों को ये बातें स्पष्ट रूप से सिखाएं:
- सड़क के किसी भी कुत्ते को बिना बड़े की अनुमति के न छुएं।
- सोते, खाते या पिल्लों के साथ रहने वाले कुत्ते के पास न जाएं।
- कुत्ते की पूंछ, कान या पैर न खींचें।
- कुत्ते के मुंह से गेंद, रोटी या खिलौना न छीनें।
- कुत्ते को पत्थर न मारें और उसे चिढ़ाएं नहीं।
- कुत्ते के सामने तेज दौड़कर न भागें।
- कुत्ते को गले न लगाएं और उसके चेहरे के पास अपना चेहरा न ले जाएं।
- कुत्ते को खाना खिलाना हो तो किसी बड़े व्यक्ति की निगरानी में खिलाएं।
- कुत्तों के झुंड के पास खेलने या साइकिल चलाने से बचें।
- कुत्ता पास आए तो चिल्लाने के बजाय शांत खड़े रहें।
बच्चों को “पेड़ जैसी मुद्रा” सिखाएं
यदि कुत्ता बच्चे के पास आ जाए और वहां से हटने का सुरक्षित रास्ता न हो, तो बच्चे को “पेड़ जैसी मुद्रा” में खड़े रहना सिखाएं:
- दोनों हाथ शरीर के पास रखें।
- सिर थोड़ा नीचे रखें।
- कुत्ते की आंखों में सीधे न देखें।
- चिल्लाएं नहीं।
- हाथ-पैर तेजी से न चलाएं।
- कुत्ते के हटने तक शांत रहें।
माता-पिता घर पर इसका अभ्यास खेल की तरह करा सकते हैं। एक व्यक्ति कहे, “कुत्ता पास आ गया”, और बच्चा बिना चीखे स्थिर खड़े होने का अभ्यास करे।
बच्चा गिर जाए तो क्या करे?
यदि बच्चा कुत्ते से बचते समय गिर जाए, तो उसे पेट के बल या करवट लेकर गोल होकर लेटना चाहिए। दोनों हाथों से चेहरा, कान और गर्दन ढकने चाहिए। उसे चीखने, हाथ-पैर चलाने या कुत्ते को मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
बुजुर्गों को कैसे सुरक्षित रखें?
बुजुर्गों में देखने-सुनने की कमजोरी, धीमी प्रतिक्रिया, चलने में अस्थिरता और गिरने का डर होने के कारण जोखिम अधिक हो सकता है।
बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए:
- बहुत अंधेरे या सुनसान रास्तों पर अकेले न भेजें।
- मुख्य सड़क या रोशनी वाले रास्ते का उपयोग करें।
- हाथ में छोटा डंडा और टॉर्च रखें।
- संभव हो तो किसी साथी के साथ सुबह-शाम टहलने जाएं।
- ईयरफोन लगाकर सड़क पर न चलें।
- कुत्तों के झुंड, कूड़ेदान और खाली प्लॉट से दूरी रखें।
- कुत्ता दिखाई दे तो अचानक मुड़ने या तेज चलने के बजाय धीरे-धीरे रास्ता बदलें।
- कमजोर दृष्टि वाले बुजुर्ग हमेशा पर्याप्त रोशनी वाली सड़क चुनें।
- घर के पास आक्रामक कुत्ते की जानकारी परिवार और पड़ोसियों को दें।
बुजुर्गों को यह समझाना जरूरी है कि डंडे से कुत्ते को मारना नहीं है। डंडे को अपने और कुत्ते के बीच रखकर दूरी बनाए रखनी है।
बाइक, स्कूटर और साइकिल चलाते समय सावधानी
कुत्ते अक्सर तेज गति से चलने वाले दोपहिया वाहनों का पीछा करते हैं। इससे गिरने या सड़क दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
- कुत्ता पीछे दौड़े तो अचानक गति न बढ़ाएं।
- धीरे-धीरे गति कम करें।
- संभव हो तो वाहन रोककर पैर नीचे रखें।
- वाहन को अपने और कुत्ते के बीच ढाल की तरह रखें।
- कुत्ते पर पैर मारने या वाहन से टक्कर लेने की कोशिश न करें।
- बच्चों को कुत्तों के पास साइकिल से तेज निकलने या रेस लगाने से रोकें।
- रात में रोशनी वाले रास्ते का उपयोग करें।
घर और मोहल्ले में कुत्तों की समस्या कैसे कम करें?
कुत्तों का किसी स्थान पर जमा होना अक्सर खुले कूड़े और बचे हुए भोजन से जुड़ा होता है। खुले कूड़ेदान, मांस का कचरा और गीला कचरा कुत्तों को एक जगह आकर्षित करते हैं।
मोहल्ले में ये कदम उठाए जा सकते हैं:
- ढक्कन वाले मजबूत कूड़ेदान का उपयोग करें।
- खुले में भोजन या मांस का कचरा न फेंकें।
- बच्चों के खेलने की जगह के पास कूड़ा जमा न होने दें।
- स्कूल, पार्क और अस्पताल के प्रवेश मार्ग साफ रखें।
- खाली प्लॉट और गलियों में पर्याप्त रोशनी लगवाएं।
- किसी स्थान पर कुत्तों का झुंड जमा हो तो नगर निकाय को लिखित शिकायत दें।
- आक्रामक कुत्ते का स्थान, समय और व्यवहार नोट करें।
- शिकायत के साथ फोटो या वीडियो लें, लेकिन कुत्ते को उकसाकर वीडियो न बनाएं।
भारत में सड़क के कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होती है। Animal Birth Control Rules, 2023 के तहत ऐसे कार्यक्रम मान्यता प्राप्त संस्थाओं और स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित किए जाने हैं।
नगर निगम में शिकायत कैसे करें?
यदि किसी गली या कॉलोनी में लगातार आक्रामक कुत्तों की समस्या है, तो शिकायत को केवल मौखिक न रखें।
इन चरणों का पालन करें:
- नगर निगम या नगर पालिका के शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- हेल्पलाइन पर शिकायत संख्या जरूर प्राप्त करें।
- स्थानीय पार्षद, आरडब्ल्यूए या ग्राम पंचायत को लिखित सूचना दें।
- स्कूल, आंगनवाड़ी या पार्क के पास समस्या हो तो संस्था के प्रमुख को बताएं।
- शिकायत में सही स्थान, समय, कुत्तों की संख्या और घटना का विवरण लिखें।
- काटने की घटना हुई हो तो चिकित्सा रिकॉर्ड और फोटो सुरक्षित रखें।
- कई परिवार प्रभावित हों तो सामूहिक शिकायत करें।
कुत्तों को एक इलाके से पकड़कर दूसरे इलाके में छोड़ना स्थायी समाधान नहीं है। स्थानीय प्रशासन को नसबंदी, टीकाकरण, कूड़ा प्रबंधन, निगरानी और मानव-कुत्ता संघर्ष कम करने की व्यवस्था करनी चाहिए।
कुत्ता काट ले तो तुरंत क्या करें?
कुत्ते के काटने को कभी मामूली न समझें। घाव छोटा दिखे, खरोंच हो या त्वचा पर दांत का हल्का निशान हो, फिर भी डॉक्टर से संपर्क करें।
कुत्ते के काटने या खरोंचने के बाद:
- घाव को बहते पानी और साबुन से कम-से-कम 15 मिनट धोएं।
- घाव पर मिर्च, हल्दी, तेल, मिट्टी, राख या कोई घरेलू लेप न लगाएं।
- घाव को कसकर बंद न करें।
- तुरंत सरकारी अस्पताल, एंटी-रेबीज क्लिनिक या योग्य डॉक्टर के पास जाएं।
- डॉक्टर की सलाह से रेबीज वैक्सीन और जरूरत होने पर इम्युनोग्लोबुलिन लगवाएं।
- टिटनेस के टीके की जरूरत के बारे में डॉक्टर से पूछें।
- काटने वाले कुत्ते को खुद पकड़ने की कोशिश न करें।
- घटना का समय, स्थान और कुत्ते की पहचान संबंधी जानकारी नोट कर लें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन घाव को साबुन और बहते पानी से 15 मिनट धोने तथा शीघ्र चिकित्सा सहायता लेने की सलाह देता है। रेबीज के लक्षण शुरू होने के बाद बीमारी बेहद गंभीर और लगभग हमेशा घातक होती है, लेकिन समय पर उपचार से इसे रोका जा सकता है।[who]
कुत्ता काटने के बाद ये गलतियां न करें
- केवल घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें।
- यह न मानें कि छोटा घाव खतरनाक नहीं हो सकता।
- डॉक्टर की सलाह के बिना टीके बंद न करें।
- घाव पर मिर्च, तेल, चूना, मिट्टी या राख न लगाएं।
- कुत्ते को पकड़ने या उसके मुंह की जांच करने की कोशिश न करें।
- बच्चे को डर के कारण छिपाकर न रखें; उसे शांत तरीके से चिकित्सा केंद्र ले जाएं।
- टीकाकरण की जानकारी मिलने तक इलाज में देरी न करें।
इन गलतियों से बचें
सड़क के कुत्तों से जुड़ी घटनाओं में लोग अक्सर कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिनसे खतरा बढ़ जाता है:
- कुत्ते को देखकर अचानक दौड़ना।
- कुत्तों के झुंड के बीच से निकलना।
- कुत्ते को घेरकर वीडियो बनाना।
- बच्चों को अकेले कुत्तों को खाना खिलाने भेजना।
- घायल या बीमार कुत्ते को हाथ लगाना।
- कुत्ते को छेड़कर उसकी आक्रामकता की जांच करना।
- डंडे का इस्तेमाल मनोरंजन या मारपीट के लिए करना।
- बच्चे और कुत्ते को बिना निगरानी अकेला छोड़ना।
- काटने के बाद अस्पताल जाने में देरी करना।
परिवार के लिए सुरक्षा चेकलिस्ट
घर से निकलने से पहले परिवार इन बातों की जांच कर सकता है:
- क्या रास्ता रोशनी वाला है?
- क्या मोबाइल फोन चार्ज है?
- क्या बुजुर्ग के पास डंडा और टॉर्च है?
- क्या बच्चे को याद है कि कुत्ता देखकर भागना नहीं है?
- क्या रास्ते में कुत्तों का झुंड जमा तो नहीं है?
- क्या परिवार को नजदीकी एंटी-रेबीज केंद्र का पता मालूम है?
- क्या घर के आसपास कूड़ा खुले में तो नहीं पड़ा है?
निष्कर्ष
सड़क के कुत्तों से बचाव के लिए सबसे जरूरी है—शांत रहना, दूरी बनाए रखना, बच्चों और बुजुर्गों को सही ट्रेनिंग देना और कुत्ते को उकसाने से बचना।
सुबह-शाम टहलने वाले लोगों और बुजुर्गों के लिए हाथ में हल्का डंडा रखना एक उपयोगी सुरक्षा सावधानी हो सकती है। हालांकि, डंडे का इस्तेमाल कुत्ते को मारने के लिए नहीं, बल्कि अपने और उसके बीच दूरी बनाए रखने के लिए किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन से नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, कूड़ा प्रबंधन, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और आक्रामक कुत्तों की शिकायत पर कार्रवाई की मांग करना पूरे मोहल्ले की जिम्मेदारी है। सही जानकारी और सावधानी अपनाकर इंसानों और जानवरों के बीच संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।







