विवाहित जीवन में ब्रह्मचर्य कैसे रहे ? How to remain celibate in married life?

विवाहित जीवन में ब्रह्मचर्य कैसे रहे ?

ये साधक जो अपनी दिनचर्या ठीक नहीं रखते, ये उनके जीवन के लिए बहुत हानिकारक विषय है.

हमारे लिए जितना नामजप आवश्यक है, उतना प्राणायाम आवश्यक है। उतना व्यायाम आवश्यक है। उतना टहलना आवश्यक है। उतना सोना आवश्यक है। उतने सात्विक आहार आवश्यक है। ये बिल्कुल ध्यान रखें। हम आए दिन देखते हैं ना ये बीमारी, वो बीमारी, ये परेशानी वो परेशानी तो सबसे पहली बात है। हम जब कहते हैं तो कोई समझ नहीं रहा ब्रह्मचर्य की रक्षा की जाए।

ब्रह्मचर्य बहुत बडा अमृतत्व है। ये मूर्खता के कारण लोग इसे ध्यान नहीं देते हैं। एक ने तो कहा कि संसार में यही सुख है।

हम भाई तुम्हें सुखी करने के लिए कह रहे दुखी करने के लिए तो नहीं कह रहे ना। हम तुम्हारे दुश्मन नहीं है, तुम्हारे मित्र है। तुम्हारा मन तुम्हे गलत रास्ता दिखा सकता है, लेकिन हम तुम्हें गलत रास्ता नहीं दिखा रहे हैं। तुम ग्रहस्थ हो तो संयम से चलो।

गृहस्ती में आप सोचो आप रात दिन पशुता का व्यवहार करके मलिन मन के द्वारा शांति प्राप्त करना चाहते हो, आनंद की अनुभूति करना चाहते हो। यह कैसे हो सकता है, आप अभी बीमार हो इसलिए तुम्हे आज यह व्यवस्था समझ में नहीं आ रही लेकिन ये तुम्हारी आदत तुमको कल कहाँ पहुँचा देगी तुम्हें पता नहीं. जब पहुँच जाओगे तब कोई रास्ता नहीं। कितने ऐसे बच्चे हैं जो इस बात में दुखी है कि मैं क्या करूँ, आत्महत्या कर लूँ। ऐसे कितने प्रश्न ऐसे आते हैं कि क्या मैं आत्महत्या कर लूँ, देखो पहुँचा दिया या आपके मन ने वहाँ पहुँचा दिया जो अंतिम दुर्गति का केंद्र है।

यदि आप ग्रहस्थ है तो पाँच बजे तक उठ जाए। इतनी छूट मान लो आप रात्रि में ग्यारह साढे ग्यारह बजे बारह बजे सोते हैं तो पाँच घंटे अगर. आप दिन में नहीं सोते तो छह बजे तक उठ जाए. उस समय सूर्य उदय होता है. अगर सूर्य उदय के बाद आप सो रहे है तो चाहे ग्रहस्थ हो या विरक्त आप बिल्कुल नष्ट हो जायेंगे। आपकी आयु नष्ट होगी। आपकी बुद्धि भ्रष्ट होगी। आप ब्रह्मचर्य रह ही नहीं सकते।

कुछ कह देते है कि ब्रह्मचर्य की क्या जरूरत। सच्ची मानिए, अगर आप ग्रहस्त है दो महीने ब्रह्मचर्य रहिये। दो महीने केवल और फिर आप देखिए आपको कैसा लगता है और उस ब्रह्मचर्य से युक्त होकर फिर संतान उत्पन्न करे कि आप देखिए वो संतान कैसी तेजस्वी होगी.

आप उसको समझिए आप जिसे बिल्कुल साधारण बात समझ रहे हैं। आप समझ रहे हैं आपको छूट मिल गई तो सावधान, कुछ दिनों बाद आप ऐसे ऐसे रोगों से ग्रसित हो जाएंगे की आप चलने लायक नहीं होंगे। आप खुद देख लीजिएगा। कुछ दिन बाद ऐसी आपकी इंद्रियां हो जाएगी कि साधारण बातों में आप ब्रह्मचर्य रहित हो जाएंगे। सोच में ब्रह्मचर्य रहित हो जाएँगे। साधारण घर्षण में आप ब्रह्मचर्य हो जायेंगे। ऐसी स्थितियां आती है जिनमें मतलब कितनी दुर्दशा होती है, चाहे वो स्त्री शरीर चाहे पुरुष। शरीर ऐसा नहीं कि केवल ब्रह्मचर्य पुरुष शरीर के लिए, दोनों के लिए ब्रह्मचर्य। अगर आप गलतियों से युक्त हो जाएंगे तो स्त्रियों में ऐसे रोग हो जाते हैं जिनके कारण को चलना फिरना मुश्किल हो जाता है। उनके शरीर की पूरी स्थिति बिगड़ जाती है।

ब्रह्मचर्य दोनों के लिए आवश्यक हैं। कुछ लोग प्रश्न करते हैं कि गृहस्थाश्रम में ब्रह्मचर्य का अस्तित्व नहीं। आप देख लो अगर साल दो साल में आँखों से कम ना दिखाई देने लगे तो बताना अगर घुटने दर्द करे। कमर दर्द करे। चलने पर आपको चक्कर आने लगे। आप खुद देखना एक शरीर है उसकी एक नियत क्षमता है आप उसके अनुसार ही काम कर सकते है. ग्रहस्थ का मतलब ऐसा थोडी है कि तुम्हें लाइसेंस मिल गया है. तुम मनमानी गंदे आचरण करो और तुम स्वस्थ शरीर कैसे रहोगे. तुम्हारा शरीर कोई सोने चांदी का थोडी बना है। सोने चांदी को भी घिसोगे तो पतला हो जाएगा, वह नष्ट हो जाएगा। किसी भी चीज को इसका एक संयम है।

देखो हमने शास्त्रों में भी पढा है. जब भगवान गरुण जी की उत्पत्ति करने का संकल्प हुआ ना कश्यप जी को तो दस हजार वर्ष तक ब्रह्मचर्य रहे और फिर जब माता विनता के गर्भ धारण हुआ तो अरुण और गरुड जैसे महापुरुष पैदा हुए। अगर आप पाँच वर्ष ब्रह्मचर्य रहे, केवल इसलिए की जो हमारी संतान हो वो बहुत देशभक्त, हरिभक्त, बलवान, विद्वान, ज्ञानवान हो तो आप नियम से दोनों (पति पत्नी) भजन करो और पाँच वर्षों बाद गर्भाधान करके संतान उत्पत्ति के शास्त्र सिद्धांत अगर वो महापुरुष ना पैदा हो तो बताना।

अब ये खान पान ठीक नहीं। आचरण ठीक नहीं। पवित्रा नहीं हो। एक किसान भी खेती को सुरक्षित और तैयार करता है तो उसमें अच्छी फसल होती है। तुमने ब्रह्मचर्य को जाना ही नहीं। इधर उधर से हर तरह से भ्रष्टाचरण संतान कैसे हुई? अब देखो हंसी मजाक की बात है। हम देखा गोदी में चश्मा लगा है। गोदी में है,शुगर है पाँच सौ अब बोलो इनको जवानी आएगी। कभी क्या हुआ ये गलतियां हो गई।

संयम बर्ताव नहीं किया गया। वीर्य में वो सामर्थ्य है कि संतान को तेजस्वी ओजस्वी बना सके। हम कहते हैं तुम ब्रह्मचर्य रहो, हस्तमैथुन मत करो, गंदे आचरण मत करो, गंदे विचार मत करो। ये ब्याह की जो एक प्रक्रिया है, आपको एक सीमित बांधने के लिए है कि आप भ्रष्टाचरण ना करें। आप धर्म से युक्त होकर भगवत मार्ग में चले, आराधना करते एक आराधक की तरह एक संयमित जीवन व्यतीत करें।

लेकिन वो माना जाता है कि बाबा लोग हैं। कुछ लोग कहते पहले खुद को देख लो बाबा लोग जेल में एक खेती में सब फसल एक जैसी नहीं होती। गन्ने की फसल में भी अलग अलग क्वालिटी होती है। आलू की भी कई क्वालिटी होती है। ऐसे अलग अलग वृत्ति है। अलग अलग भाव है तो हमारी बात को आज अगर नहीं मानोगे तो कल तुम्हें पछताना पडेगा। पक्का समझ लीजिए संयम से चलो.

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