दिवाली पर हर घर में कुछ ज्यादा ही खर्चा हो जाता है। लेकिन फिर भी पूरे साल हाथ तंग करने के बाद दिवाली के दिन मीडिल क्लास खर्च करने में थोड़ा हाथ खोल ही देता है। वहीं जिसके पास कैष फ्लो ठीक ठाक है तो उसकी बात ही अलग है। उसको खर्च की चिंता कहां। लेकिन मध्यम वर्ग चाहे निम्न हो या उच्च। यानी लोअर और अपर। आय लिमिटेड होने की वजह से कुछ सावधानी से चलना पड़ता ही है।
अगर दिवाली पर खर्च के अलावा बचाने की थोड़ी सी गुंजाइष हो जाए तो आने वाली दीवालियां बेहतर बन सकती है। बचाने से मतलब है पैसे की बचत करना। अब आप कहेंगे, बच ही कहां रहा है जो बचत करेंगे। तो मेरा कहना है कि ऐसा सोचेंगे तो बचत के बड़े मजे से चूक जाएंगे।
ज्यादा नही ंतो 500-1000 रूपए महीना से ही षुरू कर लें। इसे 5, 10 या उससे ज्यादा तक कर सकते है तो बहुत अच्छा है। वैसे अपनी आय का कितना बचत करें तो प्रचलित नियम कहता है कि अपनी आय का 30 फीसदी हिस्सा बचत के लिए लगाना चाहिए। हर महीने बचत के लिए म्युचुअल फंड में एसआईपी से बेहतर कुछ नहीं है।
7 साल से ज्यादा की अवधि के लिए बेहतर है फ्लैक्सी फंड में एसआईपी कर लें। अगर हर महीने 1000 रूपए करते है तो 12 फीसदी रिटर्न की रेट को मानकर चले तो 7 साल में आपके 84000, 1,28,000 रूपए हो सकते है। 1000 रकम से भी षुरू करो तो एक लाख से ऊपर की रकम बन रही है। अगर ज्यादा रकम लगाओंगे तो ज्यादा रकम बन सकती है। जैसे हर महीने एक लाख रूपए की एसआईपी करेंगे तो आपका निवेष 84 लाख का होगा और यह एक करोड़ 28 लाख हो जाएगे। अब आप कहेंगे कि एक लाख तो बड़ी रकम है। अरे आप की जितनी क्षमता हो उतनी लगाओ। पर लगाओ जरूर। कोई भी ऐसाी कोई संपत्ति नहीं है जहां थोड़ी थोड़ी रकम लगाकर इतनी बड़ी दौलत बन सकती है। रियल इस्टेट कभी हर महीने 1 लाख रूपए देकर नहीं खरीदा जा सकता। लोन पर ईएमआई लगाकर प्रॉपर्टी खरीदोंगे तो कुछ रकम तो एकमुष्त करनी ही पड़ेगी। पर एसआईपी में कोई डाउन पेंमेंट करना अनिवार्य नहीं है। अगर आपके पास इकट्ठा पैसा पड़ा है तो लगा सकते है। उसका फायदा ही होगा। और ज्यादा पैसे बनेंगे। 7 साल से ऊपर के समय के लिए एसआईपी ष्षुरू करेंगे तो कमाई की संभावना ज्यादा होती हैं। कई म्युचुयअल फंड का रिकॉर्ड ऐसा देखा गया है। कम समय में जोखिम ज्यादा होता है। षेयर बाजार ऊपर नीचे होता है। तो षुरू करे। देर करने का कोई फायदा नहीं है।







