नाम जपने की महिमा पढ़ो और मानो, कभी अकेले नहीं पड़ोंगे Read the glory of chanting the Lord’s name, you will never be alone (EN)

नाम जपने की महिमा पढ़ो और मानो कभी अकेले नहीं पड़ोंगे

जय श्री राधा जय श्री कृष्ण

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हमने ‘नाम जपने वालो को ऐसा सोचना अपने हाथों अपने गले पर छुरी चलाना है’ आर्टिकल ( https://kaisechale.com/-to-think-of-someone-chanting-gods-name-like-this-is-to-put-a-knife-to-ones-own-throat ) ‘सत्संग के बिखरे मोती’ पुस्तक की प्रथम माला से पाठ शुरू किया था. आज आगे की कर्म संख्या से आगे के उपदेश लिखे गए है.

श्री भाई जी (हनुमानप्रसादजी पोद्दार)- के दैनिक सत्संग में से लिखे नोट्स को गीता प्रेस की ओर से ‘सत्संग के बिखरे मोती’ पुस्तक में पेश किया गया है. इससे आपको बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा.

सत्संग के बिखरे मोती

प्रथम माला

१०. आलस्य और तर्क – ये दो नाम जाप में बाधक है.

११ प्राय: आलस्य के कारण ही कह बैठते हो कि नाम-जप होता नहीं.

१२. अभ्यास बना लो, नाम लेने की आदत डाल लो.

१३. ‘नाम लेत भाव सिन्धु सुखाहीं’ इस पर श्रद्धा करो. इस विश्वास को दृढ करो.

१४. कंजूस की भांति नाम को संभालो.

१५. निश्चय समझो- नाम के बल से बिना ही परिश्रम भवसागर से तर जाओगे और भगवान के प्रेम को भी प्राप्त कर लोगे.

१६. भगवान नित्य हमारे पास है; अत्यंत समीप हैं. एकांत कोठरी में जहाँ कोई भी घुस नहीं सकता, वहां भी साथ हैं. ऐसे भगवान आश्रय लेते ही आश्रय दे देते हैं.

१७. भगवान के बल से सभी कुछ संभव है, सभी विपत्तियाँ हट सकती हैं. सारी लंका जल गई पर हनुमान जी कि पूँछ नहीं जली; क्योंकि सीता मैया ने पूँछ नहीं जलने का संकल्प जो कर लिया था. हनुमान जी को गर्मी का अनुभव नहीं हुआ.

१८. आधुनिक जगत के बहुत से लोग कहेंगे, यह बनावटी बात है, पर निश्चय मानो, भगवान का आश्रय होने पर पूँछ में आग लगकर भी पूँछ न जले, यह सर्वथा संभव है. अवश्य ही सच्चा भक्त अपनी ओर से इस प्रकार के चमत्कार की इच्छा नहीं रखता. हमलोग तो मामूली अनिष्ट के भी टल जाने की चाह कर बैठते हैं.

१९. निरंतर भगवान का नाम लो, कीर्तन करो. मेरे विचार से सर्वोत्तम साधन यही है.

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