सरकारी अधिकारी ने 6 साल की बच्ची और बकरी से क्यों की दरिंदगी (EN)

सरकारी अधिकारी ने 6 साल की बच्ची और बकरी से क्यों की दरिंदगी

श्री हित प्रेमानन्द गोविन्द शरण जी महाराज, श्री धाम वृन्दावन सच ही कहते है कि जो व्यक्ति बच्चियों के साथ दरिंदगी करता है तो वे तो राक्षस ही होगा। दरअसल, मुझे लगता है कि हमें इस घटना के पीछे के कारणों को जानने की कोशिश करनी चाहिए। हम सब को एक एक व्यक्ति को सोचना चाहिए कि आखिर इंसान इतनी ज्यादा हरकत कैसे कर देता है।

अभी कुछ दिन पहले ही मैंने ट्वीटर पर देखा कि एक बहुत बुजुर्ग व्यक्ति को पीछे से एक महिला को बार बार छूने की कोशिश कर रहा था। ऐसे ही कई मामले है जहां बच्चे, जवान से लेकर बुजुर्ग गंदी हरकतें कर रहे है। ट्वीटर पर ही देखा है कि एक ससुर ने अपने अपनी बहू से शादी कर ली। एक लड़की ने अपनी मामी या चाची से शादी कर ली। मैं इन सब घटनाओं को एक अपराध की श्रेणी में नहीं मान रहा हूं। बल्कि यह जानने की कोशिश कर रहा हूं कि आखिर ऐसे कांड हो क्यों रहे है।

घटनाओं के पीछे का सच

महाराज जी के नियमित सत्संग सुन कर मुझे यही समझ आता है कि हमारा दिमाग बस अब भोगने के बारे में ही सोचता है। हमें अपने इस जीवन का ध्येय सिर्फ भोगना ही मान लिया है। यह सब अध्यात्म की कमी से हो रहा है। हम भगवान का नियमित भजन नही कर रहे है। हमने स्कूल कॉलेज की किताबें तो बहुत पढ़ ली है लेकिन अध्यात्म और शास्त्रों को पढ़ा नहीं है।

हमनें श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, भक्तमाल आदि ग्रंथ नहीं पढ़े है। इन ग्रंथों को नियमित रूप से पढ़ना चाहिए। हमने अपने महान संतों की वाणी को सुना नहीं है। नियमित सत्संग नहीं किया है। हम बस सोचते है कि बाबाओं के चक्कर में पड़ने का कोई फायदा नहीं है। यह सब हमारा शोषण करते है। इस बारे में महाराज जी कहते है कि नकली नोट इसलिए बना है क्योंकि असली नोट भी है। असली का ही नकली बना है। इसलिए भगवान से मांगे कि वह उन्हें असली संत गुरू से मिलवाए, भगवान उसकी इच्छा पूरी कर देंगे।

अब यह जो व्यक्ति जिसने एक बच्ची और बकरी से बलात्कार किया वो सरकारी अधिकारी था, ग्रेजुएट तक तो जरूर पढ़ा होगा। लेकिन अध्यात्म की कमी की वजह से ही उसका दिमाग भ्रष्ट हो गया। हम भगवान के भजन करने के नाम पर पर सुब शाम धूप बत्ती अगरबत्ती जला लेते है। हमनें गीता जी और रामायण सिर्फ टीवी पर मनोरंजन के लिए देख ली है और भूल गए है लेकिन इसका अध्ययन नहीं किया। हमने भगवान श्रीराम के चरित्र को समझा ही नहीं। हमनें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से कुछ सीखा नहीं। इन लीलाओं के पीछे छिपे संदेश को जानने की कोशिश ही नहीं की और सतों का संग नहीं किया, क्योंकि संत ही अपने संत्संग से भगवान की लीलाओं के पीछे छिपे संदेश को लोगों तक पहुंचाने का सामर्थ रखते हैं।

अगर हम सब एक एक व्यक्ति आज से ही भगवान का भजन करें। भगवान के नाम का निरंतर जप करें। साथ ही सत्संग और शास्त्राध्याय नियमित रूप से करें तो एक समय बाद आपका मन शांत हो जाएगा। आपका मन इधर उधर नहीं भागेगा। आपके अंदर विवेक पैदा हो जाएगा जो आपके मन को काबू रखेगा और गंदी चीजों में भागने नहीं देगा। महान संत हनुमान प्रसाद पोद्दार जी कहते है कि इस जीवन का असली उद्देश्य भगवान को हासिल करना है। संत जी की इस बात को गाँठ बाँध ले.

हम अगर भगवान का नियमित भजन करें और साथ ही सत्संग और शास्त्राध्याय करें। तो हम सुधार जाएंगे। ऐसा करने से हमें जीना आ जाएगा। हमें सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक क्या क्या धर्म के अनुसार करना है, यह सब पता लग जाएगा। हमारे संत और शास्त्र छोटी से बड़ी चीजें सिखाते है। सुबह कितने बजे उठना है, उसके बाद क्या करना है, हमें अपने परिजनों से कैसे बात करनी है। उनके साथ कैसे रिश्ता निभाना है। क्या खाना पीना है। कैसे उठना बैठना है। अपना काम कैसे करना है। हमें गृहस्थ जीवन में क्या सावधानियां बरतनी है। ब्रह्चर्य कैसे खंडित नहीं करना है। यह सब बातें आइआइटी और आइआइएम नहीं सिखाएंगे। हमें पता लगा जाएगा कि हमें कपडे कैसे पहनने है। आजकल सुविधा कम्फर्ट के नाम पर घर बाहर ऐसे कपड़े पहन रहे है जिससे बुद्धि भ्रष्ट हो सकती है। हम नहीं समझ पा रहे कि हम होटलों रेस्तरां में ऐसा खाना खा रहे है जिससे हमारा मन और बुद्धि हमारे काबू में नहीं रह पा रही है। हम कुछ मिनटों के चस्के और स्वाद के लिए अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर रहे है। इससे ज्यादा और कुछ नहीं लिखूंगा। उम्मीद है कि आप मेरी बात समझ गए होंगे। धन्यवाद जय श्री राधे जय श्री कृष्ण

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