इस भक्त ने भोजन क्यों त्याग दिया? गौमाता के लिए अद्भुत त्याग की भावनात्मक कथा

इस भक्त ने भोजन त्यागा, क्योंकि उसके अंतर्मन में गौमाता की पीड़ा और उत्तर प्रदेश व देश में हो रही गौहत्या के विरुद्ध गहरा आक्रोश और विरक्ति जन्म ले चुकी थी।[youtube]​

संकल्प का कारण

  • भक्त ने देखा कि योगी जी की 9 साल की सरकार होने के बाद भी उत्तर प्रदेश में गौमाता कट रही है, इससे उसका हृदय कराह उठा।[youtube]​
  • उसे लगा कि जब संत‑महात्मा, मंदिर, धर्मस्थल सब हैं, फिर भी गौहत्या रुक नहीं रही, तो कहीं न कहीं यह सनातन समाज का भी दुर्भाग्य है।[youtube]​

व्रत का भाव और त्याग

  • भक्त ने बालाजी के चरणों में संकल्प लिया कि जब तक गौहत्या बंद न हो, और गौमाता को सच्चा “माता” का सम्मान न मिले, तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेगा।[youtube]​
  • तीन महीने तक उसने भोजन त्याग दिया, रोटी से दूरी बना ली, ताकि उसके त्याग की अग्नि से समाज की सोई हुई संवेदना जाग उठे।[youtube]​

मासूम हृदय, प्रबल सनातनी भावना

  • यह संकल्प किसी बड़े नेता या साधु ने नहीं, बल्कि एक साधारण, कष्टों से घिरे बालक ने लिया, जिसकी सनातनी भावना किसी पर्वत से भी अधिक अडिग थी।[youtube]​
  • भीतर से टूटा हुआ यह बालक, बाहर से गौमाता के लिए ऐसा प्रहरी बन गया कि अपनी भूख, अपना शरीर, सब कुछ धर्म की वेदी पर अर्पित कर दिया।[youtube]​

महाराज जी की समझाइश और करुणा

  • श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी ने प्रेम से समझाया कि यह संकल्प योगी जी या सरकार तक पहुँचा भी नहीं, और तुम अन्न के बिना रहकर अपने शरीर को कष्ट दे रहे हो, यह उचित नहीं।[youtube]​
  • उन्होंने निवेदन किया कि प्रसाद रूप में भोजन पुनः प्रारंभ करो, क्योंकि गौसेवा और गौ रक्षा त्याग से अधिक, संगठित प्रयास और जागरण से होती है।[youtube]​

गौमाता, सरकार और समाज की जिम्मेदारी

  • प्रवचन में स्पष्ट कहा गया कि देश का कोई भी संत ऐसा नहीं जो गौहत्या चाहता हो; सभी गौमाता की रक्षा के पक्ष में हैं, परन्तु सरकारी तंत्र की निष्क्रियता अत्यंत दुखद है।youtube+1
  • महाराज जी ने folded हाथों से प्रार्थना की कि सरकार मांस‑मदिरा और गौहत्या को बंद करे, क्योंकि इससे बच्चों का भविष्य और प्रदेश का भाग्य दोनों अंधकारमय हो रहे हैं।[youtube]​

भक्त के त्याग का संदेश (भावनात्मक निष्कर्ष)

  • इस भक्त का भोजन त्याग, केवल व्यक्तिगत व्रत नहीं, बल्कि मौन चीत्कार है – “हे समाज! जागो, गौमाता की रक्षा करो, नहीं तो हमारा धर्म, हमारी संतति, हमारा भविष्य सब सूख जाएगा।”[youtube]​
  • उसका तपस्वी संकल्प हमें याद दिलाता है कि जब एक छोटा भक्त अपनी भूख कुर्बान कर सकता है, तो क्या हम थोड़ा स्वार्थ, थोड़ा आलस्य, थोड़ा डर त्यागकर गौसेवा और धर्मरक्षा के लिए आगे नहीं बढ़ सकते?[youtube]​

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