माता-पिता की सेवा से क्या लाभ है?

प्रश्न- माता-पिताकी सेवा से क्या लाभ है?

उत्तर- माता-पिताकी सेवासे लोक-परलोक दोनों सुधरते हैं, भगवान् प्रसन्न होते हैं। जो माता-पिताकी सेवा नहीं करते, उनपर भगवान् विश्वास नहीं करते कि यह अपने माँ-बापकी भी सेवा, भक्ति नहीं करता तो फिर मेरी भक्ति कहाँतक करेगा !

पुण्डरीकने तन-मनसे तत्परतापूर्वक माता-पिता की सेवा की। उसकी सेवासे प्रसन्न होकर भगवान् बिना बुलाये ही पुण्डरीकके घर आ गये और बोले- ‘पुण्डरीक ! तेरी माता-पिताकी भक्तिसे प्रसन्न होकर मैं स्वयं तेरे पास तेरेको दर्शन देने आया हूँ।’ पुण्डरीक उस समय माता-पिताकी सेवामें लगे हुए थे; अतः वे भगवान्से बोले- ‘माता-पिताकी जिस सेवाके कारण आप यहाँ मुझे दर्शन देने आये हैं, उस सेवाको मैं क्यों छोड़ें? अभी मैं माता-पिताकी सेवामें लगा हुआ हूँ; सेवा पूरी होनेपर ही मैं आपके दर्शन कर सकता हूँ; तब तक आप रुकना चाहें तो इन पुण्डरीकने दो ईंटें ईंटोंपर खड़े हो जायें।’ ऐसा कहन पीठके पीछे फेंक दीं। भगवान् उनपर खड़े गये। ईंटोंपर खड़े होनेके कारण भगवान्‌का नाम ‘विट्ठल’ गया। भगवान्‌के इस रूपका कोई दर्शन करना चाहे तो पण्डा (महाराष्ट्र) में कर सकता है। इसी प्रकार महाभारतमें चाण्डालकी बात आती है। मूक चाण्डालकी माता-पितामें भी देखकर स्वयं भगवान् उसके घरपर रहते थे! तात्पर्य है कि पिताकी सेवासे लौकिक-पारलौकिक सब तरहके लाभ होते है।

यह लेख गीता प्रेस की मशहूर पुस्तक “गृहस्थ कैसे रहे ?” से लिया गया है. पुस्तक में विचार स्वामी रामसुख जी के है. एक गृहस्थ के लिए यह पुस्तक बहुत मददगार है, गीता प्रेस की वेबसाइट से यह पुस्तक ली जा सकती है. अमेजन और फ्लिप्कार्ट ऑनलाइन साईट पर भी चेक कर सकते है.

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