बैंक लोन रिजेक्ट होने पर MahaRERA ने Lodha Developers को बुकिंग अमाउंट ब्याज सहित लौटाने का आदेश: जानिए पूरा मामला (EN)

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भूमिका: रियल एस्टेट में भरोसे की अहमियत

रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदना हर किसी के लिए एक बड़ा सपना होता है। लेकिन जब बुकिंग के समय डेवलपर की ओर से मौखिक आश्वासन दिया जाए और बाद में उस पर अमल न हो, तो यह सपना एक बुरे अनुभव में बदल सकता है। हाल ही में महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने Lodha Developers के खिलाफ एक ऐसा ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें एक NRI होमबायर को बुकिंग अमाउंट ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया1

मामले की शुरुआत: भरोसे से ठगी तक

यह मामला एक भारतीय एनआरआई दंपति का है, जो रूस में रहते थे। उन्होंने मुंबई के Lodha Mulund प्रोजेक्ट में ₹2.26 करोड़ का फ्लैट बुक किया था। बुकिंग के दौरान Lodha Developers के सेल्स एजेंट ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि अगर होम लोन रिजेक्ट हो जाता है या कोई वित्तीय संकट आता है, तो बुकिंग अमाउंट ₹7 लाख पूरा वापस कर दिया जाएगा1

बुकिंग और लोन रिजेक्शन

  • दंपति ने सितंबर और अक्टूबर 2021 में दो किस्तों में ₹7 लाख बुकिंग अमाउंट दिया।

  • उनकी स्पष्ट शर्त थी कि फ्लैट की खरीदारी तभी होगी जब बैंक से होम लोन मिल जाएगा।

  • नवंबर 2021 में बैंक ने लोन आवेदन रिजेक्ट कर दिया, जिसके बाद दंपति ने बुकिंग कैंसिल कर रिफंड मांगा।

डेवलपर का रुख

  • Lodha Developers ने बुकिंग फॉर्म के क्लॉज 1.4 और 3.5 का हवाला देते हुए रिफंड देने से इनकार कर दिया।

  • इन क्लॉज के मुताबिक, बुकिंग कैंसिल करने पर अमाउंट फॉरफिट किया जा सकता है।

कानूनी लड़ाई: MahaRERA के दरवाजे पर

होमबायर ने खुद को ठगा महसूस किया और MahaRERA में RERA Act, 2016 की धारा 12 के तहत शिकायत दर्ज की। Lodha Developers ने दलील दी कि होमबायर की शिकायत सिर्फ प्रोजेक्ट से बाहर निकलने की एक चाल है और बुकिंग फॉर्म के नियमों के मुताबिक रिफंड नहीं दिया जा सकता।

MahaRERA की जांच और अहम टिप्पणियां

MahaRERA ने मामले की गहराई से जांच की और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया1

  • बुकिंग फॉर्म में खामियां:

    • फॉर्म पर डेवलपर के सेल्स मैनेजर के हस्ताक्षर नहीं थे।

    • कई पेजों पर होमबायर के दोनों या एक ही हस्ताक्षर थे, लेकिन तारीखें नहीं थीं।

    • बेसिक जानकारी वाला फॉर्म पूरी तरह खाली था।

    • कोई प्रमाण नहीं था कि फॉर्म की शर्तें होमबायर को समझाई गई थीं।

  • मौखिक आश्वासन और एकतरफा क्लॉज:

    • MahaRERA ने माना कि बुकिंग प्री-अग्रीमेंट स्तर पर थी और मौखिक आश्वासन पर आधारित थी।

    • क्लॉज 3.5 को ‘वन-साइडेड, अनुचित और अमान्य’ करार दिया गया।

    • MahaRERA ने कहा कि बुकिंग अमाउंट फॉरफिट करना RERA Act की भावना के खिलाफ है।

MahaRERA का ऐतिहासिक फैसला

MahaRERA ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

“डेवलपर द्वारा बुकिंग अमाउंट फॉरफिट करना गलत और कानून के उद्देश्य के विपरीत है, जो होमबायर्स की परेशानियों को कम करने के लिए बनाया गया है। इसलिए, फॉरफिट किया गया अमाउंट वापस किया जाए।”

फैसले के मुख्य बिंदु

  • Lodha Developers को होमबायर को ₹6.65 लाख (बुकिंग अमाउंट में से) 15 जुलाई 2025 तक लौटाने का आदेश।

  • अगर समय पर रिफंड नहीं हुआ, तो SBI के उच्चतम मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट से 2% अधिक ब्याज देना होगा।

  • होमबायर को ₹20,000 अतिरिक्त शिकायत लागत के रूप में देने का आदेश।

डेवलपर की दलीलें क्यों हुईं खारिज?

  • MahaRERA ने पाया कि कोई फॉर्मल एग्रीमेंट फॉर सेल नहीं हुआ था।

  • बुकिंग फॉर्म आंशिक रूप से भरा था और डेवलपर के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर नहीं थे।

  • बुकिंग फॉर्म साइन करने के सिर्फ 9 दिन बाद ही होमबायर ने रिफंड मांगा था।

  • डेवलपर का तर्क कि बुकिंग प्रोसेसिंग में खर्च हुआ, उसे भी MahaRERA ने खारिज कर दिया।

इस फैसले का व्यापक असर: होमबायर्स के लिए सबक

1. मौखिक वादों पर भरोसा न करें

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, होमबायर्स को कभी भी डेवलपर के मौखिक वादों या आश्वासनों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। RERA और भारतीय अनुबंध अधिनियम के तहत मौखिक समझौते कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते।

2. बुकिंग फॉर्म और एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें

हर शर्त को ध्यान से पढ़ें, समझें और जरूरत पड़े तो कानूनी सलाह लें। कोई भी खाली या आंशिक रूप से भरा फॉर्म साइन न करें।

3. बुकिंग अमाउंट की वापसी के अधिकार

अगर बुकिंग के समय कोई फॉर्मल एग्रीमेंट नहीं हुआ है और बुकिंग अमाउंट फॉरफिट करने का क्लॉज एकतरफा है, तो MahaRERA में शिकायत की जा सकती है।

4. RERA का मकसद

RERA कानून का मुख्य उद्देश्य होमबायर्स के हितों की रक्षा करना है, न कि डेवलपर के पक्ष में एकतरफा शर्तों को लागू करना।

NRI होमबायर्स के लिए खास संदेश

यह मामला खासतौर पर उन लोगों के लिए अहम है जो विदेश में रहते हुए भारत में प्रॉपर्टी खरीदते हैं। NRI होमबायर्स को बुकिंग के समय हर दस्तावेज और शर्तों को अच्छी तरह समझना चाहिए और कोई भी मौखिक वादा लिखित में लेना चाहिए।

भविष्य के लिए सलाह: कैसे बचें ऐसे विवादों से

    हर वादा लिखित में लें:डेवलपर से हर आश्वासन, छूट या रिफंड पॉलिसी लिखित में लें।एग्रीमेंट साइन करने से पहले पढ़ें:किसी भी दस्तावेज पर साइन करने से पहले उसे पूरी तरह पढ़ें और समझें।कानूनी सलाह लें:बड़े निवेश से पहले रियल एस्टेट मामलों के वकील से सलाह लें।RERA में शिकायत करें:अगर डेवलपर नियमों का उल्लंघन करता है तो बिना देर किए MahaRERA या राज्य RERA में शिकायत दर्ज करें।

    निष्कर्ष: होमबायर्स की जीत, डेवलपर्स के लिए चेतावनी

    MahaRERA का यह फैसला न सिर्फ इस केस के लिए, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मिसाल है। इससे साफ संदेश गया है कि डेवलपर्स की एकतरफा शर्तें और मौखिक वादों से मुकरना अब नहीं चलेगा। होमबायर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए RERA एक्ट पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    Q1. क्या हर बुकिंग अमाउंट रिफंडेबल होता है?अगर बुकिंग के समय कोई फॉर्मल एग्रीमेंट नहीं हुआ है और क्लॉज एकतरफा है, तो MahaRERA में शिकायत कर रिफंड पाया जा सकता है1Q2. क्या मौखिक वादे मान्य हैं?नहीं, केवल लिखित और समझाई गई शर्तें ही कानूनी रूप से मान्य होती हैं।Q3. अगर डेवलपर रिफंड नहीं देता तो क्या करें?MahaRERA या राज्य RERA अथॉरिटी में शिकायत दर्ज करें।Q4. क्या NRI होमबायर्स के लिए अलग नियम हैं?नहीं, RERA के तहत सभी होमबायर्स के अधिकार समान हैं।

    समाप्ति: अपने अधिकार जानें, सतर्क रहें

    अगर आप भी घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो इस केस से सीख लें—हर दस्तावेज ध्यान से पढ़ें, कोई भी वादा लिखित में लें और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाएं। MahaRERA जैसे कानून आपके साथ हैं, बस आपको जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है।

    Source:1 The Economic Times Wealth

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