ऐसी कौन-सी तपस्या करूँ कि जब चाहूँ सूरज उगे और जब चाहूँ सूरज डले

  • प्रश्नकर्ता ने पूछा: “महाराज जी, ऐसी कौन‑सी तपस्या करूँ कि सारी‑सारी रिद्धियाँ‑सिद्धियाँ मेरे में आ जाएँ, मैं जब चाहूँ सूरज निकले, जब चाहूँ बारिश हो, मैं जो सोचूँ वही हो, जैसा चाहूँ वैसा हो, कोई तो मंत्र बता दो महाराज।”
  • महाराज जी ने प्रेम से संबोधन करते हुए कहा: “भैया, राधा‑राधा कहो और भगवान की शरण में रहो।”
  • महाराज जी ने कहा कि आज तक इतने महात्मा हुए, इतने ब्रह्मऋषि हुए, इतने बड़े‑बड़े संत और तपस्वी हुए, पर किसी ने सृष्टि के क्रम को परिवर्तित कर पाया क्या।
  • उन्होंने स्पष्ट कहा कि सृष्टि के नियत क्रम को बदलना किसी भी महात्मा के बस की बात नहीं रही।
  • उन्होंने बार‑बार “राधा‑राधा” नाम लेने और भगवान की शरण में रहने की बात दोहराई।
  • महाराज जी ने कहा: “अच्छे आचरण करो, माता‑पिता की सेवा करो, कोई भी गलत आचरण न करो।”
  • उन्होंने कहा कि पहले मनुष्यता आ जाए, फिर देवत्व आए, फिर भगवत‑भाव आ जाए, ऐसे चलना चाहिए।
  • उन्होंने संकेत किया कि साधक को क्रम से चलना है – पहले मानव धर्म, फिर देवतुल्य गुण, फिर भगवान के प्रति भगवत‑भाव।
  • महाराज जी ने प्रश्नकर्ता के भाव पर टिप्पणी की कि “आप तो बिल्कुल भगवान के भी आगे बढ़ना चाहते हो।”
  • उन्होंने कहा कि ऐसा तो आज तक किसी की पावर नहीं हुई, किसी की सामर्थ्य नहीं हुई कि सृष्टि के क्रम के ऊपर जा सके।
  • महाराज जी ने बताया कि इतने महात्मा हो गए, किसी‑किसी ने हाथ‑क्षण, दो‑क्षण के लिए सूर्य को रोक दिया है।
  • उदाहरण देते हुए बोले: “जैसे गोकर्ण जी ने रोक करके प्रश्न किया, वो बातें अलग हैं कि विनय के द्वारा रोक दिया सूर्य, सूर्य भगवान से बात कर ली।”
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विशेष कृपा और विनय का विषय है, न कि साधारण इच्छा से सृष्टि‑क्रम बदल देना।
  • महाराज जी ने फिर दोहराया कि सृष्टि के क्रम का परिवर्तन कर दे – ऐसा आज तक कोई महात्मा नहीं हुआ।
  • उन्होंने कहा कि जिसने सृष्टि‑क्रम को बदलने का प्रयत्न भी किया, वह भी असफल रहा।
  • उदाहरण स्वरूप उन्होंने विश्वामित्र जी का नाम लिया कि उन्होंने नए स्वर्ग की रचना करने और नए अनाज की रचना करने की चेष्टा की।
  • महाराज जी ने कहा कि विश्वामित्र जी थोड़ा ही कर पाए, पूर्ण रूप से सृष्टि‑क्रम को बदल नहीं सके।
  • फिर बोले: “कहाँ, आज भी त्रिशंकु उल्टा लटका हुआ है, स्वर्ग नहीं जा पाया।”
  • उन्होंने बताया कि विश्वामित्र जी ने अपने तपोबल से त्रिशंकु को स्वर्ग भेजा, पर वहाँ से धक्का लगा दिया गया।
  • आगे कहा कि आज भी त्रिशंकु उल्टा लटका हुआ है और उसी के लार बहती जिसे कर्मनाशा नदी कहते हैं।
  • इस प्रसंग के बीच प्रश्नकर्ता ने फिर निवेदन किया: “हमारे जी, एक आधी सिद्धि का ही मंत्र बता दो।”
  • इसके उत्तर में महाराज जी ने कहा: “नहीं, सब सिद्धियाँ आँगीं, लेकिन यह सिद्धि कि सूर्य को मतलब जब चाहे उदय करें, जब चाहे डाले – ये तो केवल भगवान में, दूसरे में नहीं।”
  • उन्होंने स्पष्ट कहा कि सूर्य को जब चाहें उदय और अस्त कराने की सामर्थ्य केवल भगवान में ही है, किसी अन्य में नहीं।
  • महाराज जी ने कहा: “ये केवल भगवान में है, और अब आप भजन करके भगवान बन जाओ तो बात अलग है।”
  • इसके बाद अपनी स्थिति बताते हुए बोले: “हम तो अभी तक दास भी सही नहीं बन पाए, पूरा जीवन हो गया।”
  • उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक वे स्वयं यह घोषणा नहीं कर सकते कि “मैं भगवान का सच्चा दास हूँ।”
  • आगे कहा: “लगा हूँ, अब सच्चा हूँ कि कच्चा है, भगवान जाने, पर उनके दास तो…”
  • फिर मुख्य संदेश देते हुए बोले: “भगवान के दास बनने की कोशिश करो यार, भगवान बनने की कोशिश मत करो।”
  • उन्होंने फिर दोहराया: “भगवान के दास बनने की कोशिश।”
  • महाराज जी ने प्रश्नकर्ता से पूछा: “नाम जप करते हो?”
  • उत्तर आया: “आधा घंटा।”
  • तब महाराज जी ने हँसते हुए कहा: “आधा घंटा में सूर्य रोक लोगे?”
  • उन्होंने अंतिम वाक्य में कहा: “यार, चलो हँसा तो दिया तुमने सबको कम से कम।”

Related Posts

ब्रह्मचर्य पर प्रेमानंद महाराज जी के 20 अमूल्य उपदेश: जीवन बदल देने वाला मार्गदर्शक ब्लॉग

ब्रह्मचर्य पर प्रेमानंद महाराज जी के उपदेश बहुत व्यावहारिक और सरल भाषा में हैं, जो साधक को मन, वचन और कर्म – तीनों स्तर पर पवित्र बनाना सिखाते हैं। 1.…

Continue reading
साधक के लिए अनिवार्य 6 शुद्धियाँ: मन, वाणी, अन्न और जीवन को पवित्र बनाने वाले सूत्र

प्रस्तावना : भीतर की अशांति का असली कारण आज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में तनाव, चिंता, मानसिक दबाव और असंतोष से जूझ रहा है।…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

ब्रह्मचर्य पर प्रेमानंद महाराज जी के 20 अमूल्य उपदेश: जीवन बदल देने वाला मार्गदर्शक ब्लॉग

ब्रह्मचर्य पर प्रेमानंद महाराज जी के 20 अमूल्य उपदेश: जीवन बदल देने वाला मार्गदर्शक ब्लॉग

साधक के लिए अनिवार्य 6 शुद्धियाँ: मन, वाणी, अन्न और जीवन को पवित्र बनाने वाले सूत्र

साधक के लिए अनिवार्य 6 शुद्धियाँ: मन, वाणी, अन्न और जीवन को पवित्र बनाने वाले सूत्र

बच्चों की शॉर्टकट आदत: गाइड और चैटGPT पर निर्भरता का सच

बच्चों की शॉर्टकट आदत: गाइड और चैटGPT पर निर्भरता का सच

SIP पर 0% टैक्स कैसे दें? यह बड़ा टैक्स रूल 99% लोगों को नहीं पता

SIP पर 0% टैक्स कैसे दें? यह बड़ा टैक्स रूल 99% लोगों को नहीं पता

पत्रकार अंशुमन तिवारी ने बताया देश की अर्थव्यवस्था का सच जो कोई नहीं बताएगा

पत्रकार अंशुमन तिवारी ने बताया देश की अर्थव्यवस्था का सच जो कोई नहीं बताएगा

यूट्यूब फिनफ्लुएंसर बनाम असली वित्तीय सलाहकार: अपने पैसों को नकली गुरुओं से कैसे बचाएं

यूट्यूब फिनफ्लुएंसर बनाम असली वित्तीय सलाहकार: अपने पैसों को नकली गुरुओं से कैसे बचाएं