REIT एक ऐसा ज़रिया है जिससे आप कम पैसों में बड़ी‑बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टीज़ (जैसे ऑफिस, मॉल, IT पार्क) के किराये और प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमत से अप्रत्यक्ष रूप से फायदा उठा सकते हैं, बिना खुद प्रॉपर्टी खरीदे। यह स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होता है, इसलिए आप शेयर की तरह इन्हें ख़रीद‑बेच सकते हैं, लेकिन इसमें रिटर्न, रिस्क और टैक्स के अपने खास नियम होते हैं।
REIT क्या है और कैसे काम करता है?
- REIT का फुल फॉर्म Real Estate Investment Trust है; यह एक ट्रस्ट/कंपनी होती है जो आय देने वाली प्रॉपर्टीज़ (मुख्य रूप से कमर्शियल) को Own, Manage या Finance करती है।translate.google+3
- भारत में REITs को SEBI रेगुलेट करता है और इनके लिए अलग REIT Regulations, 2014 बने हुए हैं, जिससे ट्रांसपेरेंसी और इन्वेस्टर प्रोटेक्शन बना रहे।kotakmf+1
- REIT किरायेदारों से मिलने वाला किराया और कुछ हिस्से में प्रॉपर्टी बेचने/बढ़ने से मिलने वाला कैशफ्लो कलेक्ट करता है और कम से कम 90% नेट डिस्ट्रीब्यूटेबल कैशफ्लो यूनिट‑होल्डर्स (इन्वेस्टर्स) को डिस्ट्रीब्यूट करना जरूरी है।[kotakmf]
- SEBI के नियम के हिसाब से लगभग 80% पैसा ऐसी प्रॉपर्टीज़ में लगा होना चाहिए जो पूरी तरह बन चुकी हों और नियमित किराया दे रही हों; केवल लगभग 20% तक अंडर‑कंस्ट्रक्शन या दूसरे प्रोजेक्ट्स में जा सकता है।
सीधी भाषा में: REIT उस मकान‑मालिक की तरह है जो बहुत सारी कमर्शियल बिल्डिंग्स का मालिक है, किराया लेता है और वह किराया आप जैसे छोटे‑छोटे पार्टनर्स के साथ बाँट देता है।
REIT में निवेश कैसे करें? (Direct, MF/MFD के ज़रिए)
1. सीधे (खुद Demat से)
- REIT की यूनिट्स NSE/BSE पर लिस्ट होती हैं, इसलिए इन्हें शेयर की तरह Demat और Trading Account से खरीदा जाता है।
- ज़रूरी चीज़ें:
- SEBI‑रजिस्टर्ड ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग अकाउंट
- Demat अकाउंट (REIT यूनिट्स यहीं होल्ड होंगी)
- KYC पूरा होना चाहिए।
- खरीदने के स्टेप्स:
- अपने ब्रोकर ऐप/वेबसाइट में लॉग‑इन करें।[1finance.co]
- REIT का नाम/टिकर सर्च करें (जैसे Embassy REIT, Mindspace REIT आदि)।angelone+1
- जितनी यूनिट्स खरीदनी हों उसका Buy Order लगाएँ; सेटलमेंट के बाद यूनिट्स Demat में आ जाएँगी।[1finance.co]
2. Mutual Fund / ETF / MFD के ज़रिए
एक Financial Planner / MFD आपके लिए तीन तरीक़ों से REIT में मदद कर सकता है:
- ऐसे Mutual Funds/ETFs चुनना जो Indian या Global REITs में निवेश करते हैं, ताकि आपको Diversified Basket मिल जाए।[1finance.co]
- आपके Goals (जैसे 10–15 साल के लिए Passive Income, Retirement, Kid Education) के हिसाब से यह तय करना कि Portfolio में REIT का कितना % रखना है (जैसे 5–15%)।
- Periodic Review करके REIT exposure को बढ़ाना/घटाना और गलत टाइमिंग, ज़्यादा कंसंट्रेशन, या गलत कैटेगरी चुनने जैसी गलतियाँ रोकना (Behaviour Management), जिससे लंबे समय में compounding से पैसा बन सके।
Layman point: खुद शेयर चुनना मुश्किल लगे तो MFD/Planner के जरिए REIT-MF या REIT-heavy Hybrid Funds लेकर धीरे‑धीरे SIP कर सकते हैं, जिससे Discipline और Diversification दोनों मिलते हैं।
REIT से पैसा कैसे बनता है? (Income + Growth)
REIT से मुख्य तौर पर दो तरह से रिटर्न मिलता है:
- नियमित Income:
- किराये की इनकम से जो Cashflow आता है, REIT उसे Dividend/Interest/Capital Repayment के रूप में Unitholders को देता है।cleartax+2
- SEBI नियमों के तहत कम से कम 90% नेट डिस्ट्रीब्यूटेबल कैशफ्लो बाँटना जरूरी है, इसलिए आम तौर पर साल में कई बार Distribution मिलता है।[kotakmf]
- Capital Appreciation:
- समय के साथ अगर प्रॉपर्टी का किराया और वैल्यू बढ़ती है, तो REIT की NAV/Market Price भी बढ़ सकती है, जिससे आपके यूनिट की कीमत बढ़ती है।translate.google+1
- अच्छी Location, High Occupancy, Strong Tenants (MNCs, Big Brands) और Low Debt वाले REIT में यह संभावना बेहतर होती है।premium.capitalmind+1
Financial Planner या MFD इन दोनों को मिलाकर आपके लिए ऐसी Strategy बना सकता है जिसमें:
- 5–10 साल बाद REIT से मिलने वाला Distribution आपके Fixed खर्चों के कुछ हिस्से को कवर करे
- इक्विटी, डेब्ट और REIT मिलाकर Overall Portfolio का Risk‑Return Balance बेहतर हो
REIT के फायदे क्या हैं?
- कम पैसों में प्रॉपर्टी एक्सपोज़र: कुछ सौ/हज़ार रुपये से आप High‑value ऑफिस पार्क या मॉल के Fractional Owner बन सकते हैं।
- नियमित कैशफ्लो की संभावना: 90% Cashflow डिस्ट्रिब्यूशन की शर्त होने से अपेक्षा रहती है कि साल‑भर में Multiple Payouts मिलें (बशर्ते किराये की इनकम आती रहे)।
- Liquidity: फ्लैट बेचने से आसान है – REIT यूनिट्स आप मार्केट के समय में कभी भी बेच सकते हैं (हां, सही प्राइस पर मिलना मार्केट पर depend करता है)।1finance+1
- Diversification: केवल Equity या FD पर निर्भर न रहकर Portfolio में Real Estate जैसा अलग Asset Class जुड़ जाता है।translate.google+1
- प्रोफेशनल मैनेजमेंट: प्रॉपर्टी की खरीद, किरायेदार, मेंटेनेंस, लीज‑नेगोशिएशन, सब काम Experienced टीम करती है; आपको Tenant ढूँढने या Legal दिक्कतों से नहीं निपटना पड़ता।translate.google+2
REIT के रिस्क, पैसा डूब सकता है क्या?
किसी भी मार्केट‑लिंक्ड इन्वेस्टमेंट की तरह REIT में भी Risk है; यह गारंटीड Product नहीं है। मुख्य Risk:
- मार्केट प्राइस गिरने का रिस्क:
- REIT यूनिट्स शेयर की तरह ट्रेड होती हैं, इसलिए Interest Rate बढ़ने, Economy धीमी होने, Offices की Demand घटने या Sentiment खराब होने से Price गिर सकती है।premium.capitalmind+1
- Short Term में 10–30% तक गिरावट Possible है; Long Term में Quality और Entry Price बहुत मायने रखते हैं।
- Rental Income का रिस्क:
- अगर Vacancy बढ़ जाए, बड़े किरायेदार निकल जाएँ, या Rentals गिर जाएँ (जैसे Work‑From‑Home की वजह से ऑफिस डिमांड कम होना), तो Cashflow कम हो सकता है जिससे Distribution घट सकती है।translate.google+1
- Debt (कर्ज) रिस्क:
- REIT कुछ हद तक कर्ज ले सकता है; अगर Interest Rate बहुत बढ़ जाए या कर्ज ज़्यादा हो, तो Net Cashflow और Valuation पर दबाव आ सकता है।premium.capitalmind+1
- Regulatory / Tax Risk:
- सरकार या Regulator Tax Rules या REIT Regulation बदल दें तो Post‑Tax Return बदल सकते हैं।1finance+1
पैसा डूबने का मतलब 0 हो जाना – यह आमतौर पर बहुत Rare होता है, खासकर SEBI‑Regulated, Listed Indian REITs में, जब तक कोई बहुत बड़ा Fraud, Massive Vacancy या Extreme Debt Crisis न हो। लेकिन Capital Loss (जैसे 20–40% या उससे भी ज्यादा Permanent गिरावट) संभव है अगर:sebi+1
- आपने Over‑valued प्राइस पर खरीदा
- Concentration बहुत ज्यादा रखा (Portfolio का 40–50% REIT में डाल दिया)
- खराब गुणवत्ता या Global Troubled REIT जैसे High Risk Segments चुने (Internationally कुछ REIT जैसे Criimi Mae आदि दिवालिया भी हुए हैं)।[abi]
इसलिए REIT में Limited Allocation (जैसे 5–15% Portfolio), Quality Selection और Long Term View जरूरी है।
REIT में Ownership किसकी होती है?
- कानूनी तौर पर प्रॉपर्टीज़ का Owner REIT (Trust/Company) होता है; आप Direct Registry में Flat Owner नहीं बनते।
- आप REIT की Units के Owner होते हैं, यानी उस Trust के Income और Assets पर Proportionate Right रखते हैं।
- Property की Day‑to‑Day Control और Major Decisions (खरीद/बेच, डेवलपमेंट, फाइनेंस) REIT Manager/Trustee Board के हाथ में होते हैं, जो SEBI और Unit‑holders Agreement के हिसाब से काम करते हैं।
सिंपल: बिल्डिंग REIT की है, REIT के Units आपके हैं – इसलिए Indirect Ownership है, Direct नहीं।
भारत में कौन‑कौन से REIT हैं? 10 साल का रिटर्न?
भारत में फिलहाल 4 प्रमुख Listed REITs हैं:jiraaf+2
| REIT का नाम | फोकस | लिस्टेड REITs की स्थिति |
|---|---|---|
| Embassy Office Parks REIT | Grade‑A ऑफिस पार्क | भारत का पहला REIT, ऑफिस‑फोकस्ड, काफ़ी बड़ा पोर्टफोलियो।[angelone] |
| Mindspace Business Parks REIT | ऑफिस पार्क | IT/Business Parks पर फोकस, Diversified Locations।[angelone] |
| Brookfield India Real Estate Trust | ऑफिस | North‑centric कमर्शियल पोर्टफोलियो, हाई डिविडेंड यील्ड के लिए जाना जाता है।premium.capitalmind+1 |
| Nexus Select Trust | रिटेल मॉल्स (कंज़म्प्शन) | इंडिया का पहला Pure‑play Retail/Shopping Mall REIT, हाल के सालों में टॉप परफॉर्मर।premium.capitalmind+1 |
क्योंकि भारत में REIT Structure नया है (पहला REIT 2019 के आसपास लिस्ट हुआ), इसलिए 10 साल का Actual Listed Track Record अभी उपलब्ध नहीं है। अभी तक के 4–6 साल के Broad Observation:
- 1 साल में (2023–2024 के आसपास) Nexus Select Trust ने लगभग 32% के आसपास रिटर्न दिया, Embassy ने ~20% के आसपास दिया, जबकि अन्य ने कम/मध्यम रिटर्न दिया।
- Long Term (लिस्टिंग से अब तक) किसी ने बहुत High Multi‑bagger Return नहीं दिया, लेकिन Regular Distribution + Moderate Price Movement मिलाकर Mid‑teen Annualised Return की Range के आसपास रहे हैं (REIT‑specific numbers समय के साथ बदलते रहते हैं, इसलिए Investment से पहले Fresh Data देखना ज़रूरी है)।
10 साल का डेटा न होने की वजह से, REIT को Equity की तरह Aggressive Growth Product नहीं, बल्कि Hybrid प्रकार की Asset (Income + Moderate Growth) मानना समझदारी है।
कौन‑से REIT “डूबे” हैं?
- भारत में अब तक कोई बड़ा SEBI‑Listed REIT पूरी तरह दिवालिया होकर Unitholders का पैसा 0 करने जैसे Level तक नहीं गया है (Jan 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार)
- हाँ, International Market में कुछ REITs बुरी तरह फेल हुए/Bankrupt हुए हैं, जैसे Criimi Mae (US‑based REIT जो Sub‑investment Grade Commercial Mortgage में Specialise करता था और 1998 में फेल हुआ)।
इससे सीख:
- High Risk लोन, Sub‑prime Borrowers या Very Concentrated Sector (जैसे नाज़ुक Malls, Private Prisons, आदि) में काम करने वाले REIT में Risk ज़्यादा होता है।[abi]
- भारत में भी अगर कोई REIT Future में बहुत ज़्यादा Debt ले, Occupancy गिर जाए, या Governance खराब हो, तो Deep Capital Loss/Serious Trouble संभव है, भले ही अभी ऐसा कोई Precedent न दिख रहा हो।premium.capitalmind+2
REIT पर Tax कैसे लगता है? (Simplified)
REIT से पैसा तीन तरह से मिलता है – Dividend, Interest/भाड़ा संबंधित Distribution और Capital Gain (जब आप Unit बेचते हैं)। भारत में Tax Rules थोड़ा Complex हैं और हाल ही में बदलाव भी हुए हैं, लेकिन Layman के लिए Broad Idea:
1. Dividend, Interest, Rent Distribution
- Dividend, Interest, Rent आदि की Distribution आम तौर पर Unitholder के हाथ में Normal Income की तरह मानी जाती है और आपकी Slab Rate के हिसाब से Tax लग सकता है (कुछ Structure‑specific Exceptions हो सकते हैं)।
- आमतौर पर REIT से मिलने वाले Interest आदि पर TDS कटता है (Resident के लिए 10% के आसपास), अगर साल का Interest एक Limit (अभी 5,000 – आगे 10,000) से अधिक हो।cleartax+1
2. Capital Gain (REIT यूनिट बेचने पर)
- Short Term Gain: अगर आपने REIT यूनिट 36 महीने से कम समय के लिए रखी और बेचते समय Profit हुआ, तो वह Short Term Capital Gain माना जाता है और आम तौर पर Slab Rate पर Tax लगता है (कुछ Cases में Listed Securities Rules लागू हो सकते हैं)।
- Long Term Gain: Long Term Capital Gain पर अभी हाल में काफी बदलाव हुए हैं। Listed REITs को Section 112A जैसे Security Status मिलने पर Long Term Capital Gain पर विशेष Rate लागू किया गया है; नए नियमों के हिसाब से बहुत से ऐसे Gains पर 12.5% Flat Rate और लगभग 1.25 लाख तक की छूट जैसा Structure लागू किया गया है (Threshold और Rate समय के साथ Policy के अनुसार बदल सकते हैं)।[cleartax]
सरल शब्दों में: REIT से मिलने वाला Cashflow Tax Free नहीं मानिए; मानिए कि ज़्यादातर Income पर Slab Rate और बेचने पर Capital Gain Tax लगेगा, इसलिए Financial Planner/MFD से Case‑specific Plan बनवाना बेहतर है।
Financial Planner / MFD REIT से आपके लिए पैसा कैसे बना सकता है?
एक अच्छा Financial Planner तीन लेवल पर मदद कर सकता है:
- Product Selection (क्या लेना है)
- कौन‑सा REIT या REIT‑focused MF/ETF आपके Risk Profile, Age, Goals के लिए सही है।
- High‑Debt या Poor Governance वाले REITs में Avoid/Limit करना, Quality Names पर Focus रखना।
- Allocation & Timing (कितना और कब)
- Portfolio का कितना हिस्सा REIT में रखना है (जैसे 10–15%), बाकी Equity, Debt, Gold आदि में Balance करना।
- SIP / STP या Phased Entry करवा कर Wrong Timing का Risk कम करना (एक ही दिन पूरा पैसा नहीं डालना)।
- Monitoring & Exit (कब कम/ज़्यादा करना)
- Occupancy, Rental Growth, Debt Level, Regulatory Changes, Tax Changes को Track करके समय‑समय पर Rebalance करना।
- अगर किसी REIT में Structure/Demand गंभीर रूप से बिगड़ रही हो, तो Gradual Exit Plan बनाना और Loss को सीमित रखना।
Long Term में Planner की सबसे बड़ी Value Behaviour Control है – Market गिरने पर Panic Sell न करने देना और Boom में Over‑Allocate न करने देना, जिससे Compounding से धीमे‑धीमे बड़ा Corpus बनता है।






