2026 में रियल एस्टेट करियर: सच, जोखिम और हकीकत

आचार्य अमरेश झा के साथ इस पॉडकास्ट में रियल एस्टेट को सिर्फ प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने का काम नहीं, बल्कि पीढ़ियों की दौलत और सुरक्षा बनाने का साधन बताया गया है। इस लेख में हम 2026 में रियल एस्टेट को करियर के रूप में आसान भाषा में समझेंगे – सच, मौके, रिस्क और सही तरीका।


आचार्य अमरेश झा का संक्षिप्त परिचय

  • आचार्य अमरेश झा भारत के जाने-माने रियल एस्टेट एक्सपर्ट और PREC (Professional Real Estate Club) के फाउंडर हैं।
  • उन्होंने 5 लाख से ज्यादा लोगों को सही और एथिकल प्रॉपर्टी फैसले लेना सिखाया है और कई ने उनकी गाइडेंस से करोड़ों की प्रॉपर्टी वेल्थ बनाई है।
  • वे पहले बिजनेस में घाटे और कर्ज में थे, लेकिन रियल एस्टेट में आने के बाद एक भी साल ऐसा नहीं गया जब उन्होंने 1 करोड़ से कम कमाई हो।
  • वे रियल एस्टेट को केवल पैसा कमाने का नहीं, “जनरेशन वेल्थ” और “लिगेसी क्रिएट” करने का माध्यम मानते हैं।

रियल एस्टेट का असली मतलब और 2026 में स्कोप

आचार्य जी के अनुसार रियल एस्टेट का मतलब सिर्फ जमीन या मकान नहीं, बल्कि ऐसा “रियल एसेट” है जो समय के साथ बढ़ता है और हमारे तथा हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित करता है। शेयर और क्रिप्टो आंखों से दिखते नहीं, लेकिन घर, प्लॉट, दुकान सामने दिखती है, इसलिए लोग स्वाभाविक रूप से इसमें भरोसा करते हैं।

वे बताते हैं कि पिछले 20 सालों में भारत के अच्छे इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमत 25, 50, यहाँ तक कि 100 गुना तक बढ़ी है। उनका मानना है कि अगले 10–20 साल में रिटर्न इससे भी बेहतर हो सकता है, क्योंकि:

  • देश की इकॉनमी तेज़ी से बढ़ रही है और 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर जा रही है।
  • लोगों की इनकम बढ़ रही है – मोटरसाइकिल से कार, छोटी कार से बड़ी गाड़ी तक अपग्रेडेशन दिख रहा है।
  • जब भी लोगों के पास पैसा आता है, 60–80% पैसा वे रियल एस्टेट में ही लगाते हैं – घर, दुकान, ऑफिस या दूसरा प्लॉट।
  • जमीन लिमिटेड है, परिवार छोटे हो रहे हैं, न्यूक्लियर फैमिली बढ़ रही है, इस वजह से घरों की डिमांड लगातार बढ़ रही है।

इसलिए 2026 और आगे के साल रियल एस्टेट में करियर और इन्वेस्टमेंट दोनों के लिए मजबूत समय माने जा रहे हैं, बशर्ते आप सही जगह और सही तरीके से काम करें।


चार क्वाड्रेंट: पैसे हों या न हों, कहां से शुरुआत करें

आचार्य अमरेश झा रियल एस्टेट के काम को चार क्वाड्रेंट में बाँटते हैं। आप अपनी स्थिति के हिसाब से इनमें से कहीं से भी शुरुआत कर सकते हैं।

1. सेलर / ब्रोकर (कोई पैसा नहीं, सिर्फ मेहनत)

  • अगर आपके पास पैसा नहीं है, तो वे साफ कहते हैं – “पैसा नहीं है, तो बेचिए।”
  • प्रॉपर्टी बेचने के लिए खुद के नाम पर जमीन होना ज़रूरी नहीं; आप किसी और की प्रॉपर्टी को ब्रोकर के रूप में बेच सकते हैं।
  • आपका काम होता है –
    • अपने शहर/एरिया में बिकने वाली प्रॉपर्टी ढूंढ़ना,
    • खरीदार ढूंढ़ना,
    • दोनों को मिलाना और डील करवाना।
  • इसे बहुत लोग “दलाली” समझते हैं, लेकिन आचार्य जी इसे “हेल्प” कहते हैं – आप किसी को सही घर दिलाते हैं, बदले में सर्विस चार्ज (कमीशन) लेते हैं, जो नैचुरल और एथिकल है।

क्यों फायदेमंद है?

  • प्रोडक्ट हाई टिकट है – अगर आप 1 करोड़ के फ्लैट की डील कराते हैं तो 1–2 लाख तक कमीशन मिल सकता है।
  • महीने में सिर्फ 1 डील भी कर ली तो साल में 12–24 लाख तक कमाया जा सकता है।
  • वे कहते हैं, अपने आसपास देखो – जो लोग प्रॉपर्टी का काम शुरू करते हैं, अक्सर 2 साल में साइकिल से कार तक पहुँच जाते हैं।

2. बायर (थोड़ा पैसा, अपनी पहली प्रॉपर्टी)

  • अगर आप नौकरी कर रहे हैं और आपके पास कुछ बचत है, तो आप खुद बायर बनकर प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं।
  • वे सलाह देते हैं कि पहले छोटे से शुरू करें – ज़रूरत जितनी हो उतना ही बड़ा घर लें, दिखावे के लिए नहीं।
  • होम लोन के जरिए आप 10–20% डाउन पेमेंट देकर 80–90% बैंक से उधार ले सकते हैं, यानी 50 लाख की प्रॉपर्टी के लिए 5–10 लाख से शुरुआत संभव है।

3. डेवलपर / बिल्डर (अच्छा पैसा + रिस्क लेने की क्षमता)

  • जब आपके पास कुछ पूंजी, नॉलेज और कॉन्फिडेंस हो जाए तो आप प्लॉट लेकर कॉलोनी, फ्लोर, अपार्टमेंट या कमर्शियल प्रोजेक्ट डेवलप कर सकते हैं।
  • डेवलपर एंड प्रोडक्ट बनाने वाला होता है – वही जगह से सबसे ज्यादा मार्जिन कमाता है, क्योंकि वह कच्ची जमीन से तैयार प्रोजेक्ट बनाकर वैल्यू क्रिएट करता है।
  • आचार्य जी ने खुद 2012–18 तक दूसरों की प्रॉपर्टी बेची, फिर 2018 में डेवलपर बने, कॉलोनी डेवलप की और अब अपार्टमेंट बना रहे हैं।

4. इन्वेस्टर (ज्यादा पैसा, बड़े खेल)

  • जिनके पास हर साल 1–2–4 करोड़ तक इन्वेस्ट करने की क्षमता है, वे इन्वेस्टर क्वाड्रेंट में आते हैं।
  • इन्वेस्टर प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में बिल्डर को फाइनेंस या बल्क में बुकिंग करके “इनसाइडर” की तरह प्रॉफिट में हिस्सेदारी लेता है।
  • यह स्टॉक मार्केट के “प्रोमोटर लेवल” जैसा है – कम कीमत पर शुरुआती एंट्री और प्रोजेक्ट के चलते-चलते या पूरा होने पर अच्छा रिटर्न।

निचोड़ यह कि आप अभी जहाँ हैं, वहां से शुरू कर सकते हैं – पहले ब्रोकर बनें, फिर बायर, फिर डेवलपर, और आगे चलकर इन्वेस्टर की तरफ बढ़ें।


ज़ीरो से शुरुआत: पहली डील और जरूरी स्किल

बहुत से लोग रियल एस्टेट में आते हैं लेकिन 6–6 महीने, कभी 1–2 साल तक एक भी डील नहीं कर पाते। आचार्य जी बताते हैं कि इसका कारण स्किल, सिस्टम और कॉन्फिडेंस की कमी है – काम में कमी नहीं, तरीके में कमी है।

1. तीन तरह का भरोसा

रियल एस्टेट सेल्स के लिए वे तीन तरह के भरोसे पर जोर देते हैं।

  • खुद पर भरोसा:
    • “किसी ने किया है तो मैं क्यों नहीं?” – यह माइंडसेट जरूरी है।
    • अगर कोई अनजान शहर में 700 फ्लैट बेच सकता है, तो आप भी सीखकर कर सकते हैं; उन्होंने खुद रांची में ऐसा किया।
  • प्रोडक्ट पर भरोसा:
    • जिस प्रॉपर्टी, बिल्डर, लोकेशन को आप बेच रहे हैं, उसकी खूबियों, कमियों, भविष्य की संभावनाओं को गहराई से समझें।
    • बिल्डर की साख, जमीन के पेपर, लोकेशन, आसपास की सुविधाएँ (मॉल, मेट्रो, पार्क, ओपन स्पेस, स्कूल, ऑफिस) – सब पर पकड़ बनाएं।
  • सिस्टम पर भरोसा:
    • सिर्फ “भगवान भरोसे” नहीं, एक सिस्टम बनाकर काम करें – रोज कितने कॉल, कितनी साइट विजिट, कितने फॉलो-अप, कितने लीड।

2. नॉलेज और स्किल सेट

कुछ मुख्य स्किल जो वे बताते हैं:

  • प्रोडक्ट नॉलेज: प्रोजेक्ट, लोकेशन, फ्यूचर डेवलपमेंट, अमेनिटीज, प्राइस ट्रेंड – जितना ज्यादा जानेंगे, उतना आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।
  • लीड जनरेशन:
    • सिर्फ दोस्तों-रिश्तेदारों पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा।
    • डिजिटल मार्केटिंग सीखें –
      • YouTube पर वीडियो बनाकर प्रॉपर्टी वॉकथ्रू दिखाना,
      • Facebook/Instagram पर लोकेशन, उम्र, इनकम के हिसाब से टारगेटेड ऐड चलाना,
      • ऑनलाइन क्वेरी पकड़कर साइट विजिट करवाना।
  • लॉ ऑफ एवरेज:
    • अगर महीने में सिर्फ 1 ग्राहक को प्रॉपर्टी दिखाएँगे तो शायद डील न हो।
    • अगर रोज 1, महीने में 30 लोगों को साइट ले जाएँगे तो संभावना बहुत बढ़ जाती है कि 1–2 खरीद लें।
  • सही कस्टमर पहचानना:
    • “गंजे को कंघी बेचने वाला सेल्समैन” वाला पुराना फॉर्मूला वे गलत बताते हैं।
    • स्मार्ट सेल्समैन वह है जो वेजिटेरियन को नॉन- वेज नहीं बेचता, यानी गलत कस्टमर पर टाइम वेस्ट नहीं करता, बल्कि सही जरूरत वाले कस्टमर तक पहुँचता है।
  • कम्युनिकेशन और नेगोशिएशन:
    • भरोसा बनाना, सही सवाल पूछना, कस्टमर की जरूरत समझना, बजट के हिसाब से ऑप्शन देना, और फाइनल क्लोज करवाना – यह सब सीखना पड़ता है।

सच और रिस्क: सिर्फ चमकीला पक्ष नहीं

आचार्य जी रियल एस्टेट के चमकदार पक्ष के साथ-साथ रिस्क और सच्चाई भी बताते हैं।

1. मार्केट क्रैश या स्लोडाउन

  • जैसे शेयर या गोल्ड में उतार-चढ़ाव आते हैं, वैसे ही रियल एस्टेट में भी कभी-कभी प्राइस रुक जाते हैं या थोड़ा नीचे जाते हैं।
  • जब इन्वेस्टर्स बहुत ज्यादा हो जाते हैं और एंड-यूजर (वास्तविक रहने वाले) कम रहते हैं, तब प्राइस कृत्रिम रूप से ऊपर चला जाता है और बाद में ठहराव या गिरावट आ सकती है।
  • कई लोग कम समय में 4–5 फ्लैट बुक करके लोन और ईएमआई के बोझ में फँस जाते हैं, बाद में उन्हें कम दाम पर बेचकर निकलना पड़ता है।

उनकी सलाह:

  • रियल एस्टेट में जल्दी अमीर बनने का सपना न देखें; 10–20 साल का होराइजन लेकर चलें।
  • अपनी क्षमता से ज्यादा लोन या बुकिंग लेकर “ट्रेडिंग” न करें, अगर फुल टाइम एक्सपर्ट नहीं हैं।

2. गलत प्रॉपर्टी और फ्रॉड का रिस्क

  • बहुत लोग रिश्तेदार या जान-पहचान के भरोसे पेपर चेक किए बिना प्लॉट या फ्लैट खरीद लेते हैं और बाद में फँस जाते हैं।
  • कई मामले ऐसे होते हैं जहाँ जमीन किसी और के कब्जे में होती है, ओनरशिप क्लियर नहीं होती या बिल्डर प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ देता है।

इससे बचने के उपाय:

  • ड्यू डिलिजेंस (जांच-पड़ताल):
    • टाइटल, रसीदें, अप्रूवल, नक्शा, लेंडर या बैंक की NOC – सब डॉक्यूमेंट किसी अच्छे वकील या एक्सपर्ट से चेक करवाएँ।
    • साइट पर खुद जाएँ, कब्जा, आसपास का माहौल, लोगों की राय देखें।
    • बिल्डर या प्रोजेक्ट के पुराने कस्टमर से बात करें, ऑनलाइन रिव्यू और वीडियो देखें।
  • 100–200 रुपये बचाने के चक्कर में लाखों-करोड़ों का नुकसान न उठाएँ; एक्सपर्ट की फीस देना सस्ता पड़ता है।

3. फ्लिपिंग में रिस्क

फ्लिपिंग यानी कम दाम में खरीदकर थोड़े समय में थोड़ा रेनोवेशन करके ऊँचे दाम में बेचना।

  • मॉडल:
    • मार्केट में 1 करोड़ वैल्यू की प्रॉपर्टी किसी मोटिवेटेड सेलर से 80 लाख में डील करना,
    • लगभग 10–20 लाख डाउन पेमेंट और रेनोवेशन में लगाना,
    • 3 महीने में 1–1.1 करोड़ में बेचकर 10–20 लाख प्रॉफिट लेना।
  • फायदा:
    • कम पूंजी में अच्छा प्रतिशत रिटर्न।
    • साल में 2–4 डील से अच्छी इनकम बन सकती है।
  • रिस्क:
    • अगर टाइम में नहीं बिका तो डाउन पेमेंट और लगाई रकम फँस सकती है।
    • इसलिए बैकअप प्लान होना चाहिए –
      • जरूरत पड़े तो बैंक लोन लेकर खुद होल्ड कर सकें,
      • या टाइम बढ़वाकर बेचने की कोशिश जारी रख सकें।

वे साफ कहते हैं – यह आम आदमी के लिए नहीं, जो इस बिजनेस में गहराई से आना चाहता है और रिसर्च व मेहनत करने को तैयार है, उसके लिए है।


कहाँ इन्वेस्ट करें: शहर, लोकेशन और फ्यूचर सिग्नल

करियर के साथ-साथ, रियल एस्टेट निवेश कहाँ करें, यह समझना भी जरूरी है।

1. कौन से शहरों में स्कोप

  • मेट्रो और बड़े शहर:
    • दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, बेंगलुरु जैसे शहरों में प्राइस पहले ही बहुत ऊपर जा चुके हैं; इन्हें वे काफी हद तक “ओवरवैल्यूड” मानते हैं, खासकर मुंबई और गुरुग्राम।
  • ग्रोइंग और डेवलपिंग सिटी:
    • हैदराबाद को वे आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर और संभावनाओं के हिसाब से बहुत मजबूत मानते हैं।
    • NCR में नोएडा और ग्रेटर नोएडा अभी तुलनात्मक रूप से सस्ते हैं और एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, रोड्स आदि की वजह से आगे बड़ा ग्रोथ दे सकते हैं।
  • टियर-2 और टियर-3 शहर:
    • इंदौर, अयोध्या, दरभंगा जैसे शहरों को वे उदाहरण देते हैं जहाँ एयरपोर्ट, एम्स, स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आदि आ रहे हैं और आने वाले वर्षों में प्राइस बढ़ने की संभावना ज्यादा है।

उनका फॉर्मूला:

  • रहने के लिए – डेवलप्ड एरिया ठीक है।
  • पैसा बढ़ाने के लिए – डेवलपिंग या अनडेवलप्ड लेकिन फ्यूचर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले एरिया बेहतर हैं।

2. अपने शहर में क्या देखें

अगर आप किसी छोटे शहर या कस्बे में रहते हैं (जैसे यूज़र ने बताया कि हाईवे फोर लेन बनना है, ट्रेन आने वाली है), तो:

  • जहाँ नया हाईवे, एक्सप्रेसवे, रिंग रोड, रेलवे लाइन, मेट्रो, एयरपोर्ट, एम्स, यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्रियल एरिया आदि प्लान या मंजूर हो रहे हों, उस कॉरिडोर के 100 मीटर से 1 किलोमीटर के भीतर जमीन पर नजर रखें।
  • आज खेत या खाली एरिया होंगे, लेकिन 5–10 साल में वहीं नई कॉलोनियाँ, होटल, पेट्रोल पंप, कमर्शियल प्रोजेक्ट आ सकते हैं।

वे साफ कहते हैं – लोग गलती तब करते हैं जब सब डेवलप हो जाने के बाद खरीदते हैं; समझदार इन्वेस्टर तब खरीदता है जब काम शुरू हो रहा हो या घोषित हुआ हो।


रियल एस्टेट बनाम गोल्ड, स्टॉक और क्रिप्टो

आचार्य जी सिर्फ रियल एस्टेट की नहीं, पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन की भी बात करते हैं।

  • वे वॉरेन बफेट का सिद्धांत याद दिलाते हैं – “सारे अंडे एक टोकरी में मत डालो।”
  • सुझाव:
    • 50–60–70% तक हिस्सा रियल एस्टेट में रखा जा सकता है, क्योंकि इसमें प्राइस ज़्यादा फ्लक्चुएट नहीं होते और जीरो होने का रिस्क बहुत कम है।
    • कुछ हिस्सा गोल्ड में, कुछ शेयर मार्केट में, और बहुत थोड़ा (जैसे 1%) बिटकॉइन जैसे चुनिंदा क्रिप्टो में भी रखा जा सकता है, बशर्ते पहले समझकर।
  • गोल्ड की हाल की तेज़ बढ़त वे वॉर, डॉलर वीकनेस आदि से जोड़ते हैं, लेकिन पिछले कई सालों का एवरेज देखकर फैसला करने को कहते हैं।
  • क्रिप्टो में वे साफ कहते हैं – “सारा क्रिप्टो ठीक नहीं, सारा पैसा उसमें डालना ठीक नहीं; थोड़ा सा, समझकर।”

उम्र के हिसाब से भी वे सलाह बदलते हैं –

  • 65 साल के व्यक्ति के लिए एफडी और सुरक्षित एसेट्स ठीक हैं।
  • युवाओं के लिए सिर्फ एफडी में पैसा रखना “महागलती” है; उन्हें ग्रोथ एसेट्स जैसे रियल एस्टेट, इक्विटी आदि में भी जाना चाहिए।

निष्कर्ष: 2026 में रियल एस्टेट करियर के लिए क्या करें

अगर आप 2026 में रियल एस्टेट को करियर बनाना चाहते हैं, तो आचार्य अमरेश झा के संदेश को सरल पॉइंट में ऐसे समझ सकते हैं।

  • अपनी स्थिति पहचानें:
    • पैसा नहीं है – ब्रोकर/सेलर से शुरू करें।
    • थोड़ा पैसा है – खुद पहली प्रॉपर्टी सही जगह लेकर बायर बनें।
    • अनुभव और पूंजी दोनों हैं – डेवलपर या इन्वेस्टर की तरफ बढ़ें।
  • स्किल पर फोकस करें:
    • सेल्स, कम्युनिकेशन, डिजिटल मार्केटिंग, नेगोशिएशन, प्रोडक्ट नॉलेज – इन्हें सीखने में समय लगाएँ; यही आपकी “कमाई की मशीन” है।
  • लॉन्ग टर्म सोचें:
    • प्रॉपर्टी से रातोंरात अमीर बनने की बजाय 10–20 साल की वेल्थ, पैसिव रेंटल इनकम और सिक्योरिटी को लक्ष्य बनाएं।
  • सही लोकेशन और सही पेपर:
    • डेवलपिंग कॉरिडोर, नया इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रोइंग सिटी – इन पर ध्यान दें।
    • बिना ड्यू डिलिजेंस कोई प्रॉपर्टी न लें, वकील और एक्सपर्ट से पेपर चेक करवाएं।

आचार्य जी का पूरा संदेश यही है कि रियल एस्टेट सिर्फ “ज़मीन का धंधा” नहीं, बल्कि सही नीयत, सही ज्ञान और सही रणनीति से किया जाए तो 2026 और आगे के वर्षों में यह एक मजबूत, एथिकल और बेहद लाभदायक करियर बन सकता है।

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