SIP (Systematic Investment Plan) ने पिछले 10–15 साल में Nifty 50 इंडेक्स में ऐसे रिजल्ट दिए हैं कि “SIP मत करो” कहने वाले ज़्यादातर लोग या तो अधूरी जानकारी से बोल रहे हैं या फिर भावनाओं में।
Nifty 50 SIP का असली रिकॉर्ड: 1, 3, 5, 10, 15 साल
पहले ये समझें कि Nifty 50 इंडेक्स अपने आप में कैसा रहा है, क्योंकि SIP की रिटर्न उसी पर आधारित होती है।
- Nifty 50 Total Return Index (TRI) ने लिस्टिंग से लेकर लगभग 25 साल में करीब 11–12% के आसपास सालाना CAGR दिया है।
- 10 साल के पीरियड में Nifty 50 इंडेक्स ने लगभग 13–14% CAGR के आस-पास रिटर्न दिखाया है (जून 2015–जून 2025 में लगभग 13.5% के आसपास)।
- 15 साल के रोलिंग रिटर्न डेटा में Nifty 50 TRI ने औसतन 13–15% सालाना के आसपास रिटर्न दिखाया है, और लंबे पीरियड में निगेटिव रिटर्न की संभावना लगभग ज़ीरो के आस-पास चली जाती है।
अब SIP एंगल से देखें:
- एक स्टडी में 10 साल के अलग–अलग SIP पीरियड (Nifty 50 TRI पर) का एनालिसिस किया गया, जिसमें ज़्यादातर के XIRR (SIP रिटर्न) डबल डिजिट में और कई केस में 12–14% या उससे ऊपर रहे।[reddit]
- 15 साल की SIP (जैसे महीने के 10,000 रुपये) के एक एनालिसिस में टोटल इन्वेस्टमेंट करीब 18 लाख और कॉर्पस लगभग 61–63 लाख तक दिखा, यानी 15 साल में लगभग 3.5 गुना से ज़्यादा, XIRR लगभग 14–15% के आसपास।
ये नंबर ये दिखाते हैं कि:
- अगर आप लंबे समय तक और डिसिप्लिन के साथ SIP करते हैं, तो Nifty 50 जैसे इंडेक्स में वेल्थ क्रिएशन की संभावना बहुत मज़बूत हो जाती है।
- शॉर्ट टर्म में SIP भी फ्लक्चुएट करती है, लेकिन 7–10 साल से ऊपर जाते ही लॉस का रिस्क बहुत कम और अच्छे रिटर्न की संभावना बहुत ज़्यादा हो जाती है।nsearchives.nseindia+1
Step-up SIP: जल्दी अमीर बनने की ताकत
साधारण SIP में आप हर महीने फिक्स अमाउंट लगाते हैं। Step-up SIP में आप हर साल या हर कुछ साल बाद अपनी SIP बढ़ाते हैं – जैसे हर साल 10%। ये छोटी सी ट्रिक, कंपाउंडिंग को टर्बोचार्ज कर देती है।
Step-up SIP क्यों ताकतवर है:
- आपकी इनकम, सैलरी, बिज़नेस प्रॉफिट समय के साथ बढ़ते हैं; अगर SIP वहीं की वहीं रहे तो असली पोटेंशियल यूज़ ही नहीं होता।
- हर साल SIP बढ़ाने से, बाद के सालों में इन्वेस्ट होने वाला अमाउंट बहुत बड़ा हो जाता है, और कंपाउंडिंग का “हॉकी स्टिक इफेक्ट” और तेज़ दिखता है।
एक सरल उदाहरण का आइडिया:
- मान लीजिए आप 10,000 रुपये की SIP 15 साल तक करते हैं, मान लें 12–14% के आसपास रिटर्न मिला। रफ आइडिया के हिसाब से कॉर्पस 50–60 लाख के रेंज में हो सकता है (अलग–अलग स्टडी में ~60–65 लाख दिखाया गया है)।
- अगर आप वही SIP हर साल 10% बढ़ाते हैं (पहले साल 10,000, दूसरे साल 11,000, तीसरे साल 12,100…), तो 15 साल बाद कॉर्पस नॉर्मल SIP की तुलना में काफी ज़्यादा हो सकता है, क्योंकि अंतिम 5–7 साल में आप बहुत बड़ा सालाना इन्वेस्ट कर रहे होंगे।
Step-up SIP से फायदे:
- महंगाई से आगे निकलने में मदद, क्योंकि आपकी निवेश क्षमता भी इन्फ्लेशन से तेज़ बढ़ रही है।
- फाइनेंशियल गोल (रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई, घर) जल्दी या अधिक आराम से पूरे हो सकते हैं, क्योंकि कॉर्पस बड़ा बनता है।
जो लोग कहते हैं “SIP से अमीर नहीं बना जा सकता”, वे अकसर या तो बहुत छोटे पीरियड को देखते हैं, या SIP अमाउंट बढ़ाते ही नहीं। जबकि लंबा समय + सही एसेट + Step-up, तीनों मिलकर वेल्थ क्रिएशन का शक्तिशाली फॉर्मूला बनाते हैं।
SIP की मनोवैज्ञानिक ताकत: मार्केट टाइमिंग से बेहतर
SIP की सबसे बड़ी ताकत केवल रिटर्न नहीं, बल्कि व्यवहार (Behaviour) है:
- SIP आपको हर महीने इन्वेस्ट करने की आदत डालती है, चाहे मार्केट ऊपर हो या नीचे।
- आप मार्केट टाइम करने की कोशिश नहीं करते, जिससे “ऊपर से खरीदा, नीचे बेच दिया” वाली गलती से बच जाते हैं।
Nifty 50 TRI के रोलिंग डेटा में:
- 7–10 साल के होराइजन पर लगभग हर पीरियड में पॉज़िटिव रिटर्न दिखा है, और कई बार 15% से ऊपर का सालाना रिटर्न भी मिला है।nsearchives.nseindia+1
- इसका मतलब अगर आपने 7–10 साल SIP जारी रखी, तो समय और वॉलैटिलिटी आपके पक्ष में काम करने लगते हैं, आपके खिलाफ नहीं।
यहाँ SIP एक “ऑटो पायलट” जैसा काम करती है:
- मार्केट क्रैश के समय आपके ज़्यादा यूनिट खरीदते हैं (क्योंकि NAV कम होता है)।
- मार्केट हाई पर पहुँचने पर आपके पहले से खरीदे यूनिट्स हाई वैल्यू पर बिकने के लिए तैयार होते हैं, जब आप कोई गोल पूरा करने के लिए रिडीम करें।
Direct vs Regular: सिर्फ रिटर्न देखकर Direct लेना क्यों रिस्की हो सकता है
अक्सर लोग कहते हैं, “क्यों Distributor/Advisor को कमीशन दूँ, Direct फंड ही लेता हूँ, 0.5–1% एक्स्ट्रा रिटर्न मिल जाएगा।” यह बात कागज़ पर सही लगती है, लेकिन व्यवहार में हमेशा सही नहीं होती।
Direct प्लान की रियलिटी:
- Direct प्लान में TER (expense ratio) कम होता है, यानी थ्योरी में रिटर्न थोड़ा ज़्यादा हो सकता है।
- लेकिन फंड चुनना, पोर्टफोलियो रीव्यू, रीबैलेंसिंग, असल रिस्क मैनेजमेंट सब खुद करना पड़ता है। अगर गलती से गलत कैटेगरी या ओवर–रिस्की फंड चुन लिया, तो थोड़ी सी एक्स्ट्रा रिटर्न बचाने के चक्कर में बड़ा नुकसान हो सकता है।
Regular प्लान (Distributor / MFD के ज़रिए) की रियलिटी:
- Mutual fund distributor को ongoing ट्रेल कमीशन मिलता है, जो TER में शामिल होता है और NAV से एडजस्ट होता रहता है।
- इसका मतलब, आपको अलग से पैसा देकर फीस नहीं देनी पड़ती; आपका पोर्टफोलियो थोड़ा कम रिटर्न दिखा सकता है, लेकिन बदले में आपको गाइडेंस, प्लानिंग, डोक्यूमेंटेशन, ब्लॉगिंग, गलती–रोधी सिस्टम मिलता है।shareindia+1
अगर आप खुद बहुत अच्छे से:
- फंड कैटेगरी समझते हैं (लार्ज कैप, मिड कैप, सेक्टोरल, थीमैटिक),
- रिस्क–प्रोफाइल और एसेट एलोकेशन खुद निकाल सकते हैं,
- 1–2 साल में एक बार पोर्टफोलियो की समीक्षा और रीबैलेंस कर सकते हैं,
तभी Direct प्लान आपके लिए बेहतर हो सकते हैं। नहीं तो, सिर्फ TER बचाने के चक्कर में बड़े रिस्क लेना समझदारी नहीं है।
Mutual Fund Distributor / Financial Planner की भूमिका: कहानी इनके बिना अधूरी क्यों है
सफल SIP की कहानी में MFD (Mutual Fund Distributor) या Financial Planner की भूमिका कई जगहों पर दिखती है, जो आँखों से कम और नतीजों से ज़्यादा समझ आती है।
- सही फंड–सेलेक्शन और एसेट अलोकेशन
- केवल “पिछला रिटर्न” देखकर फंड चुनना बहुत बड़ा जाल है। पिछले 3–5 साल के हाई रिटर्न वाले कई फंड अगले 5 साल में एवरेज या खराब भी हो सकते हैं, क्योंकि थीम बदल जाती है।
- एक Distributor या Planner कैटेगरी–वाइज़ आपके लिए सही मिक्स बनाता है – लार्ज कैप, इंडेक्स, फ्लेक्सी–कैप, डेब्ट आदि – ताकि आपका पोर्टफोलियो बैलेंस्ड हो, सिर्फ हाई रिटर्न के चक्कर में ओवर–रिस्की न हो।
- गोल–बेस्ड प्लानिंग
- SIP का मज़ा तब आता है जब उसे किसी लक्ष्य से जोड़ा जाए – रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई, घर, विदेश यात्रा आदि।
- Planner इन गोल्स की वैल्यू (आज की कीमत और भविष्य की) निकालकर, ज़रूरी SIP अमाउंट और अवधि तय करता है। इससे आप हवा में नहीं, प्लान के साथ निवेश करते हैं।
- मार्केट गिरने पर “हाथ पकड़ना”
- असली परीक्षा तब होती है जब मार्केट 20–30% गिरता है। उस समय बहुत से लोग SIP बंद कर देते हैं, या घबराकर बेच देते हैं, जबकि वहीं से आगे का बड़ा रिटर्न बनता है।
- एक अच्छा MFD/Planner ऐसे समय पर आपको डेटा दिखाकर, समझाकर, SIP जारी रखने की सलाह देता है; यही डिसिप्लिन लंबे समय में करोड़ों की वैल्यू बना सकता है।
- Behavioural coaching – सबसे बड़ा वैल्यू एड
- Studies दिखाती हैं कि इन्वेस्टर का खुद का बिहेवियर (डर, लालच, घबराहट) उसकी रिटर्न को फंड की रिटर्न से भी ज़्यादा प्रभावित करता है।
- Distributor/Planner आपको ट्रेंड के पीछे भागने से रोकते हैं, लॉन्ग–टर्म फोकस याद दिलाते हैं और बार–बार फंड बदलने की आदत पर कंट्रोल करवाते हैं।
- कमीशन वाकई “ज़्यादा” नहीं होता
- आजकल ज़्यादातर MFD को upfront के बजाय “ट्रेल कमीशन” मिलता है, जो हर साल आपके AUM पर छोटी सी % में होता है और TER में शामिल होता है।
- अगर Planner की वजह से आप SIP बरकरार रखते हैं, गलत प्रोडक्ट से बचते हैं और सही एसेट मिक्स रखते हैं, तो 0.5–1% की कॉस्ट के बदले 2–4% तक अतिरिक्त effective रिज़ल्ट मिल सकता है, खासकर behaviour के कारण।
इसलिए, “कमीशन मत दो, Direct ही लो” वाला नज़रिया सिर्फ एक पहलू देखता है – कॉस्ट – जबकि वेल्थ क्रिएशन में Process, Discipline, Behaviour और Right Advice ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।
जो लोग कहते हैं SIP नहीं करनी चाहिए – उनके लिए कुछ ज़रूरी बातें
SIP के खिलाफ बोलने वालों के कुछ आम तर्क और उनका जवाब:
- “SIP से बहुत कम रिटर्न मिलता है”
- अगर आप 1–3 साल का पीरियड देखते हैं, तो हाँ, रिटर्न कभी भी बहुत कम या नेगेटिव भी हो सकता है।
- लेकिन Nifty 50 TRI के 7–10 साल के रोलिंग डेटा से साफ़ है कि इतने लंबे समय में पॉज़िटिव और डबल–डिजिट रिटर्न की संभावना बहुत ऊँची हो जाती है।
- “लंपसम से ज़्यादा पैसा बनता है, SIP बेकार है”
- अगर आप बिल्कुल सही समय पर मार्केट लो पकड़ सकें, तो लंपसम बेहतर हो सकता है, लेकिन practically ये लगभग असंभव है।
- SIP आपके लिए मार्केट टाइमिंग की इस चिंता को खत्म कर देती है, आप औसत प्राइस पर यूनिट खरीदते हैं और behaviourally शांत रहते हैं।
- “मैं खुद शेयर चुनूँगा, SIP क्यों?”
- Direct equity से बहुत अच्छा पैसा बन सकता है, लेकिन इसके लिए रिसर्च, अकाउंटिंग, सेक्टर समझ, बैलेंस शीट, वैल्यूएशन सब जानना पड़ता है।
- Index fund SIP में आप पूरे मार्केट (Nifty 50) की ग्रोथ पकड़ते हैं, रिस्क डाइवर्सिफाई होता है और एक औसत इंवेस्टर के लिए ये ज़्यादा practical और सुरक्षित तरीका है।
- “Distributor सिर्फ कमीशन खाता है”
- गलत प्रोडक्ट बेचने वाले लोग हर इंडस्ट्री में होते हैं, पर इससे पूरी इंडस्ट्री खराब नहीं हो जाती।
- SEBI के रेगुलेशन, डिस्क्लोज़र, TER लिमिट और ट्रांसपेरेंसी के कारण आज MFD/Planners पर काफी निगरानी है; सही एडवाइजर चुनने पर आपको जबरदस्त वैल्यू मिलता है।
निष्कर्ष की जगह एक छोटी सी प्रेरक कहानी
मान लीजिए दो दोस्त हैं – राहुल और अजय।
- राहुल ने 25 की उम्र से Nifty 50 इंडेक्स फंड में 5,000 रुपये की SIP शुरू की, हर साल 10% Step-up रखा, और 20–25 साल तक इसे छुआ भी नहीं।
- अजय हर साल सोचता रहा – “मार्केट अभी महंगा है, SIP बेकार है, मैं सही समय आने पर लंपसम लगाऊँगा, या खुद स्टॉक चुनूँगा।”
डेटा बताता है कि राहुल जैसा निवेशक, Nifty जैसे ब्रॉड मार्केट इंडेक्स में 12–14% के आसपास लंबी अवधि में रिटर्न पाकर, करोड़ों के करीब पहुँच सकता है, जबकि अजय जैसा व्यक्ति अक्सर या तो कैश में बैठा रह जाता है, या गलत समय पर घबराकर गलत फैसले लेता है।
अंतर सिर्फ इतना है:
- राहुल ने SIP + Step-up + Discipline + सही सलाह (Distributor/Planner) को अपनाया।
- अजय ने सिर्फ “राय” सुनी, “डेटा” नहीं देखा।
जो लोग कहते हैं “SIP नहीं करनी चाहिए”, उन्हें Nifty 50 के 10–15 साल के रिटर्न, SIP स्टडीज़, और Step-up SIP के असर के असली आंकड़े देख लेने चाहिए – कहानी खुद–ब–खुद बदल जाएगी।







