मिडिल क्लास की सबसे बड़ी गलती
- मिडिल क्लास की अधिकतर बचत बैंक के सेविंग अकाउंट और FD में जाती है, जहां ब्याज आम तौर पर 2.5% से लगभग 7–8% सालाना के बीच रहता है (बैंक और स्कीम पर निर्भर).
- महंगाई (इन्फ्लेशन) अगर मान लो 6–7% के आसपास है, तो 3–4% पर मिलने वाला ब्याज असल में रियल टर्म में लगभग 0 या माइनस के बराबर हो जाता है, यानी कागज़ पर पैसा बढ़ रहा है पर असल खरीदने की ताकत घट रही है.
- ऊपर से FD के ब्याज पर टैक्स भी देना पड़ता है, जिससे नेट रिटर्न और कम हो जाता ह
बैंक पैसे से पैसा कैसे बनाते हैं
- बैंक आपके जैसे करोड़ों लोगों का पैसा जमा लेते हैं – सेविंग अकाउंट पर बहुत कम, और FD पर थोड़ा ज़्यादा ब्याज देने का वादा करते हैं.
- उसी पैसों का बड़ा हिस्सा लोन देने और अलग–अलग फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने में लगाते हैं, क्योंकि नियमों के हिसाब से उन्हें सिर्फ एक हिस्सा रिज़र्व में रखना होता है.
- होम लोन, पर्सनल लोन, बिज़नेस लोन पर बैंक 8–12% या उससे अधिक ब्याज वसूल करते हैं, जबकि आम जमा पर उससे बहुत कम चुकाते हैं; यही ब्याज का अंतर बैंक का बड़ा प्रॉफिट है.
FD और EMI का उल्टा खेल
- एक तरफ बैंक FD पर आम ग्राहक को 2.5–8% जैसी रेंज का ब्याज देते हैं, जो कि सुरक्षित तो है, लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं.
- दूसरी तरफ वही बैंक होम लोन पर 8.5–10% या उससे ऊपर तक ब्याज लेते हैं, यानी जो पैसा आपने FD में रखा, उसी पैसे से बैंक किसी को घर का लोन देकर आपसे ही ज़्यादा ब्याज कमा रहा है.
- मिडिल क्लास अक्सर यह सोचकर EMI में फंस जाता है कि “किराये से अच्छा है EMI”, पर 20–25 साल तक दिया गया ब्याज मिलाकर देखो तो कई बार घर की मूल कीमत से बहुत ज़्यादा चुका दिया जाता है.
सिर्फ FD और EMI क्यों ग़लत हैं
- सिर्फ सेविंग अकाउंट और FD पर निर्भर रहना पैसा “पार्क” करना है, “बढ़ाना” नहीं; इससे सुरक्षा तो मिलती है पर वेल्थ नहीं बनती.
- EMI का बड़ा हिस्सा शुरुआती सालों में सिर्फ ब्याज होता है, मूल रकम कम बहुत धीरे–धीरे होती है, इसलिए लंबे समय तक आप बैंक के लिये कैश मशीन बने रहते हैं.
- FD और EMI दोनों मिलकर एक ऐसा चक्र बना देते हैं जिसमें मिडिल क्लास को लगता है कि वह सुरक्षित और प्रोग्रेसिव है, जबकि असल में वह अपनी ज़िंदगी की सबसे ज़्यादा कमाई बैंक के ब्याज में दे देता है.
क्या करना ज़्यादा समझदारी है
- इमरजेंसी फंड: 6–12 महीनों के खर्च के बराबर धन हाई–क्वालिटी FD या सेविंग में रखना ठीक है; यह सुरक्षा के लिये है, न कि अमीरी के लिये.
- लंबे समय के लक्ष्य (रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई आदि) के लिये पूरी बचत FD में रखने के बजाय कुछ हिस्सा ऐसी स्कीमों/मार्केट–लिंक्ड निवेश में लगाना चाहिए जो महंगाई से ज़्यादा रिटर्न की संभावना दें.
- घर खरीदने से पहले EMI–to–income रेशियो, लोन अवधि और कुल ब्याज को अच्छे से समझना ज़रूरी है; छोटी अवधि, थोड़ा बड़ा EMI और ज़्यादा डाउन पेमेंट रखने से कुल ब्याज बहुत कम हो सकता है.









