“शादी करने का मन नहीं, पर घरवाले डरते हैं कि बुढ़ापे में कौन संभालेगा?”

महाराज जी से प्रश्न किया गया कि “शादी करने का मन नहीं, पर घरवाले डरते हैं कि बुढ़ापे में कौन संभालेगा?” इस पर महाराज जी ने जवाब दिया.


डर की जड़ कहाँ है?

हरिवंश महाराज जी से प्रश्न करने वाली आत्मा की स्थिति भी यही थी: विवाह में कोई रुचि नहीं, विरक्त जीवन, वृंदावन में वास; लेकिन भीतर से डर – “बुढ़ापे में कौन देखेगा, कौन संभालेगा?”[youtube]​
महाराज जी इस डर की जड़ को दो हिस्सों में बाँटते हैं: शरीर की चिंता (बीमारी, सेवा, अकेलापन) और साधना की चिंता कि “अगर निरंतर भजन न हुआ, जीवन चूक गया तो?”[youtube]​


महाराज जी का अपना जीवन-साक्ष्य

महाराज जी बहुत व्यक्तिगत अनुभव सुनाते हैं: एक समय ऐसा आया जब शरीर इतनी कमजोरी में था कि खुद उठकर पानी तक नहीं ले सकते थे, रोटी मांगकर खानी पड़ती थी, दवा के भी पैसे नहीं थे, और पास में एक भी मनुष्य नहीं था जो सेवा कर सके।[youtube]​
उसी समय बचपन वाले गुरु-आश्रम के गांव वालों को जब पता चला, तो गाड़ी भरकर लोग आए; बोले, “आप हमारे साथ चले चलिए, पूरा गांव चंदा लगाकर लाखों की दवा भी चल जाए तो भी हम सेवा करेंगे, आप चिंता न करें।”[youtube]​

महाराज जी का उत्तर कड़ा लेकिन भीतर से करुण था: “यदि मरना है तो प्रभु के लिए; जीना है तो प्रभु के लिए। धाम नहीं छोड़ेंगे, निष्ठा नहीं छोड़ेंगे, आप लोग जाइए, आभार है आपकी सहानुभूति का।”[youtube]​
इसी संकल्प, इसी समर्पण के बाद जो परिवर्तन हुआ, उसे वे उदाहरण बनाकर हमारे सामने रखते हैं:

  • जो एक समय रोटी मांगने पर भी पेट भर नहीं खा पाते थे, आज उनके यहाँ प्रतिदिन 500 लोगों का बाल-भोग, 500 का राजभोग, 500 का शयन-भोग बनता है।[youtube]​
  • पहले अकेले पानी तक न मिलता था, आज “एक बच्चा पानी पिलाता है, दूसरा मुंह पोंछता है”, सैकड़ों युवक-युवतियाँ सरकारी नौकरियाँ छोड़कर सेवा में लगे हैं, और सेवा करने के लिए एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं।[youtube]​

महाराज जी यह कहकर चोट करते हैं: “अपना पैदा किया हुआ बेटा भी सेवा नहीं करना चाहता, और ये दूसरे बाप से पैदा हुए बच्चे हमारे लिए जीवन दे रहे हैं – यह सब भगवान का खेल है।”[youtube]​


“बुढ़ापे में कौन संभालेगा?” – इसका उत्तर

आपके सवाल का सीधा उत्तर महाराज जी कई पंक्तियों में देते हैं:

  • “हमें पहली बात तो यह नहीं सोचना चाहिए कि बुढ़ापे में मेरी सेवा कौन करेगा।”[youtube]​
  • “जिसके लिए हमने जवानी दी, वही बुढ़ापे में आएगा। हमारा लड़का-बच्चा थोड़ी है, हमारा परिवार थोड़ी है; जो सच्चिदानंद भगवान हैं, उनकी शरण में जो है, वही देखेंगे।”[youtube]​

वे एक बड़ी सच्चाई भी रख देते हैं:

  • मान लो विवाह हो भी गया, पति/पत्नी पहले चले गए, तो फिर भी अकेलापन और दुःख संभव है; यदि भाग्य में दुःख लिखा है तो कितने भी प्रयास कर लो, मिलेगा दुःख ही।[youtube]​
  • यदि भाग्य में सुख है, और हम भगवान की शरण में हैं, तो वे सुख का मार्ग स्वयं बना देते हैं।[youtube]​

इसका अर्थ यह नहीं कि परिवार या विवाह तुच्छ है, बल्कि यह कि “गारंटी” न तो पति देता है, न बेटा, न समाज; जो भी निभाता है, अंततः वही “अदृश्य हाथ” है – ईश्वर का।[youtube]​


भरोसा, समर्पण और मानवीय कमजोरी

महाराज जी “भरोसो दृढ़ इन चरणन केरो” की पंक्ति बार–बार दोहराते हैं – प्रभु के चरणों पर दृढ़ भरोसा।[youtube]​
वे साफ कहते हैं:

  • जब मन में यह प्रश्न उठे कि “मेरी वृद्धावस्था में कौन सेवा करेगा?”, तो समझो कि अभी भरोसा डोल रहा है।[youtube]​
  • जिसने जीवन भगवान को दे दिया, उसके लिए यदि तड़प-तड़पकर मरने का अवसर भी आए, तो वह भी “राधा-राधा पुकारते हुए” ईश्वर के नाम में समर्पित मृत्यु होगी; ऐसा जीवन भी व्यर्थ नहीं होता।[youtube]​

यहाँ बात सिर्फ चमत्कार की नहीं, “मानवीय सचाई” की भी है:

  • जो सच्चे मन से, ईमानदारी से, बिना स्वार्थ के भगवान के लिए जीता है, उसके लिए भगवान अनेक रूपों में आकर व्यवस्था कर देते हैं – कभी सेवक बनकर, कभी बेटे की तरह, कभी शिष्य की तरह, कभी अपरिचित दानदाता बनकर।[youtube]​
  • वे जगन्नाथ जी के भक्त माधवदास बाबा की कथा से इसे समझाते हैं: वृद्धावस्था, कब्ज की बीमारी, अकेलापन, बेहोशी – और जब आँख खुलती है, तो देखते हैं कि स्वयं पीताम्बरधारी प्रभु उनकी लंगोटी समुद्र में धोकर फैला रहे हैं; भगवान कहते हैं, “जब तुम्हारा कोई है नहीं, तो हम ही तो हैं।”[youtube]​

यह कथा हमें यह मानवीय साहस देती है कि “अकेलापन” जितना बाहर का भय है, उससे कहीं बड़ा भीतर के अविश्वास का भय है।[youtube]​


शरीर नश्वर है, भीतर का तत्व अजर है

अंत में महाराज जी एक दार्शनिक, पर बहुत मानवीय बात कहते हैं:

  • यह शरीर आज है, कल नहीं; इस पर भरोसा “धोखे का भरोसा” है।[youtube]​
  • जो अंदर तत्व है – चेतना, आत्मा – वह था, है और रहेगा; वही श्रीजी का निज स्वरूप, वही निज जन है।[youtube]​

इससे आपके प्रश्न को एक और आयाम मिलता है:

  • घरवाले जिस बुढ़ापे से डरते हैं, वह शरीर का बुढ़ापा है; परंतु आपकी आत्मा की यात्रा इससे बहुत बड़ी है।[youtube]​
  • यदि आपका मन सच में विवाह की ओर नहीं जाता, और भीतर से भजन, सेवा, आध्यात्मिक जीवन की पुकार है, तो डर का उत्तर “जबर्दस्ती शादी” नहीं, बल्कि “दृढ़ विश्वास, ईमानदार साधना, और अपने निर्णय की जिम्मेदारी उठाने वाला साहस” है।[youtube]​

आपके लिए एक मानवीय संदेश

महाराज जी की बातों से निकलता हुआ एक सरल, मानवीय निष्कर्ष यह है:

  • अपने मन की पुकार को ईमानदारी से पहचानिए – यदि वास्तव में वैराग्य है तो उसे गहराई, अनुशासन और सद्गुरु की शरण से सन्मार्ग दीजिए, केवल “शादी से भागने” के लिए वैराग्य की भाषा न अपनाइए।[youtube]​
  • घरवालों के डर को भी सम्मान दीजिए; वे आपको अकेला नहीं देखना चाहते, इसलिए डरते हैं – उन्हें प्रेम से, धैर्य से, बार–बार समझाइए कि आप जिम्मेदार हैं, अपनी वृद्धावस्था की व्यावहारिक व्यवस्था (आर्थिक, स्वास्थ्य, साथ–संग) के लिए भी सोच रहे हैं, सिर्फ भावुकता से नहीं।[youtube]​

महाराज जी की वाणी यह सिखाती है कि जो भी निर्णय लें – विवाह या अविवाह – उसे “भगवान के भरोसे” और “सच्चाई से” लें; तब वही भगवान, समय आने पर, मनुष्य–मनुष्य के रूप में, बेटे–बेटी, शिष्य–मित्र–डॉक्टर, या किसी अनजान सज्जन की तरह आकर आपकी सेवा का प्रबंध कर देते हैं।[youtube]​

इसलिए प्रश्न को इस तरह बदलने की कोशिश कीजिए:
“मुझे बुढ़ापे में कौन संभालेगा?” की जगह
“मैं आज किसके भरोसे जी रहा हूं – केवल मनुष्य के, या सच में भगवान के भी?”

Related Posts

कुछ लोग पूजा पाठ नहीं करते फिर भी सफल क्यों हैं – प्रेमानंद जी महाराज का भजन मार्ग उपदेश

कुछ लोग पूजा‑पाठ नहीं करते हुए भी सफल दिखते हैं – इस पूरे प्रवचन में महाराज जी इसका उत्तर कर्म, प्रारब्ध, पुरुषार्थ और नाम‑श्रद्धा के सिद्धांत से देते हैं। नीचे…

Continue reading
साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण सत्संग! कृपा का आश्रय तो लें पर यह गलती न करें! Bhajan Marg

भूमिका: साधक की सबसे बड़ी भूल क्या है? हठ, अभ्यास और नाम–जप की दृढ़ता प्रश्न: “महाराज जी, संकल्प भी बनता है, उत्साह भी आता है कि नाम‑जप करेंगे, पर मन…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

2026 में लाखों कमाने वाली स्किल्स : Ankur Warikoo

2026 में लाखों कमाने वाली स्किल्स : Ankur Warikoo

इस भक्त ने भोजन क्यों त्याग दिया? गौमाता के लिए अद्भुत त्याग की भावनात्मक कथा

इस भक्त ने भोजन क्यों त्याग दिया? गौमाता के लिए अद्भुत त्याग की भावनात्मक कथा

कुछ लोग पूजा पाठ नहीं करते फिर भी सफल क्यों हैं – प्रेमानंद जी महाराज का भजन मार्ग उपदेश

कुछ लोग पूजा पाठ नहीं करते फिर भी सफल क्यों हैं – प्रेमानंद जी महाराज का भजन मार्ग उपदेश

गजेन्द्र कोठारी कौन हैं और उनकी 100 करोड़ वाली सोच क्या है?

गजेन्द्र कोठारी कौन हैं और उनकी 100 करोड़ वाली सोच क्या है?

₹20,000 SIP से 1 करोड़ तक: इस कपल की म्यूचुअल फंड स्ट्रैटेजी और फाइनेंशियल प्लानर के रूप में MFD की भूमिका

₹20,000 SIP से 1 करोड़ तक: इस कपल की म्यूचुअल फंड स्ट्रैटेजी और फाइनेंशियल प्लानर के रूप में MFD की भूमिका

साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण सत्संग! कृपा का आश्रय तो लें पर यह गलती न करें! Bhajan Marg

साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण सत्संग! कृपा का आश्रय तो लें पर यह गलती न करें! Bhajan Marg