पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है

पत्नी से हमेशा ही प्रतिकूलता मिलती है, जिससे मन बहुत परेशान है

हम क्यों अनुकूलता पत्नी से मांगे, हम अनुकूलता उसको देंगे. हम पति है. हम अनुकूलता देंगे, अपने आप अनुकूल ना हो तो बताना. अनुकूलता की मांग ही प्रतिकूलता पैदा करती है. तू पत्नी है, तेरा कर्तव्य यह है. यह मांग ही परेशानी पैदा कर देगी.

मैं तुम्हारा पति हूँ. मैं अपने कर्तव्य में रहूँगा. तुम जितना चाहे विरोध कर लो. मैं आपको सुख पहुचाऊंगा. मैं अपने कर्तव्य का पालन करूंगा. वो अभी अधीन ना हो जाए तो बताना.

पर अब आप ऐसे आचरण करो जो उसकी भावना के विरुद्ध हो तो प्यार क्या, द्वेष हो जाएगा.

आपकी पत्नी के साथ आपका प्रतिकूलता का क्या विषय है ?

प्रश्नकर्त्ता- जैसे छोटी छोटी बात पर राजी ना होना.

महाराज जी- उसका ना राजी होना या आपका राजी ना होना. देखो बड़े आप हो, आपने ऐसे (हाथ आगे कर) पाणी ग्रहण संस्कार जब होता है ना, तो पत्नी का ऊपर होता है और पति का नीचे होता है. वो तुम्हारे घर आई तुम उसके घर नहीं गए. तुम उसको अपने घर ले आये हो, तो आपको उसकी बात समझनी होगी, अगर ऐसी कोई बात धर्मविहीन हो, तो आप उसे प्यार से समझाओ, अभी नहीं समझ पा रही, थोड़ी देर बाद फिर समझा दो फिर समझा दो, नहीं समझ रही तो कल समझ जाएगी, परसों समझ जाएगी, प्यार में बहुत दम है.

हम आप से इतना कहेंगे, आप गलत ना हो प्यार सच्चा हो तो एक दिन पत्नी का दिल है जरुर पिघलेगा. हाँ अगर अब बहुत ही कोई व्याभिचारिणी हो तो हम नहीं कहते हैं, नहीं तो ऐसा नहीं है छोटी-छोटी बातों में हमको झुकना पड़ेगा, क्योंकि हम उसको लेकर आये है. हमने पानी ग्रहण किया है तो आपको फिर अनुकूलता देनी पड़ेगी, आपको उसकी कामनाओं की पूर्ति करनी पड़ेगी वह आपकी शरण में है. हां कुछ ऐसे आचरण है अब जैसे परपुरुष से व्याभिचार तो फिर हम इस पर हमारा धर्म नहीं कहता. हम इस पर फिर हट जाएंगे. क्या आपका ऐसा कोई विषय है.

प्रश्नकर्त्ता- नहीं.

महाराज जी- तो कोई कितना भी कड़वा हो हमें उसका पालन पोषण करना चाहिए. आप जो करते हो, अगर उनको संतुष्टि नहीं होती है चलो आज नहीं तो कल हो जाएगी क्योंकि आप धर्म से चल रहे हो. आप इधर-उधर किसी माता बहन को तो नहीं देखते.

प्रश्नकर्ता- नहीं

तो बस देख लेना हमारी बात मान लेना, धर्म में बड़ी ताकत है, एक दिन वह आपके अनुकूल हो जाएगी, क्योंकि आप धर्म से चल रहे हैं और उसकी अनुकूलता देना चाहते हैं तो कभी ना कभी समझ आएगी अभी प्रारब्ध भोग है, भुगत लोंगे. वही आपको सुख देने लगेगी पर धर्म से विचलित मत होना, कभी मारना पीटना नहीं, कभी गाली गलौज मत करना और बहुत धैर्य से चलो, गृहस्थी परम पवित्र भगवान की प्राप्ति का बढ़िया मार्ग है, यह किले की लड़ाई है, बाबा जी तो चौड़े की लड़ाई है. मैदान में काम क्रोध को परास्त करना होता है और गृहस्थी में किले की लड़ाई है अंदर से व्यवस्थित होकर इन विकारों पर विजय प्राप्त करके भगवान की प्राप्ति करना.

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