सही जीवन साथी कैसे ढूंढे ?

प्रश्न-मेरे माता पिता मेरे लिए लड़का ढूंढ रहे है, मुझे मार्गदर्शन चाहिए कि मुझे किस तरह अच्छा लड़का मिल सकता है, आजकल बहुत धोखा हो रहा है, मेरे मन में डर लगा रहता है।

महाराज जी –

हंसाी की बात तो यह है कि इस चैप्टर में हम गए नहीं। हम जानते ही नहीं है।

वैसे तुम्हारा प्रश्न बहुत विचारणीय प्रश्न है , क्योंकि आज कल के बच्चे और बच्चियां चरित्र का महत्व ही नहीं समझ रहे हैं।

नई पीढ़ी कहां जा रही है ?

ब्वॉय फ्रेंड, गर्ल फ्रेंड ब्रेकअप, दूसरा ब्वॉय फ्रेंड, गर्ल फ्रेंड। इससे चरित्रहीनता हो रही है। यह नया समाज नहीं है। इसको गंदा कर रहे हो तो तुम आगे कैसे बढ़ पाओंगे। कैसे तुम्हारा गृहस्थ धर्म चलेगा। तुम कैसे किसी को पति के रूप में वर्ण कर पाऊंगी। तुम कैसे किसी पत्नी को अर्धांगिनी मान लोंगे।

हमें 11 वर्ष से कभी तलाक षब्द की जानकारी नहीं थी। अब माता पिता से कोई बात ही नहीं करते है। वे बहु बेटा से कुछ पूछ ले तो डांट देते है। अगर माता पिता डांटना चाहे तो वे बोलेगी छोड़ करके चले जाएंगे या शरीर नष्ट कर लेंगे। अब क्या बोलेंगे।

छोटे बच्चे बच्चियां नशा करने लगे। आजकल विवाह के बाद की बातें 13 साल के बच्चे को पता होती है। हम कैसे कहे कि तुम्हे पवित्र, वैष्नव, अच्छा पति मिल जाए। भगवान ही कोई ऐसा खोज कर दें। या फिर आपका भजन, आपकी पवित्रता ऐसा प्रमाण होगी कि आपको ऐसा पति मिल जाए।

कौन ऐसा है जो शराब नहीं पीता, कौना ऐसा है जो व्यसन नहीं करता। कौन ऐसा है जो व्यभिचार रहित है, एक संयम में चल रहा है। कहां है। कोई बिरला ही होगा।

चरित्र का महत्व

हम तभाी आशा रखें आपको सुधारने कि जब हम सुधरे हो। ऐसे ही आप धर्म के अनुसार नहीं है तो अच्छा वर असंभव है। छोटे छोट बच्चों में इतनी बुद्धिमता, इतने प्रवीण है लेकिन गंदे मार्ग पर यह बुद्धि लगाते हैं। जिसका चरित्र ठीक नहीं वो कुछ भी नहीं कर सकता। हैलोजन लाइट की तरह भले कुछ दिनों तक चमकोगे लेकिन एक दिन फ्यूज हो जाओंगे और चरित्र ठीक है तो दीपक की तरह भले जलो लेकिन लंबे समय तक तुम्हारी यक्ष, कीर्ति, सुख समृद्धि रहेगी। यह चरित्रहीनता बच्चों में रही है उसे हम सुधारे तो सुधर सकता है। पहले हम अपने को सुधारे।

लिव इन रिलेशनशीप

आजकल एक ओर चला है लिव इन रिलेशनशीप, महीना दो महीना रहो फिर कहते है कि हमें पसंद नहीं । आपने बनिया की दुकान या सामान समझ रखा है। क्या यह विचार हो रहे है। क्या यह सिद्धांत है। यह विदेष नहीं है, यह भारत है। यह धर्मगुरूओं का भारत है। यही पवित्रता देखकर के दूसरे भारत आकर झुकते हैं। हमारे यहां अर्जंेटीना से एक बच्ची आई थी, वो और उसकी मां पूरे षरीर को ढका था। भारतीय वेषभूषा में थी और हम उनकी नकल कर रहे हैं। हम अपने धर्म और रहनी को छोटा मान रहे हैं। हमारा समाज उन्नति के नाम पर पतन में जा रहा है। सबके हृदय में लड़ाई झगड़ा दोष देखने को मिलता है। छोटे से बच्चे अपने माता पिता से बदतमीजी से बात करते हैं, क्या यह जीवन में उन्नति करेंगे। अरे विद्या पढ़के तो आपमें विनय आनी चाहिए, झुकना आना चाहिए।

हम यही प्रार्थना करते है कि अपने बच्चों का बचाए। माता पिता सहयोग नहीं करोंगे तो हमारे प्रवचनों का कोई फायदा नहीं। बच्चों से मित्रवत व्यवहार करो। उनको समझाने की चेष्टा करो, तुम जिधर जा रहे हो वो बहत गंदा मार्ग हैं। माता पिता अपने बच्चों में किसी तरह बैठाए कि बह्मचर्य नाश करना जीवन का नाश करना है। विवाह से पहले शरीर का भोग परम सुख नहीं है। भगवान का नाम निरंतर जपो वो परम सुख है। बड़े बड़े विदेश के महापुरूष भारत के संतों के चरणों में बैठते है। विष्व ब्रह्मांड में कहीं भी मोक्ष की चर्चा नहीं है, यह सिर्फ भारत में है। जितेंद्रियता और पतिव्रत सिर्फ भारत में मिलेगा। कहीं नहीं मिलेगा। भारत धर्म देष है। भारतीय ऋषि मुनियांे से दीक्षा लेकर विदेषों में कीर्तन कर रहे हैं। उनको भी परम पद मिलेगा। विदेषी चोटी, धोती, साड़ी को सम्मान समझते है और हम इसे अपमान समझते हैं। पढ़ लिखकर बड़े पदाधिकारी बने। उद्देष्य रहेगा धन तो सेवा का भाव नहीं रहेगा तो ऐसे पाप बनेंगे कि आगे जाकर दुर्गति होगी। समाज सुझरना चाहे तो सुधर ले लेकिन अब कोई चांस नहीं है।

निष्कर्ष

इसलिए अभी समय है अपने जीवन को पवित्र रखो, गृहस्थ और विरक्त धर्म भगवान की प्राप्ति का मार्ग हैं। अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए नाम जप करो, भगवान प्रसन्न हो जाएंगे। हमें इस माया से मुक्त कर देंगे।

सोचो अगर आपको पता चले कि आपने जिससे विवाह किया है वो कपटी है, व्यभिचारी है। अब आप क्या करोंगे ? आप इसे प्रकाषित करते हो तो पवित्रता का नाष। सबकुछ ठीक हो जाए कि चरित्र ठीक हो जाए। भगवान का नाम और भगवान की महिमा चमत्कार कर सकती है। चार चीजे ध्यान रखना-भगवान का नाम, भगवान के रूप, भगवान की लीला और भगवान का धाम। जहां यह चर्चा नहीं हो वहां छल, कपट और पाखंड का राज होगा। बिल्कुल बचो। पैसे बचने से दुख दूर नहीं होगा। सच्चे आचरण में उतरो, भगवान से क्षमा मांगो और भगवान का नाम जप करो। सब दुख मिट जाएंगे। इस जन्म के नहीं, अनेक जन्म के मिट जाएंगे। हमें भगवान का प्राप्ति करनी है। चरित्र ठीक करो, भगवान के आश्रित रहो, भगवान का नाम जप करो। ऋद्धि सिद्धियां आपके चरणों में लौट जाएगी।

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