परिवारके बड़े-बूढ़ों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये ?

प्रश्न – परिवारके बड़े-बूढ़ों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये ?

उत्तर- बड़ों को सुख-आराम देना, उनकी सेवा करना, उनको बड़प्पन देना, उनका आदर करना, उनकी आज्ञाका पालन करना, उनके शासनमें रहना- यह छोटोंका कर्तव्य है। परन्तु यह खुद बड़ोंका कर्तव्य नहीं है अर्थात् हम बड़े हैं, पूजनीय हैं, आदरणीय हैं- ऐसा मानना बड़ोंका काम नहीं है। कारण कि ऐसा भाव रहनेसे दूसरोंके हृदयमें उनके प्रति आदरभाव कम होता है और आगे चलकर उनका निरादर होने लगता है। अतः बड़ोंका भाव तो सबका पालन-पोषण करनेका, कष्ट सहनेका, छोटोंको सुख- सुविधा देनेका ही होना चाहिये। छोटों और बड़ोंका इस प्रकार भाव होनेसे सम्पूर्ण परिवार एवं समाज सुखी होता है।

यह लेख गीता प्रेस की मशहूर पुस्तक “गृहस्थ कैसे रहे ?” से लिया गया है. पुस्तक में विचार स्वामी रामसुख जी के है. एक गृहस्थ के लिए यह पुस्तक बहुत मददगार है, गीता प्रेस की वेबसाइट से यह पुस्तक ली जा सकती है. अमेजन और फ्लिप्कार्ट ऑनलाइन साईट पर भी चेक कर सकते है.

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