नौकर के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये ?

प्रश्न- नौकरके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये ?

उत्तर- नौकरके साथ अपने बालककी तरह बर्ताव कर घरम चाहिये। नौकर दो तरहसे रखा जाता है- (१) नौकर तात्प तनखाह भी देते हैं और भोजन भी। (२) नौकरको केव पाल यह तनखाह देते हैं, भोजन वह अपने घरपर करता है। जो नौक है, तनखाह भी लेता है और भोजन भी करता है, उसके साथ भोजनों अप विषमता नहीं करनी चाहिये। प्रायः घरोंमें नौकरके लिये ती बना नम्बरका, घरके सदस्योंके लिये दो नम्बरका और अपने पतिः बिन पुत्रके लिये एक नम्बरका भोजन बनाया जाता है तो यह तीन तरहका भोजन न बनाकर एक तरहका ही भोजन बनाना चाहिये। भोजन मध्यम दर्जेका बनाना चाहिये और सबको देना चाहिये। समयपर कोई भिक्षुक आ जाय तो उसको भी देना चाहिये। से

जो नौकर केवल तनखाह लेता है, भोजन नहीं करता, वह – जैसा उचित समझे, बनाये और खाये। परन्तु हमारे घरपर कभी विशेषतासे मिठाई आदि बने तो नौकरके बाल-बच्चोंको देनी चाहिये। विवाह आदिमें उसको कपड़े आदि देने चाहिये। उसको तनखाह तो यथोचित ही देनी चाहिये, पर समय-समयपर उसको इनाम, कपड़ा, मिठाई आदि भी देते रहना चाहिये। अधिक तनखाहका उतना असर नहीं पड़ता, जितना इनाम आदिका असर पड़ता है। नौकरको इनाम आदि देनेसे देनेवालेके हृदयमें उदारता आती है और आपसमें प्रेम बढ़ता है, जिससे वह समयपर चोर-डाकू आदिसे हमारी रक्षा भी करेगा; विवाह आदिके अवसरपर वह उत्साहसे काम करेगा।

यह लेख गीता प्रेस की मशहूर पुस्तक “गृहस्थ कैसे रहे ?” से लिया गया है. पुस्तक में विचार स्वामी रामसुख जी के है. एक गृहस्थ के लिए यह पुस्तक बहुत मददगार है, गीता प्रेस की वेबसाइट से यह पुस्तक ली जा सकती है. अमेजन और फ्लिप्कार्ट ऑनलाइन साईट पर भी चेक कर सकते है.

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