पति और पत्नी का आपस में कैसा व्यवहार होना चाहिये ?

प्रश्न – पति और पत्नी का आपस में कैसा व्यवहार होना चाहिये ?

उत्तर-पति का यही भाव रहना चाहिये कि यह अपने माता-पिता, भाई आदि सबको छोड़कर मेरे पास आयी है तो सने कितना बड़ा त्याग किया है। अतः इसको किसी तरहका कष्ट न हो, शरीर-निर्वाहके लिये इसको रोटी, कपड़े, स्थान आदिकी कमी न हो, मेरी अपेक्षा इसको ज्यादा सुख मिले। ऐसा भाव रखनेके साथ-साथ उसके पातिव्रत-धर्मका भी खयाल रखना चाहिये, जिससे वह उच्छृंखल न बने और उसका कल्याण हो जाय।

पत्नी का यही भाव रहना चाहिये कि मैं अपने गोत्र और सब कुटुम्बियों आदिका त्याग करके इनके पास आयी हूँ तो समुद्र लाँघकर अब किनारे आकर मैं डूब न जाऊँ अर्थात् मैं इतना त्याग करके आयी हूँ तो अब मेरे कारण इनको दुःख न हो, इनका अपमान, निन्दा, तिरस्कार न हो। अगर मेरे कारण इनकी निन्दा आदि होगी तो बड़ी अनुचित बात हो जायगी। मैं चाहे कितना ही कष्ट पा लूँ, पर इनको किंचिन्मात्र भी कष्ट न हो। इस तरह वह अपने सुख-आरामका त्याग करके पतिके सुख-आरामका खयाल रखे; उनका लोक-परलोक कैसे सुधरे – इसका खयाल रखे।

यह लेख गीता प्रेस की मशहूर पुस्तक “गृहस्थ कैसे रहे ?” से लिया गया है. पुस्तक में विचार स्वामी रामसुख जी के है. एक गृहस्थ के लिए यह पुस्तक बहुत मददगार है, गीता प्रेस की वेबसाइट से यह पुस्तक ली जा सकती है. अमेजन और फ्लिप्कार्ट ऑनलाइन साईट पर भी चेक कर सकते है.

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