भाई और बहनका आपसमें कैसा व्यवहार होना (EN)

प्रश्न- भाई और बहनका आपसमें कैसा व्यवहार होना चाहिये ?

उत्तर- प्रायः भाईकी तरफसे ही गलती होती है। बहनकी तरफसे कम गलती होती है। अतः भाईका यह भाव रहना चाहिये कि यह सुआसिनी है, दयाकी मूर्ति है, इसका ज्यादा आदर, प्यार करना है। ब्राह्मणको भोजन करानेका जैसा पुण्य होता है, वैसा ही पुण्य बहन-बेटीको देनेका होता है।

सरकारने पिताकी सम्पत्तिमें बहनके हिस्सेका जो कानून बनाया है, उससे भाई-बहनमें लड़ाई हो सकती है, मनमुटाव होना तो बहुत मामूली बात है। वह जब अपना हिस्सा माँगेगी, तब बहन-भाईमें प्रेम नहीं रहेगा। हिस्सा पानेके लिये जब भाई-भाईमें भी खटपट हो जाती है, तो फिर भाई-बहनमें खटपट हो जाय, इसमें कहना ही क्या है। अतः इसमें बहनोंको हमारी पुरान रिवाज (पिताकी सम्पत्तिका हिस्सा न लेना) ही पकड़नी चाहिये आश्र जो कि धार्मिक और शुद्ध है। धन आदि पदार्थ कोई महत्त्वक वस्तुएँ नहीं हैं। ये तो केवल व्यवहारके लिये ही हैं। व्यवहा भी प्रेमको महत्त्व देनेसे ही अच्छा होगा, धनको महत्त्व देने नहीं। धन आदि पदार्थोंका महत्त्व वर्तमानमें कलह करानेवाला रसो और परिणाममें नरकोंमें ले जानेवाला है। इसमें मनुष्यता नहीं है। जैसे, कुत्ते आपसमें बड़े प्रेमसे खेलते हैं, पर उनका खेल तभीतक कर है, जबतक उनके सामने रोटी नहीं आती। रोटी सामने आते हो भि उनके बीच लड़ाई शुरू हो जाती है! अगर मनुष्य भी ऐसा ही करे तो फिर उसमें मनुष्यता क्या रही ?

धर्मको, अपने कर्तव्यको, भगवान् और ऋषियोंकी आज्ञाको और त्यागको महत्त्व देनेसे लोक-परलोक स्वतः सिद्ध हो जाते सेव हैं। परन्तु मान, बड़ाई, स्वार्थ आदिको महत्त्व देनेसे लोक- परलोक दोनों बिगड़ जाते हैं।

यह लेख गीता प्रेस की मशहूर पुस्तक “गृहस्थ कैसे रहे ?” से लिया गया है. पुस्तक में विचार स्वामी रामसुख जी के है. एक गृहस्थ के लिए यह पुस्तक बहुत मददगार है, गीता प्रेस की वेबसाइट से यह पुस्तक ली जा सकती है. अमेजन और फ्लिप्कार्ट ऑनलाइन साईट पर भी चेक कर सकते है.

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