क्या होम लोन के साथ बंधी बीमा पॉलिसी पर भरोसा किया जा सकता है? जानिए आपके अधिकार और सावधानियां

Keywords home loan insurance, home loan insurance claim rejection, group credit insurance, bundled insurance with loan, pre-existing disease insurance claim, diabetes insurance claim, IRDAI insurance guidelines, home loan protection, borrower insurance rights, HDFC Life insurance claim

क्या होम लोन के साथ बंधी बीमा पॉलिसी पर भरोसा किया जा सकता है? जानिए आपके अधिकार और सावधानियां

परिचय

भारत में घर खरीदते समय अक्सर बैंक या वित्तीय संस्थान लोन के साथ बीमा पॉलिसी भी बेचते हैं। इनका दावा होता है कि अगर लोन लेने वाले की मृत्यु हो जाए या गंभीर बीमारी हो जाए, तो बीमा कंपनी लोन की बकाया राशि चुका देगी और परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन क्या वास्तव में ये पॉलिसी उतनी भरोसेमंद हैं? हाल ही में कई मामलों में बीमा कंपनियों ने क्लेम रिजेक्ट कर दिए, जिससे परिवारों को दोहरी मुसीबत झेलनी पड़ी1

बीमा क्लेम रिजेक्शन के आम कारण

पूर्व-स्थित बीमारी (Pre-existing Disease) का खुलासा न करना:बीमा कंपनियां अक्सर यह आधार बनाकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं कि पॉलिसीधारक ने अपनी पूर्व-स्थित बीमारियों की जानकारी नहीं दी थी। उदाहरण के लिए, एक केस में HDFC Life ने डाइबिटीज और फैटी लिवर का हवाला देकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया, जबकि मृत्यु का कारण इनसे सीधे जुड़ा नहीं था1सिंप्लिफाइड फॉर्म और मेडिकल टेस्ट की कमी:लोन के साथ दी जाने वाली ग्रुप बीमा पॉलिसी में अक्सर केवल हां/ना वाले सवाल होते हैं और मेडिकल टेस्ट नहीं होते। ऐसे में बीमा कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरी जानकारी ले, वरना बाद में खुलासे की कमी का हवाला देकर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती1कानूनी और नियामकीय प्रावधान:सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर बीमा कंपनी ने पॉलिसी जारी करते समय मेडिकल टेस्ट या विस्तृत जानकारी नहीं मांगी, तो बाद में क्लेम रिजेक्ट करना उचित नहीं है। खासकर डाइबिटीज जैसी आम लाइफस्टाइल बीमारियों को आधार बनाकर क्लेम रिजेक्ट करना न्यायसंगत नहीं है1

ग्रुप क्रेडिट बीमा: क्या है और कैसे काम करता है?

ग्रुप क्रेडिट बीमा एक ऐसा प्रोडक्ट है जो लोन लेने वाले लोगों के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य है कि अगर लोनधारक की मृत्यु, गंभीर बीमारी या विकलांगता हो जाए, तो बीमा कंपनी लोन की बकाया राशि चुका दे। आमतौर पर यह पॉलिसी लोन के साथ ही दी जाती है और प्रीमियम लोन अमाउंट में जोड़ दिया जाता है1

क्लेम रिजेक्शन के खिलाफ आपके अधिकार

बीमा कंपनी की जिम्मेदारी:अगर बीमा कंपनी ने पॉलिसी जारी करते समय विस्तृत जानकारी या मेडिकल टेस्ट नहीं मांगे, तो वह बाद में जानकारी की कमी का हवाला देकर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, अगर सिंप्लिफाइड फॉर्म में ही पॉलिसी जारी कर दी गई, तो बीमा कंपनी ने उस रिस्क को स्वीकार कर लिया माना जाएगा1डाइबिटीज और हाईपरटेंशन पर कानून:दिल्ली स्टेट कमीशन और NCDRC जैसे उपभोक्ता फोरम ने भी कहा है कि डाइबिटीज जैसी बीमारियों के आधार पर क्लेम रिजेक्ट करना उचित नहीं है, जब तक कि वह मृत्यु या बीमारी का सीधा कारण न हो1लोन के साथ बीमा खरीदने की मजबूरी:RBI और IRDAI के नियमों के अनुसार, कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान आपको किसी खास बीमा कंपनी से पॉलिसी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर ऐसा दबाव डाला गया है, तो आप IRDAI या बैंकिंग ओम्बड्समैन के पास शिकायत कर सकते हैं1

बीमा क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें?

सच्ची और पूरी जानकारी दें:बीमा फॉर्म भरते समय अपनी सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां सही-सही दें, भले ही फॉर्म सिंप्लिफाइड हो।पॉलिसी डॉक्युमेंट्स ध्यान से पढ़ें:सभी शर्तें, एक्सक्लूजन, और क्लेम प्रोसेस को अच्छी तरह समझें।मेडिकल टेस्ट की मांग करें:अगर आपको कोई गंभीर या पुरानी बीमारी है, तो मेडिकल टेस्ट करवाकर ही पॉलिसी लें, ताकि बाद में विवाद न हो।बीमा कंपनी चुनने की आज़ादी:बैंक या लोन कंपनी के दबाव में आकर किसी खास कंपनी की पॉलिसी न लें। बाजार में उपलब्ध विकल्पों की तुलना करें।

क्लेम रिजेक्शन होने पर क्या करें?

बीमा कंपनी से लिखित जवाब लें:क्लेम रिजेक्शन का कारण लिखित में मांगें।कंज्यूमर फोरम या कोर्ट जाएं:अगर आपको लगता है कि आपके साथ अन्याय हुआ है, तो कंज्यूमर कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील करें। कई मामलों में उपभोक्ता फोरम ने पॉलिसीधारक के पक्ष में फैसला दिया है1IRDAI या बैंकिंग ओम्बड्समैन से शिकायत करें:जबरन बीमा खरीदवाने या अन्य शिकायतों के लिए नियामक संस्थाओं का सहारा लें।

निष्कर्ष

होम लोन के साथ मिलने वाली बीमा पॉलिसी सुरक्षा का एक अच्छा विकल्प हो सकती है, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा करना सही नहीं है। बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम रिजेक्शन के मामले बढ़ रहे हैं, खासकर पूर्व-स्थित बीमारियों के नाम पर। अपने अधिकार जानें, सभी जानकारियां सही दें, और जरूरत पड़े तो कानूनी सहायता लें। बीमा का असली मकसद तभी पूरा होगा जब मुश्किल समय में परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिले, न कि और परेशानियां बढ़ें।

नोट: यह लेख आपके जानकारी के लिए है। किसी भी बीमा पॉलिसी को खरीदने या क्लेम करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Source: ECONOMIC TIMES

  • Related Posts

    भारत में रियल एस्टेट से अमीर कैसे बनें? आसान भाषा में एक्सपर्ट की पूरी प्लेबुक

    अशविंदर आर. सिंह एक सीनियर रियल एस्टेट लीडर हैं, जो वर्तमान में BCD Group के Vice Chairman और CEO हैं और CII Real Estate Committee के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने…

    Continue reading
    2026 में भारत में पैसा कमाने के सच्चे बिज़नेस लेसन: अटेंशन, ब्रांडिंग और प्राइसिंग की पूरी गाइड

    नीचे इस पॉडकास्ट पर आधारित लगभग 3000 शब्दों का आसान, बातचीत‑जैसा हिंदी आर्टिकल है, जो छोटे‑मोटे बिज़नेस ओनर्स और नए उद्यमियों के लिए लिखा गया है। 2026 में भारत में…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    पूर्व की बुरी आदतें छोड़कर नई दैवी आदतें कैसे अपनाएं? | श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का मार्गदर्शन

    पूर्व की बुरी आदतें छोड़कर नई दैवी आदतें कैसे अपनाएं? | श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का मार्गदर्शन

    भारत में रियल एस्टेट से अमीर कैसे बनें? आसान भाषा में एक्सपर्ट की पूरी प्लेबुक

    भारत में रियल एस्टेट से अमीर कैसे बनें? आसान भाषा में एक्सपर्ट की पूरी प्लेबुक

    मांस बिक्री पर रोक: शास्त्र, अहिंसा और राष्ट्रीय चेतना की ओर लौटता भारत

    मांस बिक्री पर रोक: शास्त्र, अहिंसा और राष्ट्रीय चेतना की ओर लौटता भारत

    क्या SIP से अमीर बनने की बात झूठ है ?

    क्या SIP से अमीर बनने की बात झूठ है ?

    2026 में भारत में पैसा कमाने के सच्चे बिज़नेस लेसन: अटेंशन, ब्रांडिंग और प्राइसिंग की पूरी गाइड

    2026 में भारत में पैसा कमाने के सच्चे बिज़नेस लेसन: अटेंशन, ब्रांडिंग और प्राइसिंग की पूरी गाइड

    ज़हरीले ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़ें: नेल पॉलिश से फेयरनेस क्रीम तक 7 चीज़ें और उनके नेचुरल विकल्प

    ज़हरीले ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़ें: नेल पॉलिश से फेयरनेस क्रीम तक 7 चीज़ें और उनके नेचुरल विकल्प