सरकार ने समझाया,कैसे EPFO नए नियम से लोगों को फायदा

यहाँ EPFO और EPS के नए नियमों पर आधारित विस्तारपूर्वक लेख प्रस्तुत किया गया है। इसमें सरकार द्वारा हाल ही में किए गए संशोधनों, मंत्रालय की स्पष्टीकरण, नई निकासी नीति, विवाद, और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सभी पहलुओं का विवरण मिलता है​.

EPFO और EPS के नए नियम: लाभ, विवाद, और सरकारी स्पष्टीकरण

सरकार द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के नियमों में हाल ही में किए गए संशोधनों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा और विवाद उत्पन्न किया है। मंत्रालय ने इन बदलावों का उद्देश्य और उनके पीछे की सोच स्पष्ट करने के लिए विस्तार में कदम उठाए हैं।

विवाद और आलोचना की पृष्ठभूमि

इन संशोधनों के बाद, विशेष रूप से सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने वाले कई पोस्ट हुए, जिसमें दावा किया गया कि नए नियम कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने इन संशोधनों को कर्मचारियों के धन की “खुली चोरी” बताते हुए सरकार की आलोचना की। ऐसी स्थिति में, श्रम मंत्रालय और EPFO ने आधिकारिक तौर पर एक बयान जारी कर उनके स्पष्टीकरण को साझा किया।

मंत्रालय का संक्षिप्त स्पष्टीकरण

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारियाँ कर्मचारीों के लिए भ्रम का कारण बन रही हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन पोस्ट्स में निकासी नियम, पात्रता और खातों की पहुंच संबंधी तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। दरअसल, हाल में लागू किए गए नए नियम सदस्यों के लिए दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा और वृद्धावस्था में बेहतर वित्तीय सुरक्षा के उद्देश्य से ही बनाए गए हैं।

EPF निकासी के नियमों में बदलाव

पहले EPF खाते के आंशिक निकासी के लिए 13 प्रकार की अलग-अलग शर्तें थीं, जिससे सदस्यों को भ्रम होता था और बार-बार निकासी दावा खारिज होते थे। नए unified framework के तहत, अब आंशिक निकासी के लिए एक ही नियम लागू हुआ है। पुराने नियम के तहत, सदस्य केवल अपना कर्मचारी सहयोग और उस पर प्राप्त ब्याज का 50-100% ही निकाल सकते थे। नए नियम के अनुसार, अब निकासी योग्य राशि में न केवल कर्मचारी सहयोग व ब्याज बल्कि नियोक्ता का सहयोग भी शामिल रहेगा।

बेरोजगारी की स्थिति में निकासी

यदि कोई सदस्य बेरोजगार हो जाता है, तो EPF खाते से कुल बैलेंस (नियोक्ता + कर्मचारी योगदान और ब्याज) का 75% तुरंत निकाला जा सकता है। शेष 25% राशि एक वर्ष बाद भी निकाली जा सकती है। यदि सदस्य 55 वर्ष की आयु के बाद सेवानिवृत्त होता है, स्थायी विकलांगता/अक्षमता या भारत छोड़कर बाहर चला जाता है तो पूरी राशि निकाली जा सकती है।

न्यूनतम बैलेंस की आवश्यकता

मंत्रालय ने बताया कि सदस्यों द्वारा बार-बार निकासी के परिणामस्वरूप रिटायरमेंट के समय उनकी EPF मात्रीका में बहुत कम राशि बचती थी। आंकड़ों के अनुसार, अंतिम निपटान के समय 75% सदस्यों के खाते में ₹50,000 से कम और 50% सदस्यों के पास केवल ₹20,000 रहते थे। इससे कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को 8.25% की कम्पाउंडिंग का लाभ नहीं मिल पाया। इसी कारण 25% न्यूनतम राशि खाते में रखना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षा सुनिश्चित हो।

EPS पेंशन नियमों में बदलाव

नई व्यवस्था के तहत, कोई सदस्य 36 महीने की अवधि के बाद ही EPS खाते में जमा पेंशन राशि निकाल सकता है, पहले यह सीमा मात्र 2 महीने थी। हालांकि पेंशन पाने का अधिकार 58 वर्ष की आयु पर पूर्ववत रहेगा। सदस्य अपनी पेंशन जमा राशि 10 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले कभी भी निकाल सकता है, लेकिन पेंशन प्राप्ति के लिए EPS सदस्यता की न्यूनतम 10 वर्ष सेवा पूरी करनी होगी।

आंकड़ों के अनुसार, लगभग 75% सदस्य चार साल के भीतर पूरी जमा राशि निकाल लेते हैं जिससे सदस्यता समाप्त हो जाती है और भविष्य की पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से सदस्य वंचित हो जाते हैं। अगर पेंशन निधि नहीं निकाली जाती है और सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार तीन वर्ष तक पेंशन लाभ पा सकते हैं, लेकिन राशि निकलने के बाद यह लाभ समाप्त हो जाता है।

परिवार के लिए सुरक्षा

नई नीति का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक कर्मचारी EPS में 10 वर्ष की सेवा पूरी करें, जिससे न केवल वे पेंशन के हकदार बनें, बल्कि उनके परिवार भी सदस्य की मृत्यु के बाद पेंशन का लाभ पा सकें। अब पेंशन फंड की निकासी 36 महीने बाद ही संभव होगी जो सामाजिक सुरक्षा को लंबी अवधि तक सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष

मंत्रालय के अनुसार, EPFO और EPS के नए नियम कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा तथा उनके वृद्धावस्था को आर्थिक दृष्टि से सुरक्षित और सहज बनाने के लिए लाए गए हैं। सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों के विपरीत, ये बदलाव पारदर्शिता, सरलता और दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किए गए हैं। बार-बार निकासी सीमित करने और न्यूनतम बैलेंस व पेंशन में नई नीति से कर्मचारी और उनके परिवारों को मजबूत सुरक्षा चक्र मिलेगा।

इसी अच्छे उद्देश्य के साथ सरकार ने संशोधित EPF, EPS पेंशन निकासी नियमों को लागू किया है, जिससे सदस्यों को बड़े पैमाने पर लाभ मिलेगा और भविष्य में सामाजिक सुरक्षा बढ़ेगी।​

  1. https://economictimes.indiatimes.com/wealth/save/epfo-new-rules-after-backlash-government-explains-how-revised-epf-eps-pension-withdrawal-rules-will-benefit-members/articleshow/124606450.cms

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