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आज सोशल मीडिया पर हर दूसरा यूट्यूबर, व्लॉगर, जर्नलिस्ट, खुद को “स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट” और “म्यूचुअल फंड गुरु” बताकर लोगों के पैसों से खिलवाड़ कर रहा है। असली फाइनेंशियल प्लानर, इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर SEBI से लाइसेंस लेकर सख़्त नियमों के तहत काम करते हैं, जबकि ये फिनफ्लुएंसर सिर्फ़ व्यू, लाइक, एफिलिएट लिंक और रिफ़रल कमीशन के लिए भ्रामक “टिप्स” बेच रहे हैं।
SEBI ने अब ऐसे फिनफ्लुएंसर्स पर नकेल कसनी शुरू कर दी है – अनरजिस्टर्ड सलाह देना ग़ैर-क़ानूनी है, जुर्माने और बैन तक की नौबत आ सकती है – लेकिन हम निवेशकों को भी जागना पड़ेगा। हर वीडियो पर बस ये तीन सवाल पूछिए:cskruti+1
- क्या ये व्यक्ति SEBI-registered है? रजिस्ट्रेशन नंबर साफ़ दिखा रहा है या नहीं?
- क्या ये “गैरंटी रिटर्न”, “डबल पैसा”, “सीक्रेट स्ट्रैटेजी” जैसी बातें कर रहा है?
- क्या इसके लिंक से किसी ऐप, डीमैट, टिप्स सेवा, पेड कोर्स या टेलीग्राम ग्रुप पर पैसा बन रहा है?
अगर जवाब संदिग्ध है – तुरंत चैनल छोड़िए, रिपोर्ट कीजिए, और अपने पैसे किसी लाइसेंस प्राप्त सलाहकार से ही मैनेज कराइए।
1. ये नया खतरा: यूट्यूब फिनफ्लुएंसर बनाम असली सलाहकार
पिछले कुछ सालों में स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है, और साथ ही अचानक “फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर” यानी फिनफ्लुएंसरों की फौज खड़ी हो गई है। कैमरा, अच्छी एडिटिंग और तेवरदार आवाज़ के दम पर ये लोग खुद को एक्सपर्ट दिखाकर करोड़ों लोगों के दिमाग और पैसों पर कब्ज़ा करने लगे हैं।
दिक्कत क्या है? असली SEBI-registered इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र, रिसर्च एनालिस्ट और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर सालों की पढ़ाई, एग्ज़ाम, रेगुलेशन और जवाबदेही के दायरे में काम करते हैं, जबकि ये खुदघोषित “गुरु” किसी भी तरह की जिम्मेदारी लिए बिना लोगों को खरीदने–बेचने की सलाह दे रहे हैं।
2. असली प्रोफेशनल कौन होते हैं, और कैसे काम करते हैं?
पहले ये समझना ज़रूरी है कि असली, वैध और ज़िम्मेदार सलाहकार कौन हैं:
- SEBI Registered Investment Adviser (RIA):
- इन्हें रिटेल इन्वेस्टर्स को पर्सनलाइज्ड सलाह देने के लिए SEBI से रजिस्ट्रेशन लेना पड़ता है।
- इन्हें एग्ज़ाम, एजुकेशन क्वालिफिकेशन, नेटवर्थ आदि शर्तें पूरी करनी होती हैं और कोड ऑफ कंडक्ट फॉलो करना पड़ता है।
- SEBI Registered Research Analyst:
- ये रिसर्च रिपोर्ट, स्टॉक/सेक्टर एनालिसिस बनाते हैं जिन पर कड़े डिस्क्लोज़र और डॉक्युमेंटेशन के नियम लगते हैं।
- Mutual Fund Distributor / AMFI Registered:
- इन्हें AMFI/NISM के एग्ज़ाम पास करने होते हैं और रेगुलेटरी गाइडलाइंस फॉलो करनी पड़ती हैं।
इन सब पर ये सख़्त प्रतिबंध है कि वे “गैरंटी रिटर्न” का वादा नहीं कर सकते, रिस्क छुपा नहीं सकते, और क्लाइंट के हित के खिलाफ सलाह नहीं दे सकते – अगर ऐसा करते हैं तो SEBI उन पर भारी पेनाल्टी लगा सकता है, रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकता है और मार्केट से बैन कर सकता है।
3. ये यूट्यूबर, व्लॉगर, जर्नलिस्ट क्या कर रहे हैं?
आज कई यूट्यूबर, जर्नलिस्ट, व्लॉगर और “फाइनेंस कंटेंट क्रिएटर” खुद को “शिक्षा” देने वाला बताते हैं, लेकिन असल में ये बिना रजिस्ट्रेशन अनऑफिशियल इन्वेस्टमेंट सलाह दे रहे हैं। इनके कुछ आम हथकंडे इस तरह हैं:
- थंबनेल पर चिल्लाते हुए शब्द:
- “1 लाख को 1 करोड़ बनाओ”, “ये स्टॉक आपको अमीर बना देगा”, “ये म्यूचुअल फंड कर देगा फ्यूचर सेट” – ये सब क्लासिक मिसलीडिंग प्रमोशन है।
- सीक्रेट स्ट्रैटेजी, इनसाइडर टाइप वाली भाषा:
- “मैनेजमेंट के अंदर से खबर”, “डील कन्फर्म है”, “अगले हफ्ते सर्किट पे सर्किट लगेगा” – ये सब साफ-साफ रेड फ्लैग हैं, क्योंकि कोई भी लॉजिकल, प्रोफेशनल एडवाइज़र इस तरह की भाषा नहीं इस्तेमाल करता।
- रिफ़रल लिंक, एफिलिएट कमीशन, प्रॉफिट-शेयरिंग:
- बहुत से फिनफ्लुएंसर ब्रोकिंग ऐप, इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म, टिप्स सर्विस, कोर्स, टेलीग्राम चैनल आदि से रिफ़रल और प्रोफिट-शेयरिंग लेते हैं।
- SEBI ने साफ इशारा किया है कि रेग्युलेटेड एंटिटीज़ को अनरजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर से पेड टाई-अप और मार्केटिंग से बचना चाहिए।
- “शिक्षा” के नाम पर रियल टाइम टिप्स:
- वीडियो पर लाइव मार्केट डेटा, “अभी खरीदो, अभी बेचो” टाइप कमेंट्री, टेलीग्राम पर intraday target – ये सब “एजुकेशन” नहीं, प्रत्यक्ष सलाह है। SEBI ने रियल टाइम डेटा के इस तरह इस्तेमाल पर रोक की दिशा में सख़्त गाइडलाइन बनाई हैं और डेटा को lag के साथ दिखाने की बात कही है।
इन सबका नतीजा यह है कि जिन लोगों को रिस्क, एसेट एलोकेशन, टैक्स, टाइम होराइज़न जैसे बेसिक कॉन्सेप्ट की समझ नहीं होती, वे सिर्फ़ यू-टर्न लेने वाले वीडियो देखकर अपने लाइफ टाइम सेविंग्स से जुआ खेलना शुरू कर देते हैं।
4. SEBI ने क्या-क्या कदम उठाए हैं?
नियामक हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठा है; SEBI ने पिछले कुछ सालों में कई कार्रवाई और गाइडलाइन जारी की हैं:
- अनरजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइज़री पर पेनाल्टी:
- कई केसों में SEBI ने ऐसे लोगों पर लाखों–करोड़ों के जुर्माने लगाए हैं, जिनमें बिना रजिस्ट्रेशन स्टॉक टिप्स बेचने वालों को फाइन और disgorgement (गलत कमाई वापस कराने) का आदेश दिया गया।
- फिनफ्लुएंसर पर नियंत्रण:
- SEBI ने “फिनफ्लुएंसर” को लेकर कंसल्टेशन पेपर जारी किया और कहा कि रेग्युलेटेड एंटिटी (ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस आदि) अनरजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर से पेड प्रमोशन का सौदा नहीं करें।
- सोशल मीडिया पर रियल टाइम लाइव डेटा के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई, ताकि disguised टिप्स छुपकर ना बेचे जा सकें।
- रजिस्ट्रेशन डिटेल्स दिखाने की अनिवार्यता:
- प्रस्तावित नियमों में कहा गया है कि जो भी SEBI-registered एंटिटी सोशल मीडिया पर कंटेंट डालती है, उसे अपना नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर साफ़-साफ दिखाना होगा।
- इसका फायदा यह है कि आम निवेशक आसानी से पहचान सके कि सामने वाला सचमुच लाइसेंस प्राप्त प्रोफेशनल है या सिर्फ़ सेल्फ-प्रोक्लेम्ड “गुरु”।
- प्लेटफॉर्म से सहयोग:
- रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर ऐसे अकाउंट्स को चिन्हित और हटाने के लिए काम कर रहा है, जो रेगुलेशन तोड़ रहे हैं।
इसका मतलब, कानून का पहिया घूम रहा है – लेकिन इसमें समय लगेगा, और इस बीच निवेशक को खुद भी जिम्मेदार बनना पड़ेगा।
5. निवेशक खुद को कैसे बचाए? (प्रैक्टिकल चेकलिस्ट)
अगर आप वाकई अपने पैसे को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हर ऑनलाइन फाइनेंस कंटेंट देखते समय ये सरल लेकिन सख़्त नियम अपनाइए:
- रजिस्ट्रेशन नंबर देखिए
- क्या वीडियो, प्रोफ़ाइल या डिस्क्रिप्शन में SEBI रजिस्ट्रेशन नंबर साफ लिखा है? जैसे “SEBI Registered Investment Adviser – INA…”, “Research Analyst – INH…”, या AMFI ARN नंबर।
- अगर कोई खुद को “फाइनेंशियल प्लानर”, “इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट” या “SEBI रजिस्टर्ड” कह रहा है लेकिन नंबर नहीं दिखा रहा – तुरंत अलर्ट हो जाइए।
- भाषा पर ध्यान दीजिए
- “गारंटीड रिटर्न”, “डबल पैसा”, “जीरो रिस्क”, “100% प्रॉफ़िट” जैसे शब्द सुनते ही समझिए कि ये व्यक्ति नियमानुसार बात नहीं कर रहा। SEBI नियम साफ कहते हैं कि कोई भी रजिस्टर्ड एंटिटी ऐसे वादे नहीं कर सकती।
- वास्तविक, ईमानदार सलाह हमेशा रिस्क, समय और अनिश्चितता की बात करती है।
- हितों के टकराव (Conflict of interest) की पहचान
- क्या वीडियो में बार-बार किसी एक ऐप, ब्रोकर, कोर्स, पेड टेलीग्राम ग्रुप या टिप्स सर्विस का प्रचार हो रहा है?
- क्या every लिंक किसी ऐसी जगह ले जा रहा है जहां से कंटेंट क्रिएटर को रिफ़रल फीस, कमीशन या प्रॉफिट-शेयर मिलता है? SEBI ने फिनफ्लुएंसर की ऐसी कमाई के मॉडल्स को स्पष्ट रूप से risk area के रूप में चिन्हित किया है।
- रियल टाइम टिप्स से दूर रहें
- अगर कोई “अभी खरीदो, अभी बेचो”, “आज का jackpot stock”, “कल सुबह 9:15 पर ये order लगाओ” जैसा कंटेंट दे रहा है, मान लीजिए कि यह एजुकेशन नहीं, अनरजिस्टर्ड टिप्स हैं।
- असली एजुकेशन में स्ट्रैटेजी, लॉजिक, रिस्क मैनेजमेंट समझाया जाता है, न कि लाइव ट्रेडिंग सिग्नल दिए जाते हैं।
- अपनी सीमा जानिए
- जितना पैसा खोने की हिम्मत नहीं है, उतना पैसा “यूट्यूब सलाह” पर कभी मत लगाइए।
- पहले आपातकालीन फंड, इंश्योरेंस, बुनियादी जरूरतें सेट कीजिए, फिर डीमैट में एक्सपेरिमेंट कीजिए। यह वही बेसिक डिसिप्लिन है जिस पर हर प्रोफेशनल प्लानर जोर देता है।
6. ऐसे लोगों पर लगाम कैसे कसी जा सकती है?
सिस्टम को मजबूत बनाना सरकार, रेगुलेटर, प्लेटफॉर्म और निवेशक – सभी की जिम्मेदारी है। कुछ ठोस कदम जो समाज और रेगुलेटर उठा रहे हैं या जिन्हें आगे और बढ़ाया जा सकता है:
- और सख़्त गाइडलाइन व लाइसेंस सिस्टम
- SEBI ने फिनफ्लुएंसरों पर कंट्रोल के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क शुरू किया है, लेकिन इसे और साफ-साफ बनाकर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि बिना रजिस्ट्रेशन किसी भी तरह की स्पेसिफिक इन्वेस्टमेंट रिकमेंडेशन देना सीधे-सीधे उल्लंघन है।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
- प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स के लिए वेरिफिकेशन बैज जैसा सिस्टम लाना चाहिए, जो SEBI-registered हैं, ताकि यूज़र को तुरंत पहचान मिल सके। SEBI पहले ही प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट फिल्टरिंग और वेरिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
- सर्च और रिकमेंडेशन में बदलाव
- सर्च रिज़ल्ट और रिकमेंडेशन में unregistered tip दे रहे चैनल की reach सीमित की जा सकती है, जबकि SEBI-registered, शिक्षाप्रद और डिस्क्लोज़र-फॉलो करने वाले कंटेंट को प्रमोट किया जा सकता है।
- सख़्त पेनाल्टी और उदाहरण सेट करना
- जब-जब SEBI किसी अनरजिस्टर्ड एडवाइज़र पर कड़ा जुर्माना और बैन लगाता है, तो इसका मैसेज पूरे बाजार में जाता है।
- ऐसे मामलों को ज़्यादा पब्लिक करके आम आदमी को दिखाना ज़रूरी है कि “लाइक और व्यू” के नाम पर गलत खेल करने की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है।
- निवेशक शिक्षा अभियान
- स्कूल, कॉलेज, टीवी, रेडियो और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम चलाने होंगे, जिसमें साफ बताया जाए कि रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड सलाह में फर्क क्या है।
7. मीडिया और जर्नलिस्ट की भूमिका
जिन पत्रकारों और मीडिया हाउसों पर लोग भरोसा करते हैं, अगर वही टीआरपी और क्लिक के लिए “हॉट स्टॉक टिप्स” या स्पॉन्सर्ड फिनफ्लुएंसर को प्रमोट करने लगें, तो नुकसान दुगना हो जाता है।[
- जर्नलिस्ट को न्यूज़ और एडवाइस के बीच स्पष्ट लाइन खींचनी होगी – न्यूज़ देना ठीक है, पर “आप ये स्टॉक खरीदें/बेचें” कहकर निवेश निर्णय को प्रभावित करना उनका काम नहीं है, जब तक वे खुद रेगुलेटरी लाइसेंस लेकर, डिस्क्लोज़र के साथ यह काम न करें।
- मीडिया हाउसों को भी अपनी एडिटोरियल पॉलिसी में ये लिखकर लागू करना चाहिए कि कोई भी निवेश सलाहकार कंटेंट बिना उचित डिस्क्लोज़र और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स के प्रसारित नहीं होगा।
8. एक सख़्त लेकिन ज़रूरी संदेश
जो लोग कैमरे के सामने मुस्कुराते हुए, चमकदार ग्राफिक्स के बीच, आपके डर और लालच का फायदा उठाकर “आसान अमीरी” के सपने बेच रहे हैं, वे आपके दोस्त नहीं, आपके पैसों के दुश्मन हैं।
अगर आप सच में अपने परिवार के भविष्य से प्यार करते हैं, तो याद रखिए:
- लाइसेंस के बिना ऑपरेट करने वाला डॉक्टर, इंजीनियर या वकील आपको स्वीकार नहीं है, तो फिर अपने जीवनभर की कमाई किसी बिना लाइसेंस वाले “स्टॉक गुरु” के भरोसे कैसे छोड़ सकते हैं?
- असली प्रोफेशनल प्लानर और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर ने अपने करियर, समय और मेहनत को दांव पर लगाकर रेगुलेटरी सिस्टम के भीतर रहकर काम करना चुना है; उनकी भूमिका को यूट्यूब के दो वायरल वीडियो से “डायल्यूट” होने देना न आपके लिए सही है, न देश की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए।
इसलिए अगली बार जब कोई वीडियो आपके सामने आए और उसका टाइटल हो – “ये कर लो, जिंदगी सेट” – तो सबसे पहले एक सवाल पूछिए:
“क्या ये इंसान SEBI के सामने जवाबदेह है, या सिर्फ़ व्यूज़ के सामने?”
आपका पैसा आपका खून-पसीना है; उसे बचाना आपकी पहली जिम्मेदारी है। कानून, रेगुलेटर और ईमानदार प्रोफेशनल्स तभी सफल होंगे, जब आप खुद भी जागरूक, सख़्त और समझदार बनेंगे।






