एक IT प्रोफेशनल एकांश की ये कहानी है – लेकिन असल में ये हम सबकी कहानी हो सकती है। SIP ने कैसे उसके सपनों वाले घर, बेटी की पढ़ाई और आरामदायक रिटायरमेंट का रास्ता बनाना शुरू किया, बस वही समझना है। एकांश और मशहूर फाइनेंसियल इन्फ़्लुएन्सर अंकुर वारिकू के बीच बातचीत से कैसे बना सफलता का रास्ता.
शुरुआत: नौकरी पक्की, पैसे ढीले
एकांश 42 साल का है, IT कंपनी में काम करता है, अच्छी सैलरी है, पत्नी भी जॉब करती हैं, दोनों की मिलाकर इन‑हैंड इनकम करीब 2.85 लाख रुपये महीना है। सुनने में सब बढ़िया लगता है – अच्छा करियर, प्यारी‑सी 8.5 साल की बेटी, माता‑पिता, छोटा भाई, सब साथ‑साथ एक ही सोसायटी में रहते हैं।
जिंदगी आराम से चल रही थी, लेकिन पैसे… वो बस “चल” रहे थे।
- दो घरों के लोन चल रहे थे – एक पैरेंट्स के लिए, एक भाई के लिए।
- खुद एक 3BHK किराये के फ्लैट में रहते थे, 18,700 रुपये महीने का किराया।
- दो कारों के EMI अलग से – 17,600 और 8,500 रुपये महीने।
- बेटी की पढ़ाई पर साल के करीब 2.7 लाख रुपये।
ऊपर से PF, NPS, PPF, Sukanya, term insurance, health insurance – सब कुछ थोड़ा‑थोड़ा चल रहा था, लेकिन एकांश को खुद नहीं पता था कि ये सब मिलकर कहाँ ले जा रहा है।
उसकी सबसे बड़ी टेंशन ये थी:
- क्या मैं 10–15 साल में आराम से रिटायर हो पाऊँगा?
- क्या बेटी की पढ़ाई के लिए मेरे पास सही टाइम पर सही पैसा होगा?
- क्या कभी अपना बड़ा सा घर होगा जिसमें माता‑पिता, पत्नी, बेटी – सब एक साथ रह सकें?
यही सवाल लेकर वो मनी मैटर्स शो में पहुँचा।
गड़बड़ कहाँ थी: निवेश तो था, दिशा नहीं थी
कई मिड‑क्लास फैमिलियों की तरह एकांश ने भी “सेफ” दिखने वाली हर चीज में पैसा डाल रखा था:
- PF में अच्छी खासी कटौती – खुद का, कंपनी का और ऊपर से voluntary PF भी।
- NPS में 5‑5 हजार रुपये महीना, खुद का और पत्नी का।
- PPF में दोनों मिलकर 25,000 रुपये महीना।
- बेटी के लिए Sukanya Samriddhi – सालाना 1.5 लाख तक।
- कुछ LIC‑टाइप पॉलिसी, एक HDFC Click2Wealth ULIP जिसमें वो 5,000 रुपये महीना दे रहा था, पर उसे ये भी ठीक से याद नहीं था कि 15 साल बाद मिलेगा क्या!
इसके अलावा:
- SIPs भी चल रहे थे – कुल 60,000 रुपये महीना (20k खुद के, 20k बेटी के, 20k पत्नी के नाम पर), लेकिन उसे ये भी नहीं पता था कि पैसा किस‑किस mutual fund में जा रहा है।
मतलब, निवेश हो तो रहा था, लेकिन:
- न साफ़ goal‑wise प्लान था,
- न प्रॉडक्ट समझ थे,
- न ये clarity कि कौन सा पैसा “safe” है और कहाँ ज़्यादा growth की जरूरत है।
ये वही हालत थी जो हम में से बहुत लोगों की है – “कुछ न कुछ तो कर रहे हैं, लेकिन सही कर रहे हैं या नहीं, idea नहीं।”
SIP का रोल: वॉरिकू की नज़र से प्लान साफ़ हुआ
वॉरिकू ने उसकी पूरी financial picture एक्सेल शीट में खोलकर देखी। फिर तीन बड़े goals तय किए:
- बेटी की higher education – 10 साल बाद (जब वो 18 की होगी)।
- एकांश और पत्नी की retirement – लगभग 15 साल बाद।
- खुद का बड़ा घर – जिसमें माता‑पिता भी साथ रह सकें, EMI और rent मिलाकर खर्च कंट्रोल में रहे।
अब आता है SIP का जादू।
1) Safe assets already enough थे
वॉरिकू ने पहले ये देखा कि safe assets (PF, NPS, PPF, Sukanya, traditional plans वगैरह) में उसका कितना पैसा जा रहा है।
लगभग:
- PF + NPS मिलाकर family income का करीब 28% पहले ही safe जगहों पर जा रहा था।
- ऊपर से PPF के 25,000 रुपये महीने, यानी करीब 9% और।
कुल मिलाकर, वो लगभग 37% income already safe instruments में डाल रहा था।
वॉरिकू का साफ़ पॉइंट:
- इस उम्र (42–43) में 35–40% income safe assets के लिए काफी है।
- इसके ऊपर और “safe” में पैसा डालने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे growth कम हो जाएगी।
यहीं से SIP की असल importance शुरू होती है – क्योंकि अब बचा हुआ पैसा future goals के लिए growth वाले assets (equity mutual funds) में लगाना ज़रूरी था।
2) बेटी की पढ़ाई – SIP से built‑up corpus
बेटी की पढ़ाई का टाइम horizon लगभग 10 साल का था। इतनी लंबी duration के लिए FD या केवल Sukanya जैसी schemes बहुत conservative हो जाती हैं – inflation को beat नहीं कर पातीं।
इसलिए वॉरिकू ने suggest किया:
- बेटी के नाम पर अलग SIP structure बनाओ।
- महीने का total 20,000 रुपये बेटी के future के लिए equity mutual funds में SIP से लगाओ।
उन्होंने तरीका भी बताकर समझाया:
- 10,000 रुपये – Nifty50 index fund में (large cap, relatively stable)।
- 6,000 रुपये – mid‑cap mutual fund में (थोड़ा ज़्यादा growth potential)।
- 4,000 रुपये – small‑cap mutual fund में (high growth, high volatility, लेकिन 10 साल लंबा समय है)।
और जो एक पुरानी policy से 16–17 लाख का lump sum मिलने वाला था, उसमें से भी सुझाया गया कि वो पैसा बेटी के नाम equity funds में ही re‑invest करे:
- 8 लाख – Nifty50
- 5 लाख – mid cap
- 3 लाख – small cap
Projection ये था कि 10 साल तक SIP + ये lump sum equity में रहने पर बेटी की पढ़ाई के लिए काफी मजबूत corpus बन सकता है, और अगर 15 साल तक छोड़ा जाए तो ये amount लगभग double के आसपास जा सकता है।
यहाँ SIP का lesson ये है:
- फिक्स रकम से हर महीने निवेश,
- लंबी duration (10–15 साल),
- equity का power,
- सब मिलकर बेटी की पढ़ाई को tension‑free बना सकते हैं।
ये planning बिना SIP के almost impossible था।
3) खुद की retirement – step‑up SIP से बड़ा corpus
दूसरा बड़ा goal था – एकांश और उसकी पत्नी की retirement, लगभग 15 साल बाद।
वॉरिकू ने यहाँ दो बातें कीं:
- PF, NPS, PPF जैसे safe हिस्से को retirement base माना।
- उसके ऊपर जो SIPs चल रहे थे (लगभग 40,000 रुपये महीना husband–wife दोनों मिलाकर), उन्हें ठीक से structure करने को कहा।
उन्होंने suggest किया कि दोनों मिलाकर 40,000 रुपये महीने की SIP को तीन buckets में बांटा जाए:
- 20,000 – Nifty50 index fund
- 10,000 – mid cap fund
- 10,000 – small cap fund
और सबसे important twist:
- हर साल इस SIP को 10% बढ़ाने की आदत डालो – यानी step‑up SIP।
उदाहरण:
- पहले साल 40,000 रुपये महीना
- अगले साल 44,000,
- फिर 48,400, और ऐसे ही हर साल 10% बढ़ता रहेगा।
अगर ये step‑up SIP 15 साल तक discipline से चलता रहा, तो वॉरिकू के हिसाब से husband–wife मिलाकर लगभग 6.43 करोड़ रुपये का corpus बन सकता है (equity returns के reasonable assumption पर)।
अब सोचिए – ये 6.43 करोड़, ऊपर से PF, NPS, PPF, Sukanya, बाकी घर की assets अलग।
यानी, SIP ने सिर्फ “saving” नहीं करवाई, SIP ने retirement की आज़ादी बनाने का रास्ता दिखाया।
SIP ने घर का सपना भी practical बना दिया
एकांश की एक और बड़ी इच्छा थी – अपना बड़ा घर, जहाँ वो, उसकी पत्नी, बेटी और माता‑पिता सब एक साथ रह सकें। आज वो खुद किराये पर 3BHK में रहता था, जबकि दो flats (parents और brother के लिए) और एक commercial shop उसके नाम assets के रूप में थे।
वॉरिकू ने यहाँ numbers के ज़रिए समझाया:
- parents वाला flat – करीब 55 लाख की value, 19 लाख का loan चल रहा था, EMI 17,500 रुपये।
- shop की value – 30 लाख रुपये के आसपास, loan पहले ही खत्म कर चुका था।
Net देखें तो:
- shop + parents flat मिलाकर लगभग 85 लाख की asset value थी,
- loan काटकर करीब 69–70 लाख की net equity बनती थी।
अगर वो shop + parents वाला flat बेच दे और खुद 40 लाख तक का नया home loan ले ले, तो EMI + current rent मिलाकर लगभग वही monthly outgo रखते हुए 1–1.2 करोड़ का नया घर खरीद सकता है।
यानी:
- खर्च वही के वही (EMI + rent ≈ नई EMI),
- लेकिन asset – एक बड़ा, family‑friendly घर, जिसमें सब साथ रह सकते हैं।
ये भी SIP mentality जैसा ही है:
- छोटे‑छोटे current comfort (shop की ownership, पुराना flat) sacrifice करके,
- long‑term बड़ी comfort (permanent बड़ा घर) create करना।
SIP हमें ये mindset सिखाती है – अभी थोड़ा adjust, बाद में बहुत बड़ा reward।
कहानी का असली सार: SIP क्यों इतना ज़रूरी है?
एकांश की पूरी journey से SIP के कुछ बहुत साफ़ lessons निकलते हैं।
1) SIP discipline सिखाती है
हर महीने fixed तारीख को fixed रकम account से निकलती है – ये आपको forced saver बना देती है। एकांश भी हर महीने 60,000 रुपये SIP में डाल रहा था, तभी ये प्लान possible हुआ।
2) SIP goal‑based planning को आसान बनाती है
वॉरिकू ने SIPs को तीन clear goals से जोड़ दिया:
- बेटी की पढ़ाई के लिए अलग SIP structure
- retirement के लिए अलग SIP + step‑up
- पुरानी policies से मिलने वाला पैसा भी lumpsum के रूप में उसी goal‑based SIP plan में डालना
जब SIP किसी नाम से जुड़ जाती है – “बिटिया education SIP”, “retirement SIP” – तो बीच में उसे तोड़ने का मन कम करता है।
3) SIP risk को time में फैला देती है
Market कभी ऊपर, कभी नीचे – लेकिन SIP हर month अलग‑अलग price पर units खरीदती है:
- market high हो तो कम units,
- market low हो तो ज्यादा units।
10–15 साल में ये averaging आपके favour में काम करती है। बेटी की पढ़ाई और retirement दोनों में लंबा horizon होने से SIP का power और भी ज़्यादा बढ़ जाता है।
4) Step‑up SIP – salary बढ़े तो निवेश भी बढ़े
एकांश जैसे salaried लोगों के लिए सबसे बड़ी चाबी है – हर साल SIP बढ़ाना।
- salary बढ़ती है, lifestyle बढ़ाने में पूरा पैसा लगा देते हैं, तो future वही का वही रह जाता है।
- salary बढ़ती है, SIP भी 10–15% बढ़ती है, तो corpus में explosive growth आ जाता है।
6.43 करोड़ वाला retirement corpus इसी step‑up SIP की वजह से possible दिख रहा था।
5) SIP बिना समझे नहीं, जिम्मेदारी के साथ
एकांश की गलती ये थी कि वो 60,000 रुपये महीने की SIP तो कर रहा था, लेकिन उसे ये भी नहीं पता था कि पैसा किन mutual funds में लग रहा है, risk profile क्या है, expense ratio क्या है।
वॉरिकू ने साफ़ कहा – SIP का मतलब ये नहीं कि “friend को दे दिया, वो जो चाहे कर ले।” SIP करने वाले को इतना तो समझना ही पड़ेगा:
- कौन सा fund – index, midcap, smallcap
- goal कितना साल दूर है
- कितनी return expectation reasonable है
SIP powerful हथियार है, पर उसे आँख मूँद कर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अगर आप भी एकांश जैसे हैं तो…
मान लीजिए आप भी:
- 30–45 की age में हैं,
- salaried हैं,
- घर का loan/किराया, बच्चों की पढ़ाई, माता‑पिता की जिम्मेदारी सब है,
- PF/NPS/PPF/Sukanya सब में थोड़ा‑थोड़ा डाल रहे हैं,
- और mutual fund SIP भी “बस कर रहे हैं”, पर खुद को clear नहीं कि ये सब मिलकर कहाँ पहुँचाएगा।
तो एकांश की कहानी से आप तीन immediate action निकाल सकते हैं:
- अपनी पूरी financial picture एक excel में साफ‑साफ लिखिए – income, EMI, rent, insurance, PF/NPS/PPF, SIPs, सब कुछ।
- तीन–चार बड़े goals लिखिए – जैसे: बेटे/बेटी की higher education, retirement, घर, कोई बड़ा dream।
- हर goal के लिए अलग‑अलग SIP structure बनाइए – duration और risk के हिसाब से (जैसे 10+ साल हों तो equity heavy)।
और सबसे ज़रूरी:
- जितना जल्दी हो सके, SIP शुरू कीजिए या existing SIPs को goal‑based बना दीजिए।
- हर साल SIP में step‑up डालिए – चाहे 5%, 10% या जितना possible हो।
एकांश की तरह हो सकता है आपको भी आज लगे कि “यार, मैं already काफी late हूँ।” लेकिन SIP की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है – जिस दिन जागो, उसी दिन से सही।
अंत में: SIP सिर्फ product नहीं, आदत है
एकांश की स्टोरी में दो चीजें parallel चल रही हैं:
- एक तरफ़ जिम्मेदार बेटा, पति और पिता – जो parents के लिए घर खरीदता है, बेटी की पढ़ाई का सोचे बिना सो नहीं पाता, retirement की tension भी है।
- दूसरी तरफ़ धीरे‑धीरे mature होता investor – जिसे समझ आता है कि सिर्फ “safe” products से काम नहीं चलेगा, equity और SIP की मदद लेनी ही पड़ेगी।
SIP ने उसके लिए ये तीन काम किए:
- future goals को measurable बना दिया (कितने साल में, कितना पैसा चाहिए)।
- हर महीने की income को smart तरीके से बाँट दिया (कितना safe, कितना growth)।
- discipline और patience सिखा दी – जो किसी भी financial journey का असली fuel है।
एकांश की तरह अगर आप भी थोड़ा‑सा वक्त निकालकर अपने numbers देख लें, goals लिख लें और SIP को अपनी जिंदगी की आदत बना लें, तो घर हो, बच्चों की पढ़ाई हो या retirement – हर सपना थोड़ी‑थोड़ी किस्तों में आपके करीब आता रहेगा।








